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Thursday, April 28, 2011

उपभोक्ता सेवा को आजकल कंपनियाँ शायद मजाक समझती हैं, खासकर एयरटेल (AirTel Customer Care worse services..)

    जब से बैंगलोर आये हैं, तब से उपभोक्ता सेवाओं से त्रस्त हैं, पता नहीं यहाँ सारी कंपनियों में क्या मजा चल रहा है, किसी को उपभोक्ता की पड़ी ही नहीं है। या ये हो सकता है कि मुंबई में हमें अच्छी उपभोक्ता सेवाओं की आदत पड़ जाने से यह सब पच नहीं पा रहा है।

    एयरटेल AirTel तो खासकर उपभोक्ता सेवाओं पर ध्यान नहीं दे रही है, वैसे तो खैर कोई भी कंपनी नहीं दे रही है, अब हमारा सामना एयरटेल AirTel से हुआ तो उसी के बारे में कहेंगे।

    हमने १३ अप्रैल को डोकोमो DOCOMO के नेटवर्क कवरेज से त्रस्त होकर नंबर पोर्टेबिलिटी के लिये एयरटेल AirTel में नंबर बदलने के लिये आवेदन किया था। और फ़िर १९०१ से हमारे पास कल सुबह हमारे पास एस.एम.एस. भी आ गया कि २७ अप्रैल को रात १० बजे डोकोमो DOCOMO की सेवाएँ बंद हो जायेंगी और सुबह ५ बजे से एयरटेल AirTel की सेवाएँ शुरु हो जाएँगी।

    हमने एयरटेल AirTel वाले बंदे को सिम के लिये फ़ोन किया जो कि कार्पोरेट कनेक्शन बेचता है, जब तक हमें एयरटेल AirTel सिम नहीं देगा तब तक हम बिना फ़ोन नंबर के हो गये। :(

    एयरटेल AirTel के बंदे का जबाब था “सर जिस लड़के के पास सिम थी, उसने इस्तीफ़ा दे दिया है अब सिम मिलने में देरी होगी, अगर आपको जल्दी सिम चाहिये तो मैं आपको सिम का सीरियल नंबर दे देता हूँ आप एयरटेल AirTel की गैलरी पर जाकर यह सिम नंबर दीजिये और कहिये कि मेरी सिम खो गई है :(, तो आपको सिम मिल जायेगी”, मैंने कहा “मैं क्यों बोलूँ कि मेरी सिम खो गई है, जब मुझे मिली ही नहीं, पहले मुझे सिम दो फ़िर मैं खोऊँगा फ़िर बोलूँगा कि सिम गुम हो गई है, और यह एयरटेल AirTel की समस्या है मेरी नहीं, कि मुझे अभी तक एयरटेल AirTel सिम नहीं दे पाया।”

    खैर बहुत हुज्जत करने के बाद एयरटेल AirTel वाले ने कहा कि कल सुबह सिम मिल पायेगी और उसके दो घंटे बाद शुरु हो पायेगी, तो मैंने उसे साफ़ शब्दों में कह दिया कि “मैं सेवाओं पर बहुत ध्यान देता हूँ और  सुबह  मेरा ६ बजे अगर मेरा फ़ोन बंद हुआ तो मैं कल ही एयरटेल AirTel की सेवाएँ सरेंडर कर दूँगा, जब तुम लोग बेचने के पहले ऐसी सेवाएँ दे रहे हो तो बाद में कैसी दोगे”, फ़िर भले ही मुझे नया नंबर क्यों न लेना पड़े, और जो तकलीफ़ नहीं झेलना चाह रहा था वह तकलीफ़ झेलनी पड़े। तो वह बंदा बोलता है “सर सिम तभी सरेंडर हो सकती है जब वह एक्टीवेट हो जाये, उसके बाद गैलरी पर जाकर सरेंडर कर दीजियेगा”। अब बतायें क्या ऐसी कंपनी के साथ रह सकते हैं।

    फ़िर मैने शिकायत करने के लिये एयरटेल AirTel के उपभोक्ता सेवाओं के अधिकारियों के नंबर अंतर्जाल पर ढूँढ़ने की कोशिश की, तो पता चला कि नोडल ऑफ़िसर बैठा रखे हैं, परंतु वे भी ना के बराबर हैं, पता नहीं सुनिल मित्तल जी ने कैसी फ़ौज मैदान में छोड़ रखी है, अगर ऐसा ही चलता रहा तो बस हो गया। एयरटेल AirTel वालों को साफ़ साफ़ कह देना चाहिये कि भई हमें नया काम नहीं चाहिये, जो है वही नहीं संभल रहा है। और तो और शिकायत करने के लिये किसी भी अधिकारी का फ़ोन नंबर या ईमेल नहीं दिया गया है, निजी क्षैत्र की कंपनी से आशा की जा सकती है कि वे तो सेवाएँ अच्छी देंगे।

    ऐसे ही मेरे एक मित्र ने एयरटेल AirTel का आई.पी. कनेक्शन के लिये गैलरी में आवेदन किया और उन्होंने ९९९ रुपये नकद जमा करवा लिये, अब पंद्रह दिन हो चले हैं, पर एयरटेल AirTel है कि कनेक्शन देने का नाम नहीं दे रहा है। जब भी वह फ़ोन करता है तो बस कहते हैं कि दो तीन दिन में हो जायेगा। जब उनसे कहा गया कि मैं भी अगर बिल के लिये यहीं कहकर पंद्रह बीस दिन बाद बिल भर दूँगा आश्वासन दूँ तो क्या आप लोग मान जाओगे, तो हँसकर दाँत निपोरते हुए जबाब मिलता है, “नहीं सर”। और हमारे मित्र का डॉयलाग था कि बैंगलोर में तो एयरटेल AirTel वालों की मस्ती चल रही है, सेवाएँ देना ही नहीं चाहते हैं।

    अब सोच लिया है कि एयरटेल AirTel कंपनी का तो कनेक्शन लूँगा ही नहीं, अब भले ही मुझे मोबाईल नंबर ही बदलना पड़े, बदल लूँगा। ऐसी कंपनी के साथ रहने से अच्छा है कि थोड़ी तकलीफ़ सहकर किसी और कंपनी की सेवाएँ ले ली जायें। देखते हैं कि कौन सी कंपनी की सेवाएँ अच्छी मिलती है।

Tuesday, April 26, 2011

सभी अपनी हसरतें और चाहतें केवल देखकर ही मिटाना चाहते हैं।

    लगभग नौ के ऊपर तीस मिनिट पर घर से निकला क्योंकि बाहर गाँव जाने की बस रात को बारह में कम पंद्रह मिनिट पर थी। पीठ पर अपना लैपटॉप बैग टाँग रखा था, जीन्स टीशर्ट और नीले रंग की फ़टफ़टाती हुई चप्पल, जो कि मनपसंद थी और थोड़ी कपड़ों के साथ जँचकर श्टाईलिश भी लग रही थी।

    चल पड़ा लोकल बस पकड़ने बस अड्डे जाने के लिये, बस के लिये बने स्टैंड पर पहुँचा तो वहाँ एक कपल जो कि दोस्त लग रहे थे, शादीशुदा तो नहीं लग रहे थे, परंतु आजकल वैसे भी कपल को देखकर बोलना बहुत मुश्किल होता है कि दोनों मियाँबीबी हैं या नहीं, और तो और आजकल लड़कियाँ न बिंदी लगाती हैं, न माँग भरती हैं, न चूड़ियाँ पहनती हैं और न ही मंगलसूत्र और अगर पहना भी होगा तो मजाल कि वह दिख भी जाये।

     कुछ एक दो लड़के और खड़े थे, पास में ऑटो खड़ा था और बस का इंतजार हो रहा था, पास ही कुछ चार पाँच लड़के खड़े हुए बातें कर रहे थे, वे केवल अपना समय सड़क पर खड़े होकर बिता रहे थे। जितने भी लड़के खड़े थे सबकी नजरें केवल उस लड़की पर ही थीं, लड़की ने सभ्य कपड़े पहने हुए थे और पूरे अंग ढ़ंके हुए थे। लिबास से अच्छे घर की लग रही थी और लड़के से आंग्लभाषा में बात कर रही थी।

    एक लड़का सामने से फ़ोन पर बात करता हुआ सड़क से आ रहा था और निगाहें गिद्ध की तरह केवल लड़की पर, सारे साले मर्द ना कुत्ते ही होते हैं जहाँ लड़की दिखी नहीं बस वहीं फ़ैल लिये, दोपहर में ही फ़िलिम देखकर आया था उसका डॉयलाग याद आ गया (थैंकयू) ।

    मोटरसाईकिल वाला यू टर्न ले रहा था और लड़की देखकर केवल उसे ही देखता रह गया और टकराने ही वाला था कि उसके पहले ही उसके लालच पर जोखिम सवार हो गया था और चुपचाप चलाने पर ध्यान देने लगा।

    लफ़्फ़ाज ऐसे देखते हैं जैसे कि लड़की देखी ही नहीं, बीबी साथ में चल रही है, मगर मजाल कि उसे देखे बिना निकल जायें, अगर विपरीत दिशा से आ रहे हैं तो बहुत ही बढ़िया और अगर पीछे से आ रहे हैं और केवल पीछे से दर्शन हो रहे हैं तो फ़िर लंगूर मुड़कर जरूर देखेंगे। फ़िर भले ही वह पंद्रह साल का नौजवान हो या पचपन साल का जवान।

    बस का इंतजार करते करते दस में पंद्रह मिनिट कम रह गये थे और बस थी कि आने का नाम ही नहीं ले रही थी, लड़की लड़के पर झल्ला रही थी, पर दोनों को पता था कि झल्लाने से कुछ नहीं होगा, थोड़ी देर में ही बस आ गई। कपल और लेपटॉप बैग लिये वह भी चढ़ गया। यह अलग बात है कि बैग में लैपटॉप नहीं था केवल एक दिन के कपड़े मात्र थे। कपल ने उसे ध्यान से देखा फ़िर वह सीट पर जाकर अपनी ही मुद्राओं में लीन हो गया।

    सोच रहा था कि फ़िलिम का डॉयलाग कितना सही है समाज पर, सच्चाई तो है, मगर कितने लोग इसको मानते हैं, पता नहीं !!

    वैसे एक बात तो सच है कि लड़्की को देखने के लिये उम्र से कोई फ़र्क नहीं पड़ता है, सभी अपनी हसरतें और चाहतें केवल देखकर ही मिटाना चाहते हैं।

Monday, April 25, 2011

लेपटॉप में कम्पेटिबल बैटरी याने कि असली जैसी भी उपलब्ध (Compatible Battery for Laptops)

 सोनी वायो   मेरे पास सोनी वायो का VGN-CRN506E क्रोकोडायल कवर का विशेष संस्करण का लेपटॉप है, और इसे उपयोग करते हुए मुझे लगभग ढ़ाई साल हो गये हैं। पहले बैटरी का बैकअप २-३  घंटे मिलता था, फ़िर धीरे धीरे बैटरी बैकअप कम होता गया। आखिरी बार साँस लेने के पहले करीबन १५ मिनिट का बैकअप रह गया था, फ़िर बैटरी नमस्ते हो गई। बैटरी को लेपटॉप ने डिटेक्ट करना ही बंद कर दिया।

    मुंबई में बिजली की समस्या थी ही नहीं तो बैटरी नहीं होना अखर भी नहीं रहा था। और करीबन ६-८ महीने ऐसे ही निकाल दिये अब बैंगलूरू में आये तो यहाँ बिजली रानी लुकाछिपी खेलती पाई गईं, और कुछ भी काम करो अचानक कभी भी बिजली गायब, बहुत गुस्सा आता था, और पठन लेखन का मन का जो वेग होता था वह अचानक ठंडा पड़ जाता था।

    बैटरी की बहुत सख्त जरूरत महसूस होने लगी, पर जब हमने सोनी वायो के उपभोक्ता सेवा पर पूछा कि बैटरी कितने की है, पता चला कि बैटरी लगभग 9,990 रुपये की है, तो हमनेलेपकेयर बैटरी इतने रुपये बैटरी पर खर्च न करने का फ़ैसला लिया। इससे अच्छा तो नेटबुक खरीद लेंगे जो कि 15-19 हजार रुपये में उपलब्ध है। और ऐसे ही एक दिन मन के वेग का सत्यानाश हुआ तो हम तत्काल उठ पहुँचे हायपर सिटी नेटबुक देखने के लिये और मन में यह भी था कि फ़िर यह लेपटॉप फ़ालतू हो जायेगा, घर में इलेक्ट्रॉनिक कचरा जमा करना शुरु। (घर के पास मॉल होने के यही नुक्सान हैं, कभी भी मुँह उठाओ पहुँच लो )

    नेटबुक लेनेवो की पसंद भी आ रही थी, जो कि हमारे लायक सारे काम कर सकती थी। फ़िर एकाएक हमने सेल्समैन से पूछ लिया कि बैटरी खराब हो गई तो क्या होगा, तो कहते हैं न कि बिन माँगे भगवान मिल जाते हैं, बस भगवान मिल गये, उसने कहा कि आजकल कंपेटिबल बैटरी आने लगी है तो वह बारह से चौदह सौ रुपये तक मिल जायेगी। हमारे दिमाग की बत्ती एकदम जल उठी, फ़िर हमने पूछा कि क्या हमारे सोनी वायो की बैटरी भी मिल जायेगी तो उसने झट से कहा कि हाँ वह भी मिल जायेगी एस.पी. रोड पर मार्केट के पास।

    बस फ़िर क्या था हमने जस्ट-डॉयल जस्ट डॉयल को फ़ोन किया और लेपटॉप बैटरी के डीलरों के फ़ोन  नंबर लिये और फ़ोन खटाखटाना शुरु किये, तो पता चला कि बैंगलोर में सोनी की बैटरी ही नहीं है और जो मोडल की बैटरी हमें चाहिये उसका स्टॉक ही नहीं है। २-३ जगह मिली भी तो भाव बहुत ज्यादा बताये गये, हमने उज्जैन अपने मित्र को फ़ोन करके बाजार भाव पता लगा लिया था कि 3,200 रुपये की बैटरी मिलेगी और यहाँ बैंगलोर में तो लोग लूटने में लगे हैं 4,000 रुपये से कम तो कोई मान ही नहीं रहा था। खैर जैसे तैसे हमें 3,200 रुपये की बैटरी मिल गई और साथ ही एक् वर्ष की रिप्लेसमेंट वारंटी भी ।

    कंपेटिबल बैटरी लेपकेयर  lapcare  की ली, जिस पर एक वर्ष की रिप्लेसमेंट वारंटी है और अभी यह बैटरी लगभग  दो घंटे का बैकअप दे रही है। और ओरिजिनल बैटरी लगभग ३ घंटे का बैकअप देती है और वारंटी भी एक वर्ष की है तो इस लिहाज से हम फ़ायदे में रहे। ओरिजिनल की कीमत में तो हम अगले दो वर्ष और नई कंपेटिबल बैटरी खरीद सकते हैं।

Sunday, April 24, 2011

जीवन तूफ़ानी दरिया, शून्यहीन चुप्पी और वीराने… मेरी कविता.. विवेक रस्तोगी

    जीवन कभी कभी तूफ़ानी दरिया लगता है और कभी बिल्कुल शुन्यहीन चुप्पी के साथ थमा हुआ दरिया लगता है। कभी लहरें आती हैं, कभी तूफ़ान आते हैं, कभी सन्नाटे आते हैं, कभी वीरानी आती है। जीवन के ये अजीब रंग सात रंगों से भी अजीब हैं, कौन से ये रंग हैं, कहाँ बनते हैं ये रंग, जो मौन भी हैं, जो मुखर भी हैं।

        वीरानों को ढूँढता हूँ, वीराने खुद ही पास आ जाते हैं, क्या मैं वीराने में रहता हूँ, यह उत्सव वीरानों में क्यों नहीं होते, ये उत्सव केवल तूफ़ानों में क्यों होते हैं, ज्यादा रंग केवल उत्सव में ही क्यों होते हैं, और वीराने में गहरे रंग क्यों ?

    क्या जीवन की कहानी है, क्या अंत की रवानी है, बस सब अब प्रपंच लगने लगा है, जीवन की गहराईयों में झांक रहे हैं, जहाँ तूफ़ान के बाद की शांति हो, जहाँ सन्नाटा और वीराना हो, और दो बातें लिखने के लिये अमिट स्याही हो -जिंदगी और वीराने

लम्हों में जिंदगी सिमट कर रह गयी है

बूँदें पानी की, बहता दरिया सी लगती हैं

आग के लिये तिनके कम पड़ने लगे हैं

साँसे थामे रखो, अब ये उखड़ने लगी हैं ।

Saturday, April 23, 2011

रीयल एक्टिव फ़ाईबर प्लस (Real Activ Fiber +)

    रीयल एक्टिव फ़ाईबर प्लस डाबर इंडिया लिमिटेड का उत्पाद है जो कि पूरी तरह से देशी है। दावा किया गया है कि यह १०० प्रतिशत फ़लों का रस है, अलग से शक्कर नहीं डाली गई है और न ही किसी प्रिजर्वेटिव का उपयोग किया गया है।

    dabur_active_fiber यह गुणकारी है इसका एक ग्लास जूस पीने से जो कि लगभग २०० मि.ली. होता है से एक फ़ल की आपूर्ती करता है, और ४०% तक कम कैलोरी आपको मिलती हैं जो कि आपके मनपसंदीदा नाश्ते में होती हैं। नाश्ता - एक समोसा, या पिज्जा की स्लाईस या फ़िर बटर सैडविच।

    इसमें फ़लों का गूदा मिलाया गया है जिससे यह गाढ़ा और अच्छे स्वाद का होता है। यह आपको तरोताजा कर देगा।

    आज फ़ाईबर की जरूरत क्यों है ? क्योंकि हो सकता है कि आपको खाने मॆं भरपूर फ़ाईबर नहीं मिल रहा हो तो आहार को संतुलित रखने के लिये यह जरूरी है। रोज आहार में कितना फ़ाईबर लेना चाहिये ? रोज खाने में २५ ग्राम फ़ाईबर लेना चाहिये और इसके एक गिलास से ३ ग्राम फ़ाईबर की आपूर्ती शरीर को होती है।

इसके चार गुण बताये गये हैं -

Manage weight & Stay fit

Keep digestive system healthy

Maintain heart health

Enhance fullness

एक लीटर के पैक में लगभग ५३० कैलोरी होती हैं।

    इस पैक को रिसायकल्ड डब्बे में पैक किया गया है वैसे इसकी एम.आर.पी. ९० रुपये है, परंतु अभी ट्रायल ऑफ़र में ७० रुपये में उपलब्ध है। एक्स्पायरी छ: महीने की है।

    हमने इसके दो भिन्न स्वादों को चखा है पहला है मल्टी फ़्रूट और दूसरा है ओरेंज सिट्रस पंच।

    मल्टी फ़्रूट का स्वाद हमें बहुत भाया और ओरेंज सिट्रस पंच थोड़ा खट्टा है ऐसा लगता है कि जैसे संतरा ही मुंह में रख लिया है।

कुल मिलाकर अच्छा है और नये स्वादों को चखने की इच्छा है।

Friday, April 22, 2011

मोबाईल नंबर पोर्टेबिलिटी याने कि अच्छे ग्राहकों के लिये झंझट (Mobile Number Portability)

    जब भी किसी नये शहर में जाओ और अगर राज्य भी बदल जाये तो फ़िर सबसे बड़ी समस्या आजकल आती है, मोबाईल नंबर की, क्योंकि रोमिंग पर नंबर महँगा पड़ता है और लोकल में कम से कम आने वाले फ़ोन के लिये तो पैसे नहीं खर्च करना पड़ते हैं।

    समस्या नयी जगह जाकर होती है कि कौन सी कंपनी की सेवाएँ अच्छी हैं और किसके टैरिफ़ प्लान अच्छॆ हैं, यहाँ आकर टाटा डोकोमो (Tata docomo) लिया क्योंकि टैरिफ़ प्लान बहुत अच्छा था, ३४९ रुपये में ७५० मिनिट लोकल और एस.टी.डी. फ़्री, २०० एस.एम.एस. फ़्री, २०० एम.बी. जी.पी.आर.एस. डाटा फ़्री और ऊपर से ३जी, जो कि ३जी में सबसे सस्ता प्लान था। जब डोकोमो के शोरूम पर पहुँचे तो पता चला कि एक रीबोक की घड़ी उपहार में है, हालांकि हमें घड़ी की जरूरत नहीं थी, फ़िर भी ले ली, अब मुफ़्त में जो मिले वो अच्छा है यह हम भारतियों की मानसिकता है और मैं तो कट्टर भारतीय हूँ :) ।

    समस्या शुरु हुई नेटवर्क को लेकर जब ऑफ़िस में हमें नई जगह मिली तो वहाँ कभी सिग्नल ऐसे आते थे कि जैसे मोबाईल फ़ोड़्कर निकल जायेंगे और कभी ऐसे गायब जैसे गधे के सिर से सींग, फ़िर घर आते आते बीच में कहीं कहीं तो ये हालत है कि २ कि.मी. तक के क्षैत्र में सिग्नल ही नहीं मिलते हैं, हमने १२१ पर उपभोक्ता सेवा पर फ़ोन किया तो हमें कहा गया कि हम क्षमा चाहते हैं, हम जल्दी ही नेटवर्क कवरेज ठीक करते हैं, वैसे अभी भी बहुत अच्छा है, सबसे बड़ी खासियत यह है कि कोई भी कंपनी कभी अपनी गलती मानती ही नहीं। हमें कहा गया कि आप जिस हैंडसेट का उपयोग कर रहे हैं, उसमें समस्या है तो हमने उनसे कहा भई हमारे पास एक बी.एस.एन.एल. की सिम है और उसी हैंडसेट में बराबार सिग्नल आते हैं, कोई समस्या नहीं फ़िर आपकी कंपनी की सिम क्या हैंडसेट पहचान लेता है या हमारे हैंडसेट से आपकी कंपनी की कोई दुश्मनी है, तो कोई जबाब नहीं मिला।

    और तो और फ़ोन पर अगर पूरे सिग्नल आ रहे हैं और किसी और फ़ोन से प्रयास करेंगे तो भी आपको सुनाई देगा कि फ़ोन बंद है या नेटवर्क कवरेज के बाहर है। हमने डोकोमो से कहा कि अगर आप को इतना ही अपने नेटवर्क पर विश्वास है तो आईये अपने हैंडसेट के साथ और जहाँ जहाँ हम कह रहे हैं वहाँ चलिये हमारे साथ और बताईये हमें कि आपका नेटवर्क बहुत अच्छा है, तो हमें कहा गया कि नहीं हमारे यहाँ यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।

    आखिरकार परेशान होकर हमने फ़ैसला लिया कि अब दूसरी कंपनी की सेवाएँ ली जायें, हालांकि सब कंपनियों का हाल एक जैसा है, चोर चोर मौसेरे भाई बिल्कुल सटीक कहावत है इनके लिये। जब हमने नंबर पोर्टेबिलिटी के लिये आवेदन दिया तो हमारे पास फ़िर उपभोक्ता सेवा डोकोमो से फ़ोन आये कि क्या समस्या है तो फ़िर वही राग आलापा गया खैर अब १९०१ से संदेश आ गया है कि आपका नंबर एयरटेल (AirTel) में हो जायेगा।

    नंबर पोर्टेबिलिटी में जिस कंपनी का सिम अभी उपयोग किया जा रहा है वह कंपनी बहुत आसानी से एन.ओ.सी. नहीं देती है और नंबर पोर्टॆबिलिटी का आवेदन का जो नया नंबर होता है वह केवल १५ दिन वैध रहता है। सरकार ने अच्छी सुविधा तो दी है, परंतु अभी भी इसमें बहुत जटिलता है, इसे और सुगम बनाना होगा।

    खैर अब देखते हैं कि एयरटेल की मोबाईल सुविधा आनंदमय होती है या फ़िर ९० दिन बाद नई कंपनी के लिये जाना होगा ।

Tuesday, April 19, 2011

Sunday, April 17, 2011

स्पीक एशिया ऑनलाईन संभावित बड़ा घोटाला तो नहीं (Probable Scam SpeakAsiaOnline.com !!)

कुछ दिनों पहले इंदौर से भाई का फ़ोन आया कि क्या आपने स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com का नाम सुना है, हमने कहा कि नहीं भई बताओ हमें भी क्या है यह ?

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जैसा हमारा भाई स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के सेमिनार में सुनकर आया था, वह यह था -

स्पीक एशिया ऑनलाईन  SpeakAsiaOnline.com के बारे में -

  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी पिछले ५-६ वर्ष से सर्वे में है।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी पहले मानविक सर्वे करवाती थी।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी मानविक सर्वे से अच्छे परिणाम न आने के कारण ऑनलाईन सर्वे करवाने बाजार में आयी है।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com मानविक सर्वे में पहले अपने अधिकारी को प्रति सर्वे फ़ॉर्म ५०० रुपये तक देती थी, परंतु आम आदमी अपनी जानकारी नहीं देता था, तो जो कंपनी स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.comको सर्वे के लिये अनुबंधित करती थी, वह बाजार से सही जानकारी नहीं ले पाती थी, क्योंकि अधिकारी अपने मनमर्जी से किसी की भी जानकारी दे देता था।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com अधिकारी को पहले महीने में ६-८ फ़ॉर्म देती थी जिससे केवल वह अधिकारी कड़ी धूप में कड़ी मेहनत करके ही ४,००० रुपये तक कमा पाता था।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com ने बाद में फ़ैसला किया कि अब अधिकारियों को फ़ॉर्म देने की जगह अब सीधे उपभोक्ता से जुड़कर सीधे उनसे ही सर्वे करवाया जाये।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com ने लगभग ११ महीने पहले ऑनलाईने सर्वे की शुरुआत की जिसका अंतर्जाल पता है www.speakasiaonline.com
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com अपना नया सर्वर लगा रही है जो कि फ़ेसबुक और गूगल से भी बड़ा होगा।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com एक नया टीवी चैनल शूरु करने जा रही है।

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के रजिस्ट्रेशन के बारे में -

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के विज्ञापन के बारे में -

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com संभावित घोटाला क्यों हो सकता है -

  •  स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी सिंगापुर में व्यापार करने के लिये सिंगापुर सरकार द्वारा क्यों प्रतिबंधित है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com जब से घटित की गई है, तब से ३ बार अपना नाम क्यों बदला ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी का नाम सर्वे कंपनियों में क्यों नहीं आता है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के बारे में कुछ लोग कहते हैं कि यह पिछले १५ वर्षों से बाजार में है, पर वेबसाईट पर स्पीक एशिया ऑनलाईन के रजिस्ट्रेशन के बारे में यह क्यों बताया गया है कि यह २००६ में रजिस्टर्ड है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com ने अपने किसी भी ग्राहक के बारे में क्यों जानकारी नहीं दी है जो कि उनके सर्वे का उपयोग करते हैं ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com अपने कमाई का जरिया क्यों नहीं बताता है, वह क्यों छिपाकर रखा है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com क्यों अभी तक डॉलर में पैसा दे रही है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com पैनल को देने वाली रकम जो कि कमाई है भारत सरकार को कर क्यों नहीं दे रही है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com सर्वे से क्या पैसे कमाना क्या इतना आसान है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com केवल बुधवार को मात्र एक घंटे काम करने पर कैसे १,००० रुपये पैनल को देती है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com सर्वे जैसी और भी ऑनलाईन सर्वे कंपनियाँ बाजार में क्यों नहीं हैं ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com सर्वे कंपनी से अगर वाकई पैसे कमाना इतना आसान है तो केवल एक ही सर्वे कंपनी बाजार में क्यों है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कह रही है कि उनकी कमाई इस वर्ष में ११५ मिलियन डॉलर से ज्यादा हो जायेगी तो हरेन्द्र कौर (सीईओ) और तारक बाजपेयी (भारत प्रमुख) के नाम शीर्ष प्रमुखों की सूची में कहीं भी क्यों नहीं हैं।
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com का नाम कहीं भी बिजनैस टाइकून्स में क्यों नहीं है, जबकि वैश्विक स्तर पर इतनी तेजी से बड़ती हुई कंपनी है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com का अभी तक भारत में कोई कार्यालय क्यों नहीं है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के वेबसाईट पर कोई भी वैधानिक दस्तावेज प्रदर्शित क्यों नहीं है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कंपनी अगर बंद हो जाती है तो भारत में कोई भी अधिकृत व्यक्ति नहीं है क्यों ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com कमाई से टीडीएस क्यों नहीं काटती है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com पर सीईओ और एम.डी. के संदेश क्यों नहीं हैं ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com क्यों एक जैसे सर्वे प्रति बुधवार दे रही है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com एक जैसे सर्वे देने से क्या इनको वाकई कमाई हो रही है ?
  • स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com एक डॉलर के ५० रुपये कैसे दे रहा है जबकि इसका असली बाजार मूल्य ४६ रुपये के आसपास है ?

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के जैसे घोटाले पहले भी भारत में हो चुके हैं -

स्पीक एशिया ऑनलाईन SpeakAsiaOnline.com के बारे में क्या ज्यादा जानकारी के लिये भारत सरकार कुछ कर रही है ? अभी तक लगभग ९ लाख लोगों से ये लोग पैसे ऐंठ चुके हैं और लगातार भोले भाले लोगों को फ़ँसा रहे हैं, क्या साईबर क्राईम पुलिस इस बारे में संज्ञान लेकर इसकी तह तक जाने की कोशिश करेगी ? क्या रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया इतने बड़े फ़ोरेक्स ट्रांजेक्शनों से अनभिज्ञ है ?

आज जब मैंने कंपनी की वेबसाईट पर जाकर डेमो सर्वे करने की कोशिश की तो एरर मैसेज आ गया -

speakasiaonline

अपनी प्रतिक्रिया बतायें - वैसे मुझे तो लगता है कि कंपनी अगस्त २०११ में सब माल असबाब लपेटकर गायब होने वाली है। बाकी तो समय ही बतायेगा कि क्या सही है और क्या गलत !!

Thursday, April 14, 2011

देखते हैं कि अन्ना और जनता के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का कितना असर हुआ है (Now I have to check the Effect of Anna and public Movement against Corruption)

   अब बहुत दिनों बाद फ़िर सरकारी कार्यालय में चक्कर लगाना पड़ेगा, क्योंकि हमें अब ड्राईविंग लायसेंस बनवाना है, कल हमने इस बारे में पूछताछ की तो पता चला कि अगर हम सीधे आर.टी.ओ. दफ़्तर जायेंगे तो बहुत चक्कर लगवाये जायेंगे और अगर सुविधापूर्ण तरीके से लायसेंस बनवाना चाहते हैं तो किसी ड्रायविंग स्कूल वाले को पकड़ लें और आसानी से लायसेंस बनवा लें।

    हमने पूछा कि फ़िर तो ड्राईविंग स्कूल वालों का सुविधाशुल्क भी होगा, तो पता चला कि हाँ सुविधाशुल्क के नाम पर आर.टी.ओ. में रिश्वत का भी कुछ हिस्सा होता है।

    अब सोच रहे हैं कि सीधे आर.टी.ओ. जाकर अन्ना और जनता के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का असर देखा जाये और रिश्वत के बिना लायसेंस बनवाया जाये या फ़िर अपनी सुविधा का ध्यान रखते हुए सुविधाशुल्क देकर लायसेंस बनवा लिया जाये।

    वैसे भी कर्नाटक में कोई भी काम सरकारी कार्यालय में बिना रिश्वत के होता नहीं है, ये तो नारायण मूर्ती और विप्रो के प्रबंधन  भी बोल चुके हैं और इस पर सरकार की चुप्पी इस बात का समर्थन करती है।

    वैसे आजकल हम ट्रॉफ़िक पुलिस को ओल्ड एयरपोर्ट पर खड़े होकर गाहे बगाहे लोगों को परेशान करते हुए देखते हैं, और जबरन उगाही करते हुए दुनिया देखती है।

Wednesday, April 13, 2011

सेन्सोडाइन टूथपेस्ट विज्ञापन का बोलबाला (Effect of Advertisement - SENSODYNE Toothpaste)

    हर बार की तरह इस बार भी हायपरसिटी जाना हुआ सब्जियों और किराना लाने के लिये, तो वहाँ सेन्सोडाइन टूथपेस्ट से मुठभेड हुई। हमारी घरवाली बोली कि यह बहुत अच्छा टूथपेस्ट है, आजकल टीवी पर बहुत विज्ञापन आ रहा है और बहुत अच्छा बताया जा रहा है। हम हैरान परेशान कि बताओ हमें खबर ही नहीं है और ये सेन्सोडाइन हमारे घर में हमारे घर के लोगों के दिमाग में घुस गया।

sensodyne-gyaniz

    खैर हमने सोचा (लिखने के लिये, नहीं तो सोचने का मौका ही कहाँ मिलता है, आजकल), अब लेना तो है ही, देख लेते हैं कि कितने ग्राम का है और कितने रुपये देने हैं, और उत्पाद की एक्सपायरी दिनांक क्या है। पता चला कि यह तीन स्वाद में आता है और ८० ग्राम उत्पाद का भाव ७५ रुपये। साथ ही पता चला कि यह उत्पाद पहले भी बाजार में उपलब्ध था परंतु केवल तभी लिया जाता था जब डॉक्टर बोलते थे, इसीलिये उत्पाद पर चेतावनी भी है कि १२ वर्ष से छोटॆ बच्चे इस उत्पाद का उपयोग न करें। साथ ही बड़ों के लिये भी चेतावनी है कि अगर टूथपेस्ट से जलन होने लगे तो इसका उपयोग करना बंद कर दें।

    वैसे उत्पाद को खूबसूरती से पैक किया गया है पैकेट के दो तरफ़ सेन्सोडाइन फ़्रेश मिन्ट है और एक तरफ़ उत्पाद को कैसे उपयोग किया जाये, क्यों किया जाये, किन रसायनों का उपयोग यह टूथपेस्ट बनाने में किया गया है इसकी भी जानकारी दी गई है (अगर आम उपभोक्ता को समझ में आ जाये तो), उपभोक्ता सेवा का फ़ोन नंबर भी दिया गया है। उत्पाद सोलन हिमाचल प्रदेश में बनाया जाता है और ग्लेक्सोस्मिथकाईन कंपनी इसका बाजार में विज्ञापन कर रही है। ब्रांड इन्हीं का है। एक तरफ़ दाँत और मसूड़ों का फ़ोटो लगाया गया है, जिसके जरिये उपभोक्ता को ज्ञान देने की कोशिश की गई है और साथ ही ४ प्रश्नों के उत्तर भी हैं -

1. What is Tooth sensitivity?

2. Why have I got it ?

3. Why is Sensodyne right for me?

4. How does it work ?

अभी उत्पाद का उपयोग करना शुरु किया है और यह उत्पाद भी अन्य प्रतिस्पर्धी उत्पादों जैसा ही लग रहा है। पर हाँ यह उत्पाद जेब पर भारी जरुर है, तो सोच समझ कर खरीदियेगा, वैसे भी एक बार उपयोग करनें में कोई बुराई भी नहीं।

Monday, April 11, 2011

माइक्रोवेव में टाईमपास बनाना

हमने माइक्रोवेव लिया और उसे पर फ़िर तरह तरह के उपयोग भी शुरु हो गये।

    पॉपकॉर्न बनाना - मक्का में २ चम्मच सरसों का तेल, नमक और हल्दी मिलाकर, टाईम्स ऑफ़ इंडिया के आधे पेज का लिफ़ाफ़ा बनाकर उसके अंदर मक्का डालकर लिफ़ाफ़ा बंदकर, माईक्रो में २ मिनिट चला दें, आपके पॉपकॉर्न तैयार। तेल को उसी समय काँच की प्लेट पर से साफ़ कर दें।

    फ़्रायम्स बनाना - पेपर नेपकीन लें और अगर नहीं हों तो अखबार भी चल सकता है और उस पर फ़्रायम्स रख कर माईक्रो मोड में ३० सेकण्ड्स रखें बस फ़्रायम्स बिना तले हो गया तैयार।

    पापड़ बनाना - कोई सा भी पापड़ हो उस पर थोड़ा सा पानी छिड़क लें और माईक्रो में ३० सेकण्ड से १ मिनिट पापड़ के अनुसार रखें बिना तेल के पापड़ तैयार।

    सैंडविच बनाना - सैंडविच समान के साथ तैयार करके, ग्रिल कर लें और २ मिनिट बाद पलट लें, पहला सैंडविच बनाने में ४ मिनिट लगेगें पर उसके बाद ३ मिनिट में हो जायेगा।

    केले बनाना - केले को छीलकर, लंबाई में दो फ़ाँकें कर लें और उस पर नमक नींबु अच्छे से लगाकर ग्रिल कर लें ३-४ मिनिट के लिये, बेहतरीन स्वाद मिलेगा।

और भी बहुत कुछ बनाते हैं अभी इतना ही… और हाँ अगर आप क्या बनाते हैं वह भी बतायें

Sunday, April 10, 2011

तुम्हारे लिये, तुम कभी गुलाब होती थीं…. मेरी कविता… विवेक रस्तोगी

तुम कभी

गुलाब होती थीं

तुम कभी

नरम दिल होती थी

तुम कभी

बहुत प्यारी होती थी

तुम कभी

जन्नत होती थी

तुम कभी

खुशियों का खजाना होती थी

तुम कभी

शीतल होती थी

तुम कभी

कुछ और ही होती थी

तुम अभी भी

कभी जैसी ही हो

बस वैसी ही रहना और

आगे भी

तुम कभी, तुम अभी ही रहना।

Saturday, April 09, 2011

ये अन्ना की जीत है, आम भारतीय की जीत अभी दूर है, क्या रिश्वत माँगते हुए उनकी रूह इस लोकापाल बिल से कांपेगी ?

    जो भी घटनाक्रम जंतर मंतर पर घटित हो रहा है, वह केवल और केवल अन्ना की जीत है, आम भारतीय की जीत तो अभी बहुत दूर है। अन्ना ने तो केवल आगाज किया है भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड़ाई का, शंखनाद किया है। लोकापाल बिल पर सरकार के द्वारा माँग मान भी ली गई हैं, परंतु अभी कुछ भी साफ़ नहीं है।

    क्या इस लोकापाल बिल से भ्रष्टाचारी डरेंगे ? क्या रिश्वत माँगते हुए उनकी रूह इस लोकापाल बिल से कांपेगी ?

    आम भारतीय चाहता है कि उसे रिश्वत न देनी पड़े और और ईमानदारी से कार्य हो जाये, परंतु कुछ सुविधाएँ तब भी ऐसी हैं जहाँ जनता खुद ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है, जिससे उन्हें आराम हो, या उनका काम जल्दी हो जाये।

   पहले आम भारतीय को तहेदिल से अपने को ईमानदार बनना होगा, तभी हम भारत को भ्रष्टाचार मुक्त देश बना सकते हैं।

    पर क्या आम भारतीय सुधरेगा ? हाँ मैं आज से प्रण करता हूँ कि मैं भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं दूँगा।

जय हिन्द !

Friday, April 08, 2011

भ्रष्टाचार के विरुद्ध बिल पास होने के बाद सबसे पहले भ्रष्टों को हटाना होगा (Corruption and Corrupted ppls)

    अन्ना हजारे अनशन पर बैठे हैं, और पूरा भारत उनके समर्थन में उतर आया है। सरकार दबाब में हैं और शायद सरकार को अंदेशा भी है कि जनता जागरूक है और अब कुछ भी हो सकता है। यह अच्छी बात है कि भ्रष्टाचार के विरूद्ध बिल पास हो जायेगा और हमें कुछ खामियों से युक्त ही सही पर एक सख्त कानून मिल जायेगा।

    कानून लागू करने वाले और कानून को मान्यता दिलाने वाले भी भ्रष्टाचार से मुक्त होने चाहिये, और इसके लिये पहले भ्रष्टों को उनकी गद्दियों से उतारना होगा।

    भ्रष्टाचार केवल सरकारी तंत्र में ही नहीं, यह हर जगह पाया जाता है और इस कानून की जद केवल सरकारी तंत्र तक ही रहने वाली है। कुछ भ्रष्टाचार ऐसे हैं जो कि किसी कानून के जरिये खात्मा नहीं किये जा सकते हैं, ऐसे भ्रष्टाचार केवल आमजन के जागरूकता से ही लगाम लगाई जा सकती है।

    अगले चुनाव पास ही हैं और हर शहर में भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चे खोले जा रहे हैं, उन्हीं में से एक अपना नेता चुनें जो कि ईमानदार हो या उसकी गारंटी देता है, क्योंकि जब सत्ता हाथ में आती है तो सब ईमानदारी गायब हो जाती है। और अपने नेता को अपने शहर से जिताने का संकल्प लें और उसके ऊपर अपना कंट्रोल भी रखें।

    अगर सरकारी तंत्र से ही भ्रष्टाचार गायब हो जाये तो हर गाँव और शहर का कायाकल्प ही बदल जायेगा, लोग गरीबी से बाहर निकलेंगे। बच्चों को स्कूल में शिक्षा दिलाने के लिये भारी भरकम दान नहीं देना पड़ेगा और हमारे बच्चे भ्रष्टमुक्त देश में सांस ले सकेंगे।

Thursday, April 07, 2011

अन्ना हजारे के समर्थन में मैं ( I am supporting Anna Hazare.)

     भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लोकापाल बिल लाने के लिये सरकार पर दबाब बनाने के लिये अन्ना हजारे के अनशन को मैं पूरा समर्थन करता हूँ।

    अन्ना आज आम मध्यमवर्ग की आवाज हैं, अन्ना उन सबकी आवाज हैं जो कि भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं। आखिर कब तक हम भ्रष्टाचार सहते रहेंगे और रिश्वत देते रहेंगे। सरकार की निर्दयता और निडरता देखिये कि अभी तक सरकार पर कोई असर नहीं हुआ।

    लगता है कि सरकार को जनता की ताकत का अंदाजा नहीं है और सरकार को लग रहा है कि समर्थन में खुलकर बहुत कम लोग हैं, तो ऐसा नहीं है समर्थन में भारत का हर व्यक्ति है बस वक्त की बात है, नींद खुलने की बात है।

    हिन्दी के ३०,००० ब्लॉगरों का समर्थन अन्ना के साथ होना चाहिये। और रोज ही भ्रष्टाचार के विरोध में और अन्ना के अनशन के समर्थन में लिखना चाहिये। यह जनता का अधिकार है और हम जनता हैं, इसे हमें लेना ही होगा।

    भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से राजनैतिक लोगों को और राजनैतिक पार्टियों को दूर ही रखना होगा, क्योंकि सभी राजनैतिक लोग और राजनैतिक पार्टियाँ गले गले तक भ्रष्टाचार तक डूबी हुई हैं।

    आईये भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन जो कि अन्ना हजारे ने शुरु किया है, उसका हिस्सा बनें, अपने अपने तरीकों से आंदोलन का हिस्सा बनें।

Wednesday, April 06, 2011

नहाने का ठंडा पानी

    नहाते तो रोज ही हैं, पर मौसम और जगह के अनुसार समय और पानी कैसा हो वह बदल जाता है। जैसे हमने एक दिन फ़ेसबुक पर स्टेटस डाला था कि “पूरे २४ घंटे हो गये नहाये हुए अब तो नहाना ही पड़ेगा ।” तो हमारे एक मित्र की टिप्पणी आई “पता नहीं लोग महीने महीने भर कैसे बिना नहाये रह लेते हैं, हमें तो २५ दिन में ही खुजली होने लगती है।”

    वैसे कई लोग होते हैं, जो बिना नहाये एक दिन तो क्या कई दिन रह लेते हैं, परंतु अपनी तो आदत ऐसी है कि अगर किसी दिन न नहाये तो ऐसा लगता ही नहीं कि दिन हुआ है, और आज तक ऐसा मौका भी बहुत ही कम आया है, या तो २४ घंटे से ज्यादा सफ़र पर रहे हों या फ़िर कभी तबियत खराब रही हो। कभी आलस में न नहाये हों, ये तो याद ही नहीं है। किसी दिन नहाने में भी देर हो जाये तो आँख खुलती नहीं और बहुत ही वाहियात लगता है, और तो और अपने ऊपर ही गुस्सा आता है।

    अब गर्मी का मौसम आ गया है, अब गीजर में पानी गर्म करना बंद कर दिया है, और ठंडे पानी से नहाने लगे हैं, ठंडा पानी से जब नहाने जाओ तो पहले तो ठंडे पानी की सोचकर ही सिहरन होने लगती है, फ़िर जब हिम्मत करके नहाने के लिये तैयारी भी कर लो तो पहले हाथ पर थोड़ा पानी डाल पानी की ठंडक महसूस करते हैं, फ़िर पैर पर जब लगता है कि अब और कोई तरीका नहीं है तो नहा लेते हैं।

    वैसे हमारे एक मित्र हैं उन्होंने ठंडे पानी से नहाने का विशुद्ध तरीका बताया था अगर घरवाले बिना नहलाये नहीं मानते हैं तो पहले स्नानघर की कड़ी अंदर से बंद कर लो और फ़िर थोड़े से पानी से अपने बाल गीले कर लो और फ़िर लोटे से पानी अपने सिर के ऊपर से पानी बस पीछे डालते जाओ, और हर हर गंगे बोलते जाओ “बहुत ठंडा पानी है”, इस तरह से घरवालों को लगेगा कि नहा लिये और खुद को पता है कि ठंडे पानी से स्नान में कितना मजा आता है।

    वैसे तो होली के बाद ठंडे पानी से नहाना शुरु हो जाता है और गर्मी का रौद्र रूप देखने को मिलने लगता है, इसलिये गर्मी में ध्यान रखें कि एकदम बाहर से आने के बाद यकायक न नहायें, थोड़ा समय दें अपने शरीर को घर के तापमान के अनुकूल होने तक और फ़िर नहायें और बोलें “हर हर गंगे”,  नहाने का तरीका कोई सा भी अपनायें, पर नहाने का मजा जरूर मिलेगा।

Tuesday, April 05, 2011

वन्डरला बैंगलोर एम्य़ूजमेंट पार्क याने कि मनोरंजन की फ़ुल गारंटी (Wonderla Bangalore Means Full Enjoyment)

    वन्डरला एम्यूजमेंट पार्क बैंगलोर मैसूर रोड पर बैंगलोर से लगभग ३५ किलोमीटर दूर है, और यह मैसूर हाईवे से लगभग १.७ कि.मी. अंदर है, अगर अपने वाहन से जा रहे हैं तो यहाँ पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है और बहुत ही विशाल पार्किंग है।

Wonderla Harsh  Harsh with His friend

वन्डरला एम्यूजमेंट पार्क याने कि मनोरंजन की फ़ुल गारंटी, मनोरंजन पार्क को अच्छा साफ़ सुथरा रखा गया है और लगभग ७ एकड़ क्षैत्र में बनाया गया है।

    वन्डरला का एन्ट्री टिकिट बच्चों के लिये ऊँचाई के अनुसार है, एन्ट्री टिकिट ऑनलाईन भी खरीद सकते हैं या फ़िर वहाँ जाकर लाईन में लगकर क्रेडिट कार्ड या नकद खरीद सकते हैं, दोनों की अलग अलग लाईनें हैं।

MonkeyFace WaterPlayPool

    सप्ताहांत और सार्वजनिक अवकाश वाले दिन वन्डरला का टिकिट बड़ों के लिये 680 रुपये और बच्चों के लिये 490 रुपयों का होता है। ज्यादा जानकारी वन्डरला की वेबसाईट से ली जा सकती है ।

यहाँ पर तीन प्रकार की राईड्स हैं - ड्राय राईड्स, वॉटर राईड्स और किड्स राईड्स।

    लगभग सभी ड्राय राईड्स में बैठने के लिये बहुत ही हिम्मत चाहिये होती है, क्योंकि या तो राईड्स बहुत तेजी से नीचे से ऊपर या ऊपर से नीचे आती हैं, या फ़िर थोड़ा ऊपर जाकर गोल गोल घुमाती हैं। वैसे हमने तो बहुत मजे किये सबसे अच्छा लगा मावेरिक । और रोमांच के लिये नेट वॉक है, नेट वॉक बहुत दिनों बात देखी थी इसलिये ६-७ बार वॉक कर ली, इसके पहले एन.सी.सी. में आर्मी अटैचमेन्ट केम्प में की थीं।

High Wheels Elephant ride

    वॉटर राईड्स में प्ले पूल्स, वेव पूल्स, लेजी रिवर, रेन डिस्को और बहुत सारी राईड्स हैं, कुछ फ़ैमिली राईड्स भी हैं। पानी की स्वच्छता का भरोसा वन्डरला देता है परंतु हमें उतना भरोसेमंद नहीं लगा, पानी में लोगों ने गंदगी फ़ैलायी हुई थी, अत: पानी को मुँह में न जाने दें और कोशिश करें कि अपना सिर बचा कर रखें, ज्यादा भीग न पाये।

Elephant ride in Wonderla Ride in Wonderla

    किड्स राईड्स में जम्पिंग फ़्रॉग्स, मिनि एक्सप्रेस, मेरी घोस्ट्स, मिनि पाईरेट शिप, कोन्वॉय, फ़ंकी मंकी और भी बहुत सारी राईड्स हैं। इन राईड्स में बिल्कुल बड़ों की राईड्स जैसा ही मजा है बस इसमें बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से ऊँचाई और रफ़्तार कम है।

Kids Ride Monkey face

    सबसे बाद में हमने देखा म्यूजिकल फ़ाऊँटेन और लेजर शो, जो कि थोड़ी देर का ही है, परंतु बेहतरीन है, म्यूजिकल फ़ाऊँटेन तो बहुत जगह देखने को मिलेंगे, पर जो लेजर शो वन्डरला में है वैसा तो कहीं देखा ही नहीं।

    खाने के लिये बहुत सारे रेस्टोरेंट उपलब्ध हैं, बाहर से खाने पीने की वस्तुएँ अंदर ले जाने की मनाही है, पर फ़िर भी सबके भाव बहुत ज्यादा महँगे नहीं हैं, पर हमें खाने की गुणवत्ता ज्यादा ठीक नहीं लगी, पर अगर ज्यादा थके रहते हैं और बहुत तेज भूख लगती है तो कुछ भी खाने को मिल जाये अच्छा ही लगता है।

दिल के मरीज,  रक्तचाप के मरीजों के लिये राईड्स पर मनाही है।

    कुल मिलाकर वन्डरला मनोरंजन पार्क जाना एक बहुत ही अच्छा अनुभव रहा, बस कोशिश करॆं कि सप्ताहांत की जगह सप्ताह में किसी दिन जायें तो भीड़ कम मिलेगी और सारी राईड्स के मजे ले पायेंगे।

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