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Sunday, January 31, 2010

हाँ हम भी इन्सान हैं, अपनी कमजोरियों को सुनना हमें भी अच्छा नहीं लगता बुरा लगता है

हाँ हम भी इंसान हैं भले ही किसी से भी कितना भी प्यार करें पर बुरा तो लगता है भले ही वह बोले हमें या दुनिया का कोई ओर व्यक्ति।

कोई भी अपनी कमजोरियों को सुनना पसंद नहीं करता है और अपनी कमजोरियों को सब छुपाते हैं मैं कोई भगवान तो नहीं हूँ जो अपनी कमजोरियों के सामने आने पर असहज महसूस न करुँ। गुस्सा आना तो स्वाभाविक है, और ऐसे कितने लोग होंगे जो ऐसी परिस्थिती में अपने ऊपर काबू रख पाते होंगे। शायद कोई नहीं।

बढ़ती महत्वाकांक्षाएँ रिश्तों में दरारें भी ला सकती हैं और अपनापन खत्म भी कर सकती हैं, इंसान को अपनी इच्छाएँ सीमित ही रखनी चाहिये कि अगर कोई इच्छा अगर पूरी भी न हो तो ज्यादा दुख न हो।

हमने तो अपने जीवन के शुरुआत से कभी भी अपनी इच्छाओं की अभिव्यक्ति ही नहीं की, जो मिलता गया बाबा महाकाल का आशीर्वाद से होता गया। और आज भी केवल उतनी ही चीजों की जरुरत महसूस होती हैं, जो कि जिंदा रहने के लिये बहुत जरुरी होती हैं। क्योंकि विलासिता का जीवन न हमें रास आया और भगवान न करे कि हमें विलासिता देखनी भी पड़े।

सभी बुराईयों की शुरुआत की लकीर विलासितापूर्ण जीवन से ही शुरु होती है, जब इंसान की आँखों पर पट्टी बँध जाती है, और वह केवल और केवल अंधे होकर भागता रहता है, जो कि उसका है ही नहीं, केवल क्षणिक सुख के लिये।

न साथ कुछ लाये हैं न लेकर जायेंगे, खाली हाथ आये थे, खाली हाथ जाना है, फ़िर भी इस नश्वर संपत्ति का मोह, वो भी इतना अधिक नहीं होना चाहिये, अपने मन की इस गंदगी को अपने मन के खोह में ही छिपाकर रखना चाहिये, ऐसी खोह में जिसे कोई देख न सके।

केवल अपने पास इतना रखना चाहिये कि अपनी जिंदगी आराम से निकल जाये, ज्यादा मोह भी बुराई की जड़ है। हमेशा अपनी हद में रहना चाहिये, जिससे आप को पता रहे कि आप किसी का मन नहीं दुखा रहे हैं, और अपनी मर्यादा की सीमा का उल्लंघन भी नहीं कर रहे हैं।

Saturday, January 30, 2010

क्या आपने आज का चांद देखा है, नहीं तो अभी देखिये कितना चमकीला है शायद ही पहले आपने देखा होगा..


क्या आपने आज का चांद देखा है, नहीं तो अभी पहले जाकर देखिये फ़िर ब्लॉग पढ़िये नहीं तो आलस करा नहीं कि इतना अच्छा मौका चूक जायेंगे।

आज माघ पूर्णिमा है और आज साल का सबसे ज्यादा चमकीला चांद निकला है। तकरीबन ३०% ज्यादा चमकीला है। अब हम फ़ोटो नहीं लगा पा रहे हैं, अगर कहीं मिलता है तो हम बाद में लगा देंगे।

पूर्णिमा को अमृत बरसता है, और पूर्णिमा के दिन अमृत बरसता है और हम अपने पापाजी मम्मीजी के  साथ खीर बाहर आंगन में रखकर अमृत बरसने का इंतजार करता था, पता नहीं अमृत बरसता था या नहीं पर हम तो केवल खीर का ही इंतजार करते थे।

चित्र सौजन्य श्री रवि कुमार रावतभाटा


क्या खोया क्या पाया अपनी अभी तक की जिंदगी में…. अपना खुद का निजी हिसाब किताब..

आज ऐसे ही अपनी बीती हुई जिंदगी का मतलब निजी हिसाब किताब कर रहे थे। तो हमने पाया कि बहुत कुछ हमने खोया है और बहुत कुछ पाया है।

और शायद जो खोया है अब हमें मिल भी नहीं सकता है और जो हमने पाया है कभी भी हमसे छिन सकता है या खो सकता है, शायद यह सभी के साथ होता है।

जो खोया है वह है हमने अपनों के करीब रहने का सुख, खुद के लिये समय और परिवार के लिये नितांत निजी समय, पर अपने खुद में इतना उलझ गये हैं कि ये सब बेमानी हो गया है। और जो मिला वो है अपने आप की दुनिया, नेट की दुनिया, जिसे हम कभी भी खो सकते हैं। वैसे तो इस नश्वर शरीर का भी कोई भरोसा नहीं है, परंतु प्यार तो हो ही जाता है।

इसीलिये तो भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है इस दुनिया को “दुखालयम”, मतलब कि दुखों का घर। इस भौतिक दुनिया में दुखों के बिना जीवन संभव नहीं है।

खैर हमने खोया भगवान की भक्ति को भी, पर फ़िर भी उनके प्यारे भक्तों के मधुर धुनों और बातों को सुनते रहते हैं, नेट से शायद हमने सबसे अच्छी चीज यही पायी है। हम भले ही कितनी दूर हों पर भगवान की मधुर बातें उनके चर्चाकारों द्वारा की गई हमारे पास सभी जगह उपलब्ध हैं।

शायद बाहरी तौर पर केवल इतना ही प्रकट कर सकते हैं, क्योंकि और ज्यादा हम बताना नहीं चाहते हैं। खोते तो सभी हैं और पाते भी सभी हैं, हम कोई अनोखे थोड़े ही हैं, ये तो बस माया का खेल है। अगर कुछ बताना चाहें अपने खोये पाये के बारे में तो अवश्य टिप्पणी में बतायें।

Friday, January 29, 2010

दिल और मन का विश्लेषण, आपके ऊपर क्या हावी रहता है, दिल या मन। दिल तो पागल है दिल दीवाना है / मन तो पागल है मन दीवाना है… (An Analysis of your Internal thoughts..)

    दिल जो केवल वही बात मानने को तैयार होता है जो कि व्यक्ति आत्मिक रुप से ग्रहण कर सकता हो, और उससे किसी को दुख नहीं पहुंचता हो, जो दिल चाहता है वह अगर उसे नहीं मिलता हो तो भी वह संतुष्ट रहता है कि चलो शायद अपना नहीं था।

     मन जो केवल वही बात मानता है जिसे मन चाहता है, जो कि व्यक्ति बाहरी रुप से ग्रहण करता है, फ़िर उससे किसी को कितनी भी चोट लगती हो उससे मन को कोई फ़र्क नहीं पड़ता है, अगर चाही वस्तु मन को नहीं मिली तो हमें बहुत बुरा लगता है और असंतुष्ट असहज रहता है। मन जो चाहता है हासिल करना चाहता है, फ़िर चाहे वह बुरा हो या भला, इससे मन को कोई फ़र्क नहीं पड़ता है।

    जब हम कहते हैं कि अपने दिल के बात बताऊँ तो वह एक सच्ची बात होती है, परंतु जब हम मन की बात करते हैं तो वह हमारे ऊपरी आवरण के अहम को संतुष्ट को करने वाली बात करते हैं।

    अगर दिल की बात पूरी नहीं होती है तो हमें बुरा नहीं लगता है, कि चलो कोई बात नहीं कहकर अपना दिल बहला लेते हैं। परंतु अगर मन की बात पूरी नहीं होती है तो गहरी टीस हमेशा मन के किसी कोने में पलती रहती है और धीरे धीरे अहम के रुप में परिवर्तित होती जाती है।

    दिल और मन कहने को हम एक रुप में ही कहते हैं, परंतु दोनों के कर्म और सोच बिल्कुल अलग हैं, दिल अगर साधु प्रकृति का है तो मन दुष्ट प्रकृति का है।

    दिल और मन का विश्लेषण कैसा लगा, आपके ऊपर क्या हावी रहता है, दिल से बताईयेगा मन से नहीं।

    तभी तो मैं कहता हूँ कि दिल तो पागल है दिल दीवाना है / मन तो पागल है मन दीवाना है…

Wednesday, January 27, 2010

काश कि हम पतले ही रहते मोटे न होते, और अब ….. हाल बुरा है…. और क्या जबाब दें अपनी इस मोटी चर्बी की बेशर्मी का !!!

पता नहीं कि हम मोटे हैं या स्वस्थ्य, किस श्रेणी में रखे जाते हैं, पर हाँ सभी लोग जिसे भी जब भी मौका लगता है भाषण जरुर पिला डालता है कि भाई बहुत हैल्थी हो गये हो, लगता है कि खाते पीते घर के हो।

हम भी हमारे पुराने दिन याद करते हैं जब कभी हम पतले हुआ करते थे, कभी हमारी कमर का नाप २८-३० इंच का हुआ करता था, और अब ज्यादा नहीं है पर फ़िर भी बताने में शर्म आती है। सोचते हैं कि काश कुछ ४-६ इंच कम हो जाये।

सोचते भी हैं कि रोज खूब चलें, दौड़ें, जिम मॆं जायें, ये करें वो करें, ये न खायें और कुछ ऐसा खायें जिससे किसी तरह से पतला हुआ जा सके पर हे भगवान !!! कुछ नहीं हो रहा है। कुछ भी शुरु करो तो अपने मन के सातों घोड़ों को काबू में रखना मुश्किल होता है, और समय निकालना भी। क्योंकि चर्बी चढ़ाने के लिये समय हमें बहुत मिल जाता है परंतु कम करने के लिये समय निकालना बहुत मुश्किल होता है, दुनिया का सबसे बड़ा सत्य यही है। शायद सभी लोग मेरी बात से सहमत भी होंगे। हम पीना चाहते हैं, जीना चाहते हैं, खाना चाहते हैं, परंतु कैसे मोटे होकर !!!!

सोचते भी हैं शुरु भी करते हैं परंतु कुछ दिन करने के बाद सब वही ढ़ाक के तीन पात, थोड़े दिन सुबह घूमने गये पूरे जोश के साथ फ़िर वो जोश और जुनून उतर गया और आ गये वापिस अपनी वाली पर, फ़िर जिम जाना शुरु किया फ़िर वो भी बंद कर दिया, अब ये हालत है कि कोई पूछता है कि भई नया क्या शुरु किया है, तो अपनी बगलें झाँकने लगते हैं। अब तो हम यही बोलने लगे हैं हाँ सुबह ५-७ किलोमीटर घूम लेते है और दौड़ भी लेते हैं, उठने के पहले। :)

अब और क्या जबाब दें अपनी इस मोटी चर्बी की बेशर्मी का। शायद मोटे लोग ओह !!!! माफ़ कीजियेगा हैल्थी लोग ही कुछ नया नुस्खा बताकर मेरी मदद करेंगे और अपनी भी।

Tuesday, January 26, 2010

एन.सी.सी. के साथ गणतंत्र दिवस की कुछ यादें जो हमेशा रहेंगी पर क्या नयी पीढ़ी इस महत्व को समझ पायेगी या इसे केवल छुट्टी ही मानेगी मौज मस्ती के लिये… (My unforgettable experience on Republic Day with NCC)

    जब हम कॉलेज में पढ़ते थे तो साथ में एन.सी.सी. में भी थे और उस समय मिलेट्री का जुनून था, कि बस कैसे भी करके मिलेट्री में जाने का मौका मिल जाये, पर नहीं जा पाये। पर जितना हम एन.सी.सी. में कर सकते थे उतना किया।

    मैं एन.सी.सी. में अपने कॉलेज का सीनियर अंडर ऑफ़िसर था और मुझे शुरु से ही अनुशासन पसंद था इसलिये मुझे एन.सी.सी. में मजा भी बहुत आता था, गणतंत्र दिवस आने के पहले ही हम लोग अपनी ड्रिल का जबरदस्त अभ्यास करते थे, वैसे तो ड्रिल हर सप्ताह दो दिन होती थी, पर गणतंत्र दिवस का मौका विशेष होता था, क्योंकि वह जिले के परेड ग्राऊँड पर होता था और हम हमारी प्लाटून का नैतृत्व करते थे। हालांकि यह मौका हमें केवल दो बार मिला गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर आज भी हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है जब हम उन दिनों को याद करते हैं। पुलिस बैंड के साथ कदम से कदम मिलाते हुए कम से कम १० दिन अभ्यास करना पड़ता था और एक दिन पहले मोक ड्रिल होती थी, पूरे दो घंटे का कार्यक्रम होता था, जिसमें पूरे जिले के गणमान्य लोग और स्कूल के बच्चे और जिले के लोग आते थे।

    हम अपने अभिभावकों को भी बुलाया करते थे कि आईये देखिये आपका बेटा एक प्लाटून का नैतृत्व कर रहा है, जिले के परेड ग्राऊँड में। हमें टू नॉट टू बंदूकें दी जाती थीं जिसे लेकर हम परेड ग्राऊँड में परेड करते थे और सलामी देते थे। अपनी ड्रेस को चरक करते थे, जितने भी केम्प हमने किये थे सब के बैज अपने सीने पर सजा लेते थे, बैल्ट भी पोलिश की हुई होती थी, टोपी का बैज धातु चमकाने की पोलिश से चमकाते थे,  जूते बिल्कुल ऐसे पॉलिश करते थे जिसमें अपना मुँह तक देख पायें (हमारे हवलदार की भाषा में जो कि मिलिट्री से होते थे)।

    हम परेड ग्राऊँड पर जाकर खड़े हो जाते थे, पहले परेड के अतिथि परेड का निरिक्षण करते थे जिसमें कौन सा प्लाटून किसका है और उसे कौन नैतृत्व कर रहा है, बताया जाता था,  फ़िर सलामी होती थी और फ़िर राष्ट्रीय गान और फ़िर ड्रिल जिसमें मुख्य मंच के सामने से अतिथि को और राष्ट्रीय ध्वज को सलामी सम्मान देते हुए निकलते थे।

    आज भी वो दिन याद करते हैं तो हमारी आँखें चमक उठती हैं, सीने में देशभक्ति की ज्वाला जलने लगती है। अफ़सोस कि हम मिलिट्रि में न जा पाये।

    पर हम तक तो ठीक था, पर अब आज की भावी पीढ़ी, भविष्य के कर्णधारों को इस बात का कैसे अहसास होगा पता नहीं, वे अपने देश के लिये कभी भक्त भी बनेंगे या नहीं, क्योंकि देशभक्ति एक जज्बा होता है जो कि एक समूह से आता है, न कि घर पर बैठकर टी.वी. और चैट करने से।

    देशभक्ति के कार्यक्रमों में शामिल होना पड़ता है नहीं तो भावी पीढ़ी के लिये तो मौज मस्ती के लिये छुट्टी से ज्यादा कुछ नहीं है हमारे गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस।

    आप बतायें कि आप आखिरी बार कब परेड ग्राऊँड पर गये और अपने बच्चों को लेकर कब गये। या घर पर रहते हैं तो टी.वी. पर भी देखना पसंद नहीं करते हैं।

Monday, January 25, 2010

चैन्नई मरीना बीच पैदल ही नाप दिया…

    अभी परसों की ही बात है शाम को जरा जल्दी होटल आ गये तो सोचा चलो मरीना बीच ही घूम आते हैं, अपने होटल पर रेसेप्शन पर पूछा कि मरीना बीच किधर है और कितनी दूर है, तो जबाब मिला यहाँ से सीधा रोड मरीना बीच को ही जाता है, पर लगभग ३ किलोमीटर है, हमने कहा फ़िर तो पैदल ही जा सकते हैं, तो रेसेप्शनिस्ट हमारा मुँह देखने लगा कि इतनी दूर पैदल ही जा रहे हैं। हमने कहा अरे भई हमें आदत है हम निकल लेंगे पैदल ही।

    पैदल ही निकल लिये और पैदल जाने का एक और मकसद था कि कोई और खाने के लिये अच्छा सा रेस्त्रां मिल जाये, तो हमें फ़िर पास में ही सरवाना भवन मिल गया जो कि शायद चैन्नई का सबसे बड़ा उनका रेस्त्रां है। खैर करीबन आधे घंटे में हम मरीना बीच पहुंच गये, इतना बड़ा और लंबा मरीना बीच हम बहुत दिनों बाद देख रहे थे, मुंबई में तो जुहु बीच बहुत ही छोटा लगता है इसके सामने।

    समुद्र का पानी हमारे पास हिलोरे मारता हुआ आ रहा था, और हम भी रेत में नंगे पैर अपने सेंडल हाथ में लिये घूम रहे थे, बहुत मजा आ रहा था, ठंडी हवा थी, और लहरों का शोर।

    बहुत सारे स्टाल लगे हुए थे जिसमें कुछ पर मुंबई चाट और कुछ पर चैन्नई चाट लिखा था, पर हमारा वहाँ कुछ खाने का मन नहीं था तो वापिस हम चल दिये अमरावती रेस्त्रां के लिये, जहाँ फ़िर हमने वही आन्ध्रा स्टाईल चावल की थाली खाई। कुछ भी कहिये मन नहीं भरा वह थाली खाकर, अभी फ़िर खाने की तमन्ना है।

    अब किसी दिन फ़ुरसत से शाम के समय मरीना बीच जायेंगे और फ़िर शाम के समय के दीदार की बातें बतायेंगे।

Sunday, January 24, 2010

भाग ९ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 9) आयकर में ३५,००० रुपये तक की छूट धारा 80 D के तहत…

आयकर में छूट -

    आप शायद जानते होंगे कि स्वास्थ्य बीमा की जो प्रीमियम अदा की जाती है उस पर आयकर अधिनियम १९६१ के अंतर्गत आयकर की धारा ८० डी में छूट मिलती है। २००८ के बजट आने के पहले ८० डी के अंतर्गत १५,००० रुपये की छूट खुद के लिये मिलती थी। इसमें व्यक्तिगत, जीवनसाथी, आश्रित बच्चे और अभिभावक अगर बीमाधारक की शादी न हुई हो शामिल थे। जिसके तहत आप स्वास्थ्य बीमा की छूट ८० डी में ले सकते हैं।

    आयकर बचत के लिये २००८ का बजट बहुत ही विशिष्टता लेकर आया,  जिससे आप अपने परिवार को और अपने अभिभावकों    को अच्छी सुरक्षा प्रदान कर सकें। इसमें १५,००० रुपये की स्वास्थ्य बीमा की छूट आप अपने परिवार याने कि अपनी पत्नी बच्चों के लिये ले सकते हैं, और २०,००० रुपये तक की छूट आप अपने माता पिता के लिये भी ले सकते हैं, ८० डी के तहत मतलब कि पूरी ३५,००० रुपये की छूट आप ले सकते हैं। जो कि एक लाख रुपये जो कि आप ८० सी के तहत आयकर के लिये बचा रहे हैं, उसके अतिरिक्त है।

तो ऐसा नहीं है कि आप अपने परिवार और माता पिता के लिये पर्याप्त स्वास्थ्य लाभ के लिये खर्च कर रहे हैं, अपितु आप जो भी प्रीमियम भुगतान कर रहे हैं उस पर अपना आयकर भी बचा रहे हैं।

पहले की कड़ियाँ -

भाग १ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 1)
भाग २ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 2)
भाग ३ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 3)
भाग ४ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 4) स्वास्थय बीमा योजना चुनने के लिये कुछ सुझाव
भाग ५ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 5) स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम राशि को कम कैसे करें....
भाग ६ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 6) बाजार में उपलब्ध स्वास्थ्य बीमा उत्पाद
भाग ७ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part ७) किन सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिये..

दक्षिण भारतीय व्यंजन की स्वादिष्टता जिसमें तमिल और आन्ध्रा दोनों तरह के व्यंजन शामिल हैं.. अद्भुत स्वाद है यहाँ के खाने का.. चैन्नई में खाने का मेरा अनुभव..

    यहाँ चैन्नई में जब से आये हैं रोटी तो देखने को भी नहीं मिली है, शुरु दिन ही दोपहर के खाने में मिनी मील सरवाना भवन का खाया, सरवाना भवन जो कि दक्षिण भारतीय खाने की अंतर्राष्ट्रीय श्रंखला है। और यहाँ तरह तरह के दक्षिण भारतीय खाने उपलब्ध हैं।

    पहले दिन मिनी मील खाया जिसमें ३ तरह के चावल एक दही के साथ, दूसरा सांभर के साथ और तीसरा पता नहीं किसके साथ शीरा और ३-४ चटनियाँ।

    फ़िर शाम को खाना खाया आन्ध्रा की प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय श्रंखला अमरावती में आन्ध्रा थाली, जिसमें तीन तरह की सब्जियाँ, १ चटनी, सांभर, रसम, दही और आन्ध्रा का खास मसाला, और दो विशिष्ट अचार चावल के साथ, स्पेशल पापड़, सूखी लंबी लाल मिर्ची, और चावल के छोटे पापड़, खाने के बाद केला, आन्ध्रा की कोई एक प्रसिद्ध मिठाई और आन्ध्रा स्टाईल पान।

नीचे फ़ोटो देखिये पर मेरे मोबाईल कैमरे से -

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    खाने का तरीका भी विशिष्ट है, चावल में घी (आप जितना चाहे घी डलवा सकते हैं) और फ़िर आन्ध्रा का खास मसाला मिलाकर खाने पर अद्भुत स्वाद आता है। साथ में सब्जियाँ मिला सकते हैं। फ़िर खाने में ज्यादा इमली वाले सांभर से कम इमली वाली रसम और फ़िर दही से खान खत्म करते हैं, यहाँ बेधड़क आप अपने हाथ से खा सकते हैं, और जम के अपने हाथ चाट भी सकते हैं, क्योंकि यह यहाँ की संस्कृति में शामिल है, अगर आप चम्मच से खायेंगे तो मजा भी नहीं आयेगा। थाली का खाना अनलिमिटेड है जितना चाहें उतना ले सकते हैं।

    हमने यहाँ आकर बहुत चावल खाया पर कभी भारी नहीं लगा, शायद यहाँ का पानी वैसा है या फ़िर भौगोलिक स्थिती इस प्रकार है।

    सरवाना भवन में हमने अभी तक मिनी मील, प्याज का उत्तपम, सांभर चावल, टमाटर का सूप, मसाला डोसा, पाव भाजी, मिनि टिफ़िन जिसमें एक डोसा, ५ छोटी इडली, शीरा, सांभर, स्पेशल चावल और चटनियाँ होती हैं। सरवानन भवन की विशेषता है कि वहाँ की क्वालिटी, पर हाँ थोड़ी मात्रा कम होती है।

यहाँ की एक और विशेषता है कि खाना परोसा जायेगा केले के पत्ते लगाकर सीधे प्लेट में नहीं।

Saturday, January 23, 2010

चैन्नई में भी कम लूट नहीं है.. लुटने वाला मिलना चाहिये..

जैसा कि आमतौर पर सभी शहरों में होती है लूट वैसी ही लूट चैन्नई में भी है, अब अभी समझ नहीं पा रहे हैं कि लूट कम है कि ज्यादा है, हमें तो ये पता है कि लूट, लूट ही होती है, चाहे वह कम हो या ज्यादा।

यहाँ पर ऑटो मीटर से चलाने का रिवाज ही नहीं है, हमें अपने गंतव्य तक जाने के लिये रोज ही मगजमारी करना पड़ती है, रोज इन ऑटो वालों से उलझना पड़ता है, जितनी दूरी का ये लोग यहाँ ८० रुपये मांगते हैं, उतनी दूर मुंबई में मीटर से मात्र १५-१८ रुपये में जाया जा सकता है।

अब और देखते हैं कि कौन कौन लूट मचा रहा है, क्योंकि टैक्सी वालों के भाव भी बहुत ज्यादा हैं, प्रीपैड टैक्सी अगर २८० रुपये लेती है तो बाहर अगर आप टैक्सी से मोलभाव करने जायेंगे तो वो ८५० रुपये से कम में नहीं मानेगा।

चारों तरह लूट मची है, लूट सके तो लूट !!!!


Friday, January 22, 2010

भाग ८ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 8) स्वास्थ्य बीमा दावा दायर करने की प्रक्रिया ..

स्वास्थ्य बीमा दावा दायर करने की प्रक्रिया -

    स्वास्थ्य बीमा कौन सा लेना चाहिये और कितना प्रीमियम भरना चाहिये यह सब एक अलग बात है और स्वास्थ्य बीमा के दावे की प्रक्रिया बिल्कुल अलग। बीमा सुविधाओं का दावा करते समय आपको दावा दायर करने का फ़ार्म भरते समय होशियारी और सावधानी दिखानी होती है। स्वास्थ्य बीमा का दावा करते समय आपको निम्न चीजें तैयार रखनी होती हैं।

  • दावा फ़ॉर्म सही तरीके से भरा गया हो और दावेदार द्वारा हस्ताक्षर किया गया हो।
  • अस्पताल से छुट्टी प्रमाणपत्र (Discharge Certificate from Hospital)
  • सभी दस्तावेज जब से आपने डॉक्टरी परामर्श चालू किया था जब बीमारी उजागर हुई थी, जैसे – डॉक्टर परामर्श पत्र/ हिस्ट्री (Doctro consultation reports/history)
  • बिल, रसीदें, कैश मेमो जो कि अस्पताल द्वारा दिया गया हो डॉक्टर के परामर्श पत्र के साथ।
  • रसीद एवं नैदानिक परीक्षण रिपोर्ट जो चिकित्सक  आपको देख रहा था उसका समर्थन पत्र जो कि हमेशा हिस्ट्री या परामर्श पत्र पर उपलब्ध होता है। जिसे बीमारी को सिद्ध किया जा सके।
  • कौन से चिकित्सक ने आपरेशन किया उसका प्रमाणपत्र कि किस बीमारी के लिये आपका आपरेशन किया गया है। बिल, रसीदें, जिन परमार्शदाताओं / विशेषज्ञों / एनीस्थीशिया विशेषज्ञो ने देखा उनकी बिल और रसीदें और बीमारी (रोग,मर्ज) का प्रमाणपत्र।
  • प्रमाणपत्र उस चिकित्सक / सर्जन से जो कि आपकी देखभाल कर रहा है कि मरीज बिल्कुल ठीक हो चुका है।
  • पुरानी पॉलिसीयों की जानकारी अगर यही TPA पहले से नहीं है या उसके पास पहले की पॉलिसियों की जानकारी नहीं है, दुर्घटनाओं के मामले को छोड़कर।

पहले की कड़ियाँ -

भाग १ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 1)
भाग २ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 2)
भाग ३ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 3)
भाग ४ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 4) स्वास्थय बीमा योजना चुनने के लिये कुछ सुझाव
भाग ५ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 5) स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम राशि को कम कैसे करें....
भाग ६ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 6) बाजार में उपलब्ध स्वास्थ्य बीमा उत्पाद
भाग ७ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part ७) किन सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिये..

एक मजेदार चित्र केवल तकनीकी लोगों के लिये (Work @IT)

 यह चित्र आज ही मेरे एक मित्र ने ईमेल से मुझे भेजा था, जिसे देखकर वाकई मुझे अपने और सभी तकनीकी लोगों के दर्द का अहसास अनायास ही हो गया। ये दर्द केवल वही समझ सकता है जो IT में कार्य करता है। 

Work @ IT


Thursday, January 21, 2010

भाग ७ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part ७) किन सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिये..

मेडिक्लेम लेते समय किन चीजों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिये -

दिन भर का देखभाल खर्च जो कि उन्नत तकनीकी सर्चरी और प्रक्रियाओं में होता है जैसे कि – डायलिसिस, रेडियोथेरेपी, कीमियोथेरेपी। जिनके लिये अस्पताल में २४ घंटे से कम रुकना पड़ता हो।

ईलाज का खर्च – चिकित्सकीय व्यय जो कि डेन्टल ट्रीटमेंट, सर्जरी, एनेस्थीशिया, ऑपरेशन थियेटर शुल्क, पेसमेकर की लागत, Cost of Artificial Limbs External Medical Aids, एम्बूलेन्स शुल्क इत्यादि।

मरीज पर होने वाला खर्च – रुम शुल्क, डॉक्टर / शल्य चिकित्सक फ़ीस, दवाईयाँ, नैदानिक परीक्षण (Diagnostic Tests) इत्यादि।

पहले की कड़ियाँ -
भाग १ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 1)
भाग २ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 2)
भाग ३ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 3)
भाग ४ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 4) स्वास्थय बीमा योजना चुनने के लिये कुछ सुझाव
भाग ५ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 5) स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम राशि को कम कैसे करें....
भाग ६ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 6) बाजार में उपलब्ध स्वास्थ्य बीमा उत्पाद

मुंबई से चैन्नई की उड़ान यात्रा और कुछ अनुभव.., बादलों के बीच में उड़ना जैसे कि देवलोक में आ गये हों

    कल सुबह हम अपने एक प्रोजेक्ट के लिये थोड़े दिनों के लिए चैन्नई आये हैं, सुबह ७.०५ की उड़ान थी हमारी मुंबई से चैन्नई के लिये। विमान था इंडियन एयरलाईन्स का हमें लगा सरकारी है खटारा ही होगा, पर जब विमान ने उड़ान उड़ी आशाओं के विपरीत विमान तो बहुत ही अच्छी श्रेणी का निकला, खैर फ़िर जब उड़े तो पहुँच गये बादलों के देश में उससे पहले खिड़की से नजारा देखा तो पूरी मुंबई एक जैसी ही नजर आ रही थी, पहचान नहीं सकते थे कि कौन सी जगह है। बादलों के देश में एक तरफ़ से सूर्य भगवान थे तो लोगों ने अपने खिड़कियों के शटर गिरा लिये। हम दूसरी तरफ़ थे तो बादलों को देख रहे थे, ऐसा लगा कि हम कहीं देवलोक में आ गये हों। या ये सब कोई रुई के पहाड़ हों।

    जैसे कि धरती पर हम लोग एक जमीन के टुकड़े की खरीद फ़रोख्त करते रहते हैं, वैसे ही ये लोग भी अपनी इस बादलों की दुनिया के लिये करते होंगे और हम मानव उनकी दुनिया में अपना विमान घुसाकर उन्हें परेशान करते होंगे। तो यहाँ के प्राणियों को भी तकलीफ़ होती होगी, तभी हमारा नाश्ता आ गया, जो शायद टिकिट पर नहीं लिखा था खैर हमें तो जबरदस्त भूख लगी थी, क्योंकि सुबह ४ बजे के उठे थे, हालांकि घर से हलका नाश्ता कर लिया था, पर फ़िर भी।

    विमान परिचारिका आयी और हमारे सीट में से एक टेबल नुमा चीज निकाली और पूछा कि वेज या नॉनवेज, तो हमने अपनी पसंद वेज बतायी और उसने वेज नाश्ता रख दिया, जिसमें इडली बड़ा सांभर, ब्रेड, कुछ कटे हुए फ़ल, निंबु पानी, चाय के लिये कप और एक पानी की छोटी बोतल। नाश्ता कर लिया पेटपूजा हो गई, फ़िर वही परिचारिका आकर नाश्ते की प्लेट ले गयी, चूँकि नाश्ते की प्रक्रिया के लिये बहुत ही सीमित समय होता है, तो विमान की सारा स्टॉफ़ बहुत ही मुस्तैदी से कार्य कर रहा था। जैसे ही उन लोगों ने नाश्ते की प्लेट्स ली सभी से वैसे ही कैप्टन का मैसेज आ गया कि आप चैन्नई कामराज विमानतल पर उतरने वाले है और फ़िर मौसम की जानकारी दी गई।

    बाहर निकले अपना बैग कन्वेयर बेल्ट से उठाया। और चल पड़े प्रीपैड टेक्सी के लिये क्योंकि हमें बताया गया था कि यहाँ पर कुछ भी मीटर से नहीं चलता है। सब जगह जबरदस्त मोलभाव करना पड़ता है। करीब १ घंटा लगा हमें अपने गंतव्य पहुंचने में क्योंकि चैन्नई में ट्राफ़िक की रफ़्तार बहुत ही सुस्त है। और तापमान लगभग मुंबई जैसा ही है।

Wednesday, January 20, 2010

भाग ६ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 6) बाजार में उपलब्ध स्वास्थ्य बीमा उत्पाद

विभिन्न स्वास्थ्य बीमा उत्पाद जो कि बाजार में उपलब्ध हैं

  • आईसीआईसीआई लोम्बार्ड बीमा का स्वास्थ्य लाभ योजना प्लान (ICICI Lombard Health Advantage Plus Plan)
  • एचडीएफसी अर्गो जनरल इंश्योरेंस का HDFC ERGO New Health Wise Plan
  • रायल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस का Royal Sundaram Health Shield Plan
  • बजाज एलियांज लाइफ का Bajaj Allianz Life Health Care Plan
  • न्यू इंडिया इंश्योरेन्स का स्वास्थ्य बीमा योजना
  • यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेन्स का स्वास्थ्य बीमा योजना

और भी जनरल इंश्योरेन्स कंपनियों के स्वास्थ्य बीमा बाजार में उपलब्ध हैं, उसके लिये किसी भी इंश्योरेंस एग्रीगेटर पर देखें।

पहले की कड़ियाँ -

भाग १ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 1)
भाग २ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 2)
भाग ३ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 3)
भाग ४ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 4) स्वास्थय बीमा योजना चुनने के लिये कुछ सुझाव
भाग ५ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 5) स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम राशि को कम कैसे करें....

Tuesday, January 19, 2010

भाग ५ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 5) स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम राशि को कम कैसे करें....

स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम राशि को कम कैसे करें –


    कोई भी कीमत से ज्यादा भुगतान देना पसंद नहीं करता है। सबसे उपयुक्त और उचित दामों पर स्वास्थ्य बीमा कुछ पहलुओं पर आधारित होते हैं। यह आपकी पसंद पर भी निर्भर करता है कि आप कौन सी योजना लेते हैं, और पॉलिसी खरीददार का स्वास्थ्य कैसा है। लेकिन कुछ निम्न बातों से आप अपनी स्वास्थ्य बीमा की राशि को काफ़ी हद तक कम कर सकते हैं।

  • धूम्रपान करने वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य हमेशा खतरे में रहता है और धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को गैर धूम्रपान करने वाले व्यक्ति से ज्यादा प्रीमियम राशि का भुगतान करना पड़ता है। तो प्रीमियम राशि कम अदा करने के लिये आपको धूम्रपान छोड़ देना चाहिये।
  • उच्च रक्ताचाप होना स्वास्थ्य के लिये अच्छे संकेत नहीं हैं, और इसे नियंत्रण में रखना समझदारी है। उच्च रक्ताचाप को नियंत्रण में रखने से भी आपको कम प्रीमियम राशि का भुगतान करना पड़ता है।
  • अगर आपका स्वास्थ्य अच्छा है तो अपने आप ही आपकी प्रीमियम राशि कम हो जाती है, उन लोगों से जिन लोगों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है। क्योंकि इससे बीमा कंपनी को आप पर ज्यादा जोखिम नहीं लगता है।
  • अगर आप अपने पॉलिसी पर कोई दावा नहीं करते हैं, तो आपको दावा न करने का लाभ मिलता है, दावामुक्त अवधि नवीनीकरण के समय आपको प्रीमियम राशि कम करने में मदद करता है।
  • विभिन्न बीमा कंपनियों के प्रीमियम राशि और सुविधाओं की तुलना करने पर भी आप प्रीमियम राशि में बचत कर सकते हैं। बस जरुरत इस बात की है कि जब आप स्वास्थ्य बीमा खरीदने जा रहे हों तो आपको गहरा अनुसंधान करना होता है। और आपको ऑनलाईन सस्ता स्वास्थ्य बीमा भी मिल सकता है।
  • ऑनलाईन बीमा एग्रीगेटर से भी आप स्वास्थ्य बीमा की  प्रीमियम राशि की तुलना कर सकते हैं। और आप पता भी कर सकते हैं कि विभिन्न पॉलिसियों पर क्या क्या छूट मिल रही है।
  • स्वास्थ्य बीमा लेने से पहले यह जरुर तय कर लें कि मिलने वाली सुविधा जो कि बीमा कंपनी आपके द्वारा प्रीमियम राशि के भुगतान के बाद देने वाली है, उसका कवरेज आपकी सारी आवश्यकताओं को पूर्ण करता है।
  • केवल स्वास्थ्य बीमा लेना है यह सोचकर कोई सी भी पॉलिसी लेने पर हो सकता है कि उसमें सारी सुविधाएँ उपलब्ध न हों, और हो सकता है कि जितनी सुविधाएँ कंपनी दे रही हो उससे ज्यादा राशि प्रिमियम की ले रही हों, आपको बहुत सावधानी से अपना निर्णय लेना चाहिये। जो कि बहुत महत्वपूर्ण है|
पहले की कड़ियाँ -

भाग १ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 1)
भाग २ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 2)
भाग ३ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 3)

भाग ४ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 4) स्वास्थय बीमा योजना चुनने के लिये कुछ सुझाव


क्या आपको पता है कि सभी अंग्रेजी अखबारों की वार्षिक सदस्यता भी आप ले सकते हैं… जैसे कि टाईम्स ऑफ़ इंडिया…(Yearly Subscription of English News papers... Do you know ???)

     क्या आपको पता है कि सभी अंग्रेजी अखबारों की वार्षिक सदस्यता भी आप ले सकते हैं, इसमें लगभग अंग्रेजी याने कि आंग्लभाषा के सभी अखबार शामिल हैं, जैसे मुंबई में ९०० रुपये में सालभर टाईम्स ऑफ़ इंडिया और मुंबई मिरर या ईकनोमिक टाईम्स आप ले सकते हैं, हिन्दुस्तान टाईम्स १९९ रुपये में सालभर पढ़ सकते हैंडी.एन.ए. ४५० रुपये में सालभर पढ़ सकते हैं।


    अगर आप यही अखबार बिना सदस्यता के साल भर पढ़ते हैं तो आपको लगभग दोगुने या उससे ज्यादा पैसे खर्च करने पढ़ते हैं, जैसे कि टाईम्स ऑफ़ इंडिया ४.५० रुपये का आता है, मुंबई मिरार या ईकनोमिक टाईम्स के साथ, तो इसके हिसाब से महीने का बिल हो जाता है १३५ रुपये और सालभर का लगभग १६२० रुपये, और पढ़ पायेंगे साल भर आप केवल टाईम्स ऑफ़ इंडिया। पर अगर सभी आंग्लभाषा के अखबारों की आप वार्षिक सदस्यता ले लेते हैं तो आप सारे अखबार पढ़ पाते हैं वो भी लगभग उतने ही रुपये में।


    इसके लिये अपने अखबार वाले से ही संपर्क करें क्योंकि इसके लिये किसी भी अखबार ने अलग से अभियान नहीं छेड़ा है और न ही इस बारे में सार्वजनिक किया जाता है, या यह भी हो सकता है कि यह हॉकर लोग अपने फ़ायदे के लिये इस तरह की स्कीम आम आदमी तक पहुंचाते ही न हों। अखबार वाला आपसे चेक मांगेगा जो कि देय होगा प्रकाशन कंपनी के नाम पर ही, और आपके पास आयेंगे कूपन्स कूरियर द्वारा, फ़िर बस आपको हर मास एक कूपन अपने हॉकर को देना है और वह अखबार आपको उपलब्ध करवाता रहेगा। बीच में आपके पास प्रकाशन कंपनी की ओर से फ़ोन भी आयेगा कि आपको अखबार मिल रहा है या नहीं।


    तो आज ही अपने हॉकर को पकड़िये और वार्षिक सदस्यता लीजिये अभी डी.एन.ए और हिन्दुस्तान टाईम्स की सदस्यता ली जा रही है। टाईम्स ऑफ़ इंडिया की सदस्यता शुरु होने वाली है।

Monday, January 18, 2010

भाग ४ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 4) स्वास्थय बीमा योजना चुनने के लिये कुछ सुझाव

सही स्वास्थ्य बीमा योजना चुनने के लिये कुछ सुझाव

जब आप स्वास्थ्य बीमा योजना ले रहे हैं, तो निम्न बातों का ध्यान रखें -

  • कीमतों और मिलने वाली सुविधाओं की तुलना कर लें। एक पॉलिसी की कीमत दूसरी से ३ गुना तक हो सकती है।

  • अगर आपका परिवार है, तो आप हमेशा फ़ैमिली फ़्लोटर प्लॉन ही लें। यह आपके लिये अधिक किफ़ायती भी होगा और परिवार के प्रत्येक सदस्य को ज्यादा राशि का कवरेज भी मिलेगा। इसके अलावा इसमें लचीलापन भी है कि परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी अनुपात में इस फ़्लोटर योजना का उपयोग कर सकता है। यह ज्यादा अधिक मदद करता है आपकी, क्योंकि अधिकतर ज्यादातर मामलों में एक ही व्यक्ति गंभीर रुप से बीमार होता है, न कि पूरा परिवार।

  • योजना की शर्तों की तुलना जरुर करें जिससे आपको बाद में झटका नहीं लगे। एक दलाल (ब्रोकर) आपको ज्यादा अच्छी सलाह दे सकते हैं क्योंकि वे काफ़ी हद तक स्वतंत्र होते हैं।

  • कोई भी ऐसी कैशलेस योजना इस आधार पर न लें कि किसी पास के अस्पताल से उसका समझौता (टाईअप) है। बीमा कंपनियों के पैनल द्वारा सभी अच्छॆ अस्पतालों को शामिल किया जाता है। किसी एक शर्त के लिये नहीं, आप वही योजना देखिये जिसमें आपकी सारी आवश्यकताएँ पर्याप्त रुप से पूरी होती हों।

  • जिन अस्पतालों को आपकी बीमा कंपनियों द्वारा पैनल में शामिल किया गया है, तो सबसे पहले तो आपको सभी अस्पतालों के बारे में जानकारी लेना चाहिये कि किस अस्पताल की क्या विशेषज्ञता है। जिससे जब आपको जरुरत हो तब आप उस अस्पताल का उपयोग कर सकते हैं, बजाय सभी समय एक ही अस्पताल के जिसे आप उपयोग करते हैं।

  • हमेशा ध्यान रखें जब भी आप पॉलिसी एक ब्रोकर से खरीदें, तो उसका लायसेंस नंबर ले लें और आईआरडीए (IRDA) की वेबसाईट पर उसकी जानकारी देख लें और सुनिश्चित कर लें कि हाँ यह ब्रोकर वैध है। ये (ब्रोकर) दलाल स्वतंत्र होते हैं, इन्हें हर पॉलिसी बेचने पर कुछ भुगतान (दलाली) मिलता है, इसलिये ये लोग किसी एक पॉलिसी लेने के लिये आपको बाध्य नहीं करेंगे। दूसरी तरह अगर पॉलिसी बीमा कंपनी का एजेन्ट बेचता है तो उसके पास तो केवल उसी कंपनी की योजनाएँ होंगी और वह उनकी ही विशेषता बताकर अपने और कंपनी के हित के लिये वही पॉलिसी बेचने की कोशिश करेगा।

  • जब आप प्रस्ताव फ़ॉर्म में अपनी घोषणाएँ (declarations) भर रहे हों तो बिल्कुल सही एवं ठीक जानकारी दीजिये। यह सुनिश्चित करता है आपका भूगतान जब आपको वास्तव में इसके दावे की जरुरत होती है।

  • नियमित व्यायाम करें, और स्वास्थ्य भोजन की आदतों का पालन करें। अधिक धूम्रपान और मद्यपान से बचें। इससे आपकी प्रिमियम कम हो सकती है जब आप अपने स्वास्थ्य का जोखिम कवर ले रहे हों।

  • अगर आप पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित हैं, तो उसके लिये आवश्यक सावधानियाँ बरतें। हमेशा अपने आप को ऐसा ही दर्शायें कि मेरा बीमा नहीं है पर किया जा सकता है, जिससे आपको अपनी बुरी आदतों पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी और लंबे समय मॆं लाभ मिलेगा।

पहले की कड़ियाँ -

भाग १ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 1)
भाग २ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 2)
भाग ३ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 3)

पुल पर बहुत सारी लड़कियाँ खड़ी हुई थीं… सब की सब एक ही लड़्के की दीवानी थीं.. सोचो कि वह किस्मत वाला लड़का कौन था… [Guess who was the lucky guy ????]

एक नदी थी….

उसके ऊपर एक पुल बन रहा था…

पुल पर बहुत सारी लड़कियाँ खड़ी हुईं थीं..

सब की सब एक ही लड़के की दीवानी थीं…

सोचो कि वह किस्मत वाला लड़का कौन था…

…..

 

…..

 

 

…..

..

 

 

 

 

…..

अरे सोचो….. सोचो…..

 

 

….

 

…..

चलो यार …. मैं बताता हूँ…. उत्तर है

 

“किसना”

जो है अलबेला मद नैनों वाला …

जिसकी दीवानी ब्रज (BRIDGE) की हर बाला

वो किसना है…

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ब्रेड पिट और विद्या बालन की शादी के बाद बहुत सारे छात्र उनके घर पर जाते हैं क्यों …

..

..

..

??

??

क्योंकि अब उसका नाम हो गया है बिद्या पिट (विद्यापीठ)

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संता और बंता आपस में बातें कर रहे थे -

संता - “अगर मैं कॉफ़ी पी लेता हूँ, तो मुझे नींद नहीं आती है।”

बंता - “मेरे साथ तो बिल्कुल उल्टा है, अगर मैं सो जाता हूँ तो फ़िर मैं कॉफ़ी नहीं पी पाता हूँ।”

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Ganesh को Anesh किसने बनाया -

 

सोचो

 

 

सोचो

 

 

सोचो

 

चलो मैं बताता हूँ -

 

“कैलाश खेर ने”

 

तेरे नाम से “G” लूँ…..

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Sunday, January 17, 2010

भाग ३ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 3)

स्वास्थ्य बीमा की आवश्यकता

    चिकित्सा व्यय इन दिनों आसमान को छू रहे हैं। डॉक्टर के साथ केवल एक बैठक में ही जहाँ आजकल ज्यादा रुपयों की आवश्यकता होती है, वहीं अगर कोई जटिल बीमारी हो गई तो उसके उपचार में खर्च करने के लिये आपको अपनी सारी बचत राशि जो कि आपने भविष्य के लिये बचाई है, खर्च हो सकती है।  स्वास्थ्य बीमा योजना आपको यह निश्चिंतता देती है कि बीमारी की स्थिती में आवश्यक उपचार अच्छे से मिल सके और आपकी जेब पर भार भी न आये। स्वास्थ्य बीमा होना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समय पर  आपको अच्छी चिकित्सा सुविधा के लिये मदद करता है, और यह आपके जीवन और स्वास्थ्य में सुधार करता है। लंबी बीमारी की स्थिती में यह आर्थिक कठिनाईयों का जोखिम कवर करता है। कुछ सालों में समाज में स्वास्थ्य बीमा के लिये अच्छी जागरुकता आई है। खासतौर पर लगातार अनिश्चिततापूर्ण घटनाक्रमों ने और मुश्किल पैदा कर दी है जैसे कि हाल ही में हुए आतंकवादी हमले।


स्वास्थ्य बीमा के लाभ

    स्वास्थ्य लाभ सुविधाएँ आपकी ली गई योजना पर निर्भर करता है, और ये भी कि उस पॉलिसी में क्या क्या कवरेज है। यहाँ पर कुछ बुनियादी सुविधाओं की सूची है जो कि लगभग सभी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में मिलता है -

  • यह मदद करता है बेहतर भविष्य के लिये एक छोटी सी राशि खर्च कर जो कि प्रीमियम कहलाती है।


  • यह बड़ी वित्तीय खर्चे से आपकी रक्षा करता है, और खासकर तब वित्तीय रुप से टूटने से बचाता है जबकि महंगी चिकित्सा या बीमारी के बाद देखभाल की जरुरत होती है।


  • यह निश्चित रुप से बीमा से सुरक्षित होने की भावना प्रदान करता है।


  • यह परिवार के सदस्यों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है


  • यह अस्पताल और मेडिकल के बिलों को भी कवर करता है।


  • यह विकलांगता और कस्टोडियल बिल को भी कवर करता है।


  • आप इसकी प्रीमियम राशि के भुगतान का आयकर अधिनियम की धारा 80 D  के अंतर्गत लाभ ले सकते हैं।


  • सबसे अच्छी बात, आप स्वास्थ्य बीमा योजना का विकल्प ६० वर्ष की उम्र के बाद भी चुन सकते हैं।

पहले की कड़ियाँ -
भाग १ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 1)
भाग २ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 2)

अपना कार्य कैसे न करें और उसे दूसरे के सिर पर कैसे डालें, पूरे वर्कफ़्लो के साथ.. (How to redirect own work… with Workflow.. Problem Solving Flowchart)

चित्र को बड़ा करने के लिये क्लिक करें।

Problem Soving Flowchart

problem_flowchart

Saturday, January 16, 2010

भाग २ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 2)

चिकित्सा बीमा की श्रेणियाँ:

पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा खर्च कई गुना बढ़् गया है। इसलिये चिकित्सा बीमा लेना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। और कौन सी योजना ली जाये यह बहुत ही कठिन हो गया है। यहाँ कुछ प्रकार के स्वास्थ्या बीमा है, जो कि इस प्रकार हैं -

. व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा
. सामूहिक चिकित्सा बीमा
. विशेष योजनाएँ

. व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा
इस प्रकार के स्वास्थय बीमा योजनाएँ व्यक्तिगत आधार पर चिकित्सा में व्यय होने वाली राशि से रक्षा और उसकी रक्षापूर्ती को प्रस्तावित करती हैं। सामुहिक बीमा योजनाओं से व्यक्तिगत बीमा योजनाओं के लिये प्रीमियम ज्यादा होती है ।

. सामूहिक चिकित्सा बीमा
इस प्रकार की चिकित्सा बीमा योजना एक नियोक्ता या सोसाइटी या संघ के माध्यम से आमतौर पर उपलब्ध होती है, जिसमें एक ही मुख्य पॉलिसी के अन्तर्गत व्यक्तियों के नाम लिखे रहते हैं, जिन्हें बीमा का लाभ देना है।

. विशेष योजनाएँ

इस प्रकार की योजनाएँ विशेष रुप से बुजुर्ग व्यक्तियों, सैन्य सेवाओं के दिग्गजों की आवश्यकता का ध्यान रखती हैं।

स्वास्थ्य बीमा के प्रकार -
स्वास्थ्य देखभाल में होने वाले खर्चों में हाल के दिनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।  इससे उपभोक्ता को खुद को ही नहीं बल्कि अपने परिवार को भी बीमा सुरक्षा देनी चाहिये। जो कि भविष्य में होने वाले चिकित्सा खर्च और अन्य संबंधित आवाश्यकताओं को कवर करता है। बीमा की आवश्यकता पुरानी पीढ़ी के लोगों को ज्यादा है जो या तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या फ़िर निकट भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले है। हम बाजार में उपलब्ध चिकित्सा बीमा के प्रकार देखते है, जो इस प्रकार हैं -

. चिकित्सा बीमा (Mediclaim Insurance)
. गंभीर बीमारी बीमा (Critical Illness Insurance)

. चिकित्सा बीमा (Mediclaim Insurance)

यह आमतौर पर अस्पताल में भर्ती होने, शल्य चिकित्सा में होने वाले खर्च को कवर करता है जो कि तब होते हैं जब बीमा धारक को कोई बीमारी या शल्य चिकित्सा की जरुरत होती है। बाजार में विभिन्न प्रकार के चिकित्सा बीमा उत्पाद उपलब्ध हैं जैसे व्यक्तिगत चिकित्सा बीमा, सामूहिक चिकित्सा बीमा और विदेश चिकित्सा बीमा। इस प्रकार की स्वास्थ्य बीमा से किसी भी बीमारी से आप अस्पताल में होने वाले वास्तविक खर्च जो कि वास्तविकता में होते हैं, आपको बीमा कंपनियाँ अदा कर देती हैं, और यह सुविधा केवल गैर जीवन बीमा (जनरल बीमा कंपनियाँ) ही देती हैं। इस तरह की योजनाओं को मेडिक्लेम नाम से जाना जाता है। अन्य प्रकार के स्वास्थ्य बीमा दोनों जीवन बीमा और गैर जीवन बीमा कंपनियों द्वारा उप्लब्ध करवाया जाता है।

गंभीर बीमारी बीमा (Critical Illness Insurance)

गंभीर बीमार योजनाएँ व्यक्ति को बीमित करती हैं गंभीर बीमारियों के जोखिम से, जिसका बीमा सुनिश्चित समय पर प्रदान करना होता है उसके एवज में बीमा कंपनी व्यक्ति को गंभीर बीमारी होने के जोखिम का बीमा प्रदान करती है। यह बीमा आपको देता है आपको नगद राशि अगर आपको कोई भी गंभीर बीमारी अनपेक्षित रुप से आ घेरती है, जो गंभीर बीमारियाँ  इस बीमा में बीमित की गई हैं अगर कोई भी बीमारी उसमें से निकल जाती है तो बीमा कंपनी आपको तुरंत बीमा नगद दे देती हैं, जिसे आप अपने घर में होने वाले खर्च और उस गंभीर बीमारी के चिकित्सा खर्च में उपयोग कर सकते हैं।  कभी कभी गंभीर बीमारी आपके परिवार की जीवन शैली बदल देता है तो यह बीमा उस जोखिम से भी रक्षा करता है। किसी भी गंभीर बीमारी जो कि इस बीमा में कवर होती है, बीमारी के पता लगते ही कुछ ही दिनों में  इस तरह के स्वास्थ्य बीमा में बीमा धारक को बीमा की राशि एकमुश्त दे दी जाती है। आमतौर पर गंभीर बीमारियों की इस बीमा योजना में निम्न गंभीर बीमारियों को कवर किया जाता है -

  • Aorta graft surgery
  • कैंसर Cancer
  • Coronary artery bypass surgery
  • दिल का पहला दौरा First heart attack
  • गुर्दे का विफ़ल होना Kidney failure
  • प्रमुख अंग प्रत्यारोपण Major organ transplant
  • Multiple sclerosis
  • पक्षाघात Paralysis
  • Primary pulmonary arterial hypertension
  • आघात Stroke

कल सूर्यग्रहण था और ग्रहण का पहला प्रकोप हमारी शर्ट पर निकला, तो शायद हम बच लिये… “बांके बिहारी लाल की जय”

   कल सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण था, शायद वैसे जैसा कि महाभारत में हुआ था क्योंकि दोपहर को ही सन्ध्याकाल जैसी स्थिती निर्मित हो गई थी।

   हम ग्रहण काल में घर से निकले ऑफ़िस जाने के लिये और बड़े इत्मिनान से ऑटो को हाथ देकर रोकने लगे। कई ऑटो रुके पर कोई उस तरफ़ जाने को तैयार ही नहीं था (ये तो रोज की बात है ), एक ऑटोवाले ने सहमति दी तो हम जैसे ही उसमें बैठने लगे पता नहीं कैसे हमारी शर्ट की ऊपरी जेब ऑटो के मीटर में उलझ कर फ़ट गयी, और हम हतप्रभ से अपनी शर्ट को देखने लगे।

   वैसे भी मन तो शंकालू ही होता है सोचा कि चलो ग्रहण की शुरुआत हो चुकी है अपने ऊपर अब बेटा दिनभर के लिये तैयार हो जाओ, पता नहीं दिन कैसा जाने वाला है। फ़िर क्या था ऑटो से उतरे वापिस घर आये और शर्ट बदल कर वापस चल दिये। क्योंकि अपनी तो पहले की हिस्ट्री भी खराब है ग्रहण के दिनों की, हाँ यह पहला सूर्य ग्रहण था और अभी तक जितने भी बड़े बदलाव या नुक्सान हुए थे वो चंद्र ग्रहण से हुए थे। हो सकता है कि हम खुद ही उस समय लापरवाह हो गये हों और हमारी शर्ट फ़ट गयी हो।

   पर हाँ दिनभर काफ़ी अच्छा गया, और तो और जिन कार्यों के न होने की उम्मीद थी वे कार्य भी हो गये। लगता है कि शनि शर्ट पर ही था। :)

   यह तो सब जीवन में चलता ही रहता है, और जीवन इन्हीं उतार-चढ़ाव का नाम है, इनके बिना जीवन अधूरा है।

   पर फ़िर भी मन में यह तसल्ली रही कि चलो इस बार ग्रहण से अपन बच लिये, कोई नई समस्या या जिंदगी में नई पेचिदगियाँ नहीं आईं और सब मस्त रहा। सब मुरलीवाले की माया है। इसलिये हम तो हमेशा “बांके बिहारी लाल की जय” कह लेते हैं।

Friday, January 15, 2010

भाग १ - स्वास्थ्य बीमा के बारे में आवश्यक बातें जो सभी को पता होना चाहिये। (What You Should know about Mediclaim Part 1)

    स्वास्थ्य बीमा जो कि मेडीक्लेम या चिकित्सा बीमा के नाम से ज्यादा जाना जाता है। यह बीमा कंपनी और बीमा धारक के बीच एक प्रकार का अनुबंध होता है। आकस्मिक चिकित्सा की स्थिती में यह आपकी और आपके परिवार की आर्थिक रुप से सुरक्षा करता है। इसमें किसी किसी योजना में स्थायी अपंगता और लंबी चिकित्सा की जरुरतें भी शामिल होती हैं। मेडिक्लेम में आपको हर वर्ष प्रीमियम अदा करना होता है, जिसके एवज में आप पाते हैं बीमा कंपनी का वायदा, जितनी भी राशि आपकी खर्च होती है, उसे क्लेम के रुप में वापिस देने के लिये। स्वास्थ्य बीमा भारतीय बाजार में नया है और उपभोक्ताओं को धीरे धीरे इसका पता चल रहा है। उपभोक्ता को स्वास्थ्य बीमा का उद्देश्य पता होना चहिये और बीमा कंपनियाँ चिकित्सा में खर्च की गई राशि को बीमित करती हैं। आमतौर पर स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में अपंगता, लंबी चिकित्सा, या अस्पताल में भर्ती होना शामिल होता है। यह बीमा सरकारी कंपनियों के माध्यम से भी उपलब्ध है और् निजी बीमा कंपनियाँ भी यह सुविधा देती है।

    स्वास्थ्या बीमा दोनों प्रकार से लिया जा सकता है व्यक्तिगत और समूह में (कंपनी अपने कर्मचारियों के लिये बीमा कवर दे सकती है)। प्रत्येक मामले में या तो वो समूह हो या फ़िर व्यक्तिगत हो, बीमा प्रीमियम का भुगतान आयकर बचाने के लिये और खुद को किसी अप्रत्याशित चिकित्सा सेवा की स्थिती में होने वाले खर्च से बचाता है। हालांकि व्यक्तिगत पॉलिसियँ, समूह पॉलिसी से मह्ँगी होती है। खुद बीमा धारक ही व्यक्तिगत पॉलिसी का मालिक होता है। जबकि सामूहिक प्लॉन्स में कंपनियाँ  इसे प्रायोजित करती हैं और इसमें अपने कर्मचारियों को पंजीकृत करती हैं। अगर आपके पास सामूहिक बीमा है तो व्यक्तिगत स्वास्थ्या बीमा लेने की जरुरत ही नहीं होती है। कई लोग जो कि कोई बीमा नही खरीद पाते हैं या किसी वजह से बीमा नहीं करवा पाते हैं उन्हें सामूहिक योजना का अच्छा लाभ होता है।

    स्वास्थ्य व्यय के कुल जोखिम का आकलन कर अपनी वित्तीय संरचना को अच्छे से विकसित कर सकते हैं,  मासिक या वार्षिक प्रीमियम भरने के लिये यह आपको महत्वपूर्ण दिशा देगा। और वह प्रीमियम राशि हर वर्ष आपके पास होगी जिससे आप अपने बीम कंपनी से यह सुविधा ले पायेंगे और अपने को व अपने परिवार को स्वास्थ्य बीमा से बीमित कर पायेंगे। इस सुविधा को केन्द्रीय संगठन  जैसे कि सरकारी एजेन्सी, निजी व्यवसायी या लाभ के लिये कार्य न करने वाली इकाई द्वारा प्रशासित किया जाता है। उस व्यक्ति को या बीमा धारक द्वारा बीमा कंपनी को नियमित शुल्क का भुगतान किया जाता है, जिसे प्रीमियम के रुप में जाना जाता है। इसके फ़लस्वरुप बीमा कंपनियाँ सभी या कुछ चिकित्सा खर्च जब भी बीमित को जरुरत होगी, भुगतान कर देगी, जब बीमित अगर घायल हो गया हो या बीमार हो जाता है या फ़िर अस्पताल में भर्ती होता है। तब बीमाधारक को चिकित्सा खर्च की कोई चिंता नहीं होती है।

गूगल की चैट विन्डो की अनुवाद सेवा में अब आंग्ल भाषा से हिन्दी में अनुवाद भी उपलब्ध है..

मैंने अभी कुछ दिन पहले एक पोस्ट लिखी थी क्या आपने गूगल की इस अनुवाद सेवा के बारे में सुना है, देखिये….

अब इसमें आंग्ल भाषा से हिन्दी का बोट भी जुड़ गया है जिससे आपको कोई भी अन्य विन्डो खोलना ही नहीं पड़ेगी जब भी किसी शब्द का हिन्दी में अर्थ चाहिये सीधे चैट कीजिये और हिन्दी में अर्थ पाईये। इस बोट का एड्रेस है – en2hi@bot.talk.google.com

en2hi

जल्दी से यह जोड़ लीजिये अपने जीमेल में और किसी भी शब्द का अनुवाद आप करवा पायेंगे केवल एक चैटिंग विन्डो से।

Thursday, January 14, 2010

शायद सारे चिट्ठाचर्चा वाले चर्चाकार नाराज हैं…. इसीलिये तो हमारे पोस्ट की लिंक नहीं दी जाती है… चलो छोड़ो… पर क्या करें आज लिख ही दिया दिल नहीं माना तो

    हम बहुत दिनों से देख रहे हैं कि सारे चिट्ठाचर्चा वाले चर्चाकार शायद हमसे नाराज हैं क्यों, क्योंकि हमें लगता है कि सब हमसे नाराज हैं, क्योंकि हमारे ब्लॉग की लिंक ही नहीं दी जा रही है। हमें लगता है कि यह हमें नहीं कहना चाहिये पर फ़िर भी आज पता नहीं क्यों फ़िर भी कह ही रहे हैं। हाँ भई हम कोई प्रसिद्ध ब्लॉगर तो नहीं फ़िर भी ब्लॉगर तो हैं, कुछ हमारे रोज के पाठक तो हैं ही जो कि हमें ब्लॉग लिखने के लिये प्रेरित करता है, अब देखते हैं कि आखिर हमें ये चर्चाकार कब तक इग्नोर करते हैं।

    ब्लॉगर भले ही उम्र में बढ़े होते हैं पर फ़िर भी हमेशा यही मन करता है कि हमारी चर्चा कहीं न कहीं हो, क्योंकि कहीं न कहीं मन बालसुलभ या हठी होता है। सोचा था कि कभी भी यह बात न बोलेंगे और चुपचाप ब्लॉगरी करते रहेंगे। पर पता नहीं आज जब विन्डोज लाईव राईटर खोला ब्लॉग लिखने के लिये तो अपने आप ही कीबोर्ड पर ऊँगलियाँ चलने लगीं और यह सब लिख दिया।

भाग ४ - आपको यूलिप (ULIP) के बारे में क्या क्या पता होना चाहिए… ? यूलिप क्या होता है.. [What is ULIP.. Part 4]

यूलिप के नुकसान

यूलिप के बड़े नुकसान इस प्रकार हैं -

  • यूलिप बीमा उत्पाद अन्य प्रकार के बीमा उत्पादों से बहुत महँगे होते हैं।
  • भारी आवंटन शुल्क और अन्य प्रशासनिक खर्च निवेश के लिये बची हुई राशि को काफ़ी कम कर देता है।
  • उसके उच्च प्रशासनिक खर्च और भारी आवंटन शुल्क के कारण यूलिप में किया गया निवेश को प्रारंभिक वर्षों में तोड़ना बहुत महँगा होता है। अल्पावधि निवेश के लिये यह आकर्षक निवेश नहीं है। यह केवल लंबी अवधि के लिये अच्छा निवेश विकल्प है।
  • आपको बाजार की अच्छी जानकारी होना चाहिये जिससे कि आप अपना निवेश सही समय पर सही कोषों में स्विच कर पायें तभी अधिकतम लाभ की स्थिती बनती है।

यूलिप लंबी अवधि के लिये अच्छा निवेश है ?

यूलिप उन लोगों के लिये बेहतर निवेश का साधन है जो कि दीर्घकालिक निवेश करना चाहते हैं। प्रारंभिक तीन वर्षों की उच्च शुल्क संरचना यूलिप को प्रारंभिक वर्षों के लिये महँगा कर देती है। जैसा कि पहले भी बताया है कि प्रारंभिक वर्षों में यूलिप में उच्च शुल्क संरचना होती है। इसके अलावा, बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिती में निवेश की राशि कम भी हो सकती है या बहुत कम रिटर्न देती है। हालांकि, धीरे धीरे शुल्क संरचना में कमी आती जाती है और फ़लस्वरुप लंबी अवधि में आपकी प्रीमियम राशि से ज्यादा राशि आपके चुने हुए कोषों में निवेश होती है।

यूलिप के तहत आयकर पर छूट

य़ुलिप में निवेश की गई राशी आपको आयकर के तहत छूट भी प्रदान करते हैं। यूलिप में किया गया निवेश आयकर की धारा 80 C  के तहत ज्यादा से ज्यादा १,००,००० तक के निवेश को आयकर में छूट मिलती है।निवेशक द्वारा चुनी गई योजनाओं से कोई फ़र्क नहीं पड़ता है।

पहले की कड़ियाँ पढ़ने के लिये नीचे दी गईं लिंक पर चटका लगाईये।
भाग १ - आपको यूलिप (ULIP) के बारे में क्या क्या पता होना चाहिए… ? यूलिप क्या होता है.. [What is ULIP.. Part 1]
भाग २ - आपको यूलिप (ULIP) के बारे में क्या क्या पता होना चाहिए… ? यूलिप क्या होता है.. [What is ULIP.. Part 2]
भाग ३ - आपको यूलिप (ULIP) के बारे में क्या क्या पता होना चाहिए… ? यूलिप क्या होता है.. [What is ULIP.. Part 3]

समय प्रबंधन के लिये त्रिपल एस फ़ॉर्मुला (Tripple “S” Formula for Time Management)

आज मैं BG 15-5 जो कि गोपीनाथ चंद्र प्रभू ने इस्कॉन गिरगाँव चौपाटी पर १ जनवरी २०१० को यह वक्तृता दिया था, सुन रहा था। जिसमॆं उन्होंने समय प्रबंधन के लिये Tripple “S” फ़ॉर्मुला बताया जो मुझे बहुत अच्छा लगा।

कार्य हमारी जिंदगी में चार प्रकार के होते हैं -

१. अत्यावश्यक और महत्वपूर्ण

२. अत्यावश्यक नहीं किंतु महत्वपूर्ण

३. अत्यावश्यक किंतु महत्वपूर्ण नहीं

४. न ही अत्यावश्यक और न ही महत्वपूर्ण

१. अत्यावश्यक और महत्वपूर्ण – जैसे कि छात्र अपनी परीक्षा की तैयारी करता है, क्योंकि छात्र को परीक्षा के समय पढ़ाई से ज्यादा अत्यावश्यक और महत्वपूर्ण कार्य कुछ और नहीं होता है।

२. अत्यावश्यक नहीं किंतु महत्वपूर्ण – जैसे कि पढ़ाई अगर सतत की जाये तो निश्चित ही परीक्षा में अच्छॆ अंक आयेंगे और परीक्षा के समय पढ़ाई अत्यावश्यक नहीं रहेगी। जैसे अपने स्वास्थ्य के लिये अगर रोज व्यायाम करेंगे तो यह भी अत्यावश्यक नहीं है परंतु महत्वपूर्ण है।

३. अत्यावश्यक किंतु महत्वपूर्ण नहीं – जैसे कि फ़ोन कॉल अत्यावश्यक है परंतु महत्वपूर्ण नहीं, हो सकता है कि केवल टाईम पास करने के लिये किसी मित्र ने ऐसे ही फ़ोन लगाया हो। किसी को सिगरेट पीना है तो उसके लिये यह अत्यावश्यक है परंतु महत्वपूर्ण नहीं। नई फ़िल्म जैसे ही टॉकीज में लगती है दौड़ पड़ते हैं देखने के लिये, क्या यह तीन महीने बाद नहीं देखी जा सकती, क्या है यह, यह अत्यावश्यक कार्य है परंतु महत्वपूर्ण नहीं। जिन विचारों पर मन का नियंत्रण नहीं होता।

४. न ही अत्यावश्यक और न ही महत्वपूर्ण – जैसे की फ़ालतू में सोते रहना, टाईम पास करना, ओर्कुट या फ़ेसबुक पर रहना, ऐसे ही सर्फ़िंग करते रहना।

समय प्रबंधन का Tripple “S”  फ़ॉर्मुला है -

पहला “S”  - पहले प्रकार के कार्यों की कमी (अत्यावश्यक और महत्वपूर्ण) करना जिससे हमें कभी गुस्सा नहीं आये । जो लोग दूसरे प्रकार के कार्य नहीं करते हैं वे ही पहले प्रकार को आने की दावत देते हैं, अगर समय पर सब कार्य कर लिया जाये तो पहले प्रकार (अत्यावश्यक और महत्वपूर्ण) की नौबत ही नहीं आयेगी।

दूसरा “S” – तीसरे प्रकार के कार्यों (अत्यावश्यक किंतु महत्वपूर्ण नहीं) को मना करना, जो कि केवल हम मन को खुश करने के लिये करते हैं या कुछ क्षणों के सुख के लिये करते हैं, हमे हमेशा दूसरे प्रकार के कार्यों में व्यस्त रहना चाहिये।

तीसरा “S” – चौथे प्रकार के कार्यों से हमेशा बचना चाहिये, केवल दूसरे प्रकार (अत्यावश्यक नहीं किंतु महत्वपूर्ण) के कार्य में व्यस्त रहना चाहिये।

पूरा वक्तृता सुनने के लिये यहाँ चटका लगाईये।

Wednesday, January 13, 2010

एक मजेदार बातचीत, बहुत ही बढ़िया .. एक हिन्दू भक्त और मुस्लिम के बीच में .. A wonderful conversation :-) just too good... :-)

आज एक ईमेल आया था और इतना अच्छा लगा कि वैसा का वैसा ही प्रकाशित कर रहा हूँ।


यहाँ केवल भगवान क्या है और हम उसकी मंदिर में जाकर क्यों पूजा करते हैं यही बताया गया है। और यह पोस्ट को मैं हिन्दी में नहीं लिख रहा हूँ नहीं तो वो बात नहीं आयेगी।


अभद्र टिप्पणियाँ मोडरेट कर दी जायेंगी।



A devotee named Balaji was travelling in a train on the day of Gita Jayanti and it incidentally happened to be the day of bakri-id. So many muslims were also traveling in the train on that day. He got down at khandeshwar station to catch the next train. Five to 6 muslim oungsters also got down from the same bogie and followed him. They had a spokesperson who seemed to be quite well  read amongst them. He stopped the devotee and then the following conversation happened.

Muslim: Oh! You seem to be a well educated person. Have you dedicated your whole life for this preaching mission?

Balaji: Yes.

Muslim: Oh! That's very nice. You are doing such a nice thing. I am also very interested in knowing about your religion and I have done quite a lot of study about your religion also. Can I ask you a few questions?

Balaji: Sure.

The spokesperson's tone, which sounded very pleasant till now, suddenly became sarcastic.

Muslim: So you people believe in idol worship?

Balaji: No, we believe in deity worship.

Muslim: What is the difference?

Balaji: The difference is like this. You see post boxes in almost every street of Mumbai. When you post a letter addressed to a person staying in Delhi or Chennai in the post box it will eventually reach him even if there is a slight mistake in the address. But if you yourself paint a box in black and red, hang it outside your door and post a letter in it, it will never reach the destination even if it is addressed to the person next door. Why? Because the postbox has been authenticated by the government, letters posted
in that box are regularly cleared by postal department professionals an delivered to their destinations. Similarly the deities are invested with the complete potencies of the Lord Himself and hence can be worshipped.

Muslim: Oh! Then, does it mean that if I am at a place where there is no access to the deities I cannot worship the Lord?

Balaji: No, You can worship Him through His holy names. Holy Quran says that there are 100 names of Lord Allah. The same way our scriptures also mention so many names of the Lord which are invested with all the potencies. So, we can always worship the Lord through His holy names.

Muslim: Oh! If the Lord can be worshipped simply through His holy names then what is the need for deity worship?

Balaji: Ok. Now I will give you my cell phone and you have unlimited free minutes for the rest of your life to speak with your mother. Does it negate the need for having any more personal interactions with your mother for the rest of your life? Will you be satisfied by just speaking with her over phone or would you want to personally have some interactions with her and do some service to her when she is in need?

Muslim: I would definitely like to have personal interactions.

Balaji: Yes, the same way Deity worship gives us this nice opportunity do personal service to the Lord. Moreover, the many names of the Lord are actually named after their form. For example, the Lord is called Keshava, meaning, the one with beautiful hair. He is also called Padma Lochana, meaning, the one with eyes as beautiful as lotus petals. If just these names, which are named after the forms of the Lord, are so much attractive, how much more the forms themselves would attract the hearts of the devotees?
Hence the deities are there in order to attract the devotees.

Muslim: But I have read in your vedic scriptures that those who do Asambhuti worship go to the darkest regions of hell? (Referring probably to the Isopanishad verse)

Balaji: Yes, it is Ishopanishad verse 12, "andham tamah pravishanti ye asambhutim upasate".

His face had a completely shocked ex-pression when he heard me actually quote the verse. May be he never expected any hindu to know and what to speak of actually quoting the verse?

Balaji: Here the word asambhuti doesn't refer to deity worship, but it refers to demigod worship. Anyways, you seem to be well read in our scriptures. What do our scriptures mention about the right process of acquiring vedic knowledge?

Muslim: I don't know.

Balaji: See (Opening the Bhagavad gita and showing Bg 4.34) this is the process. First one should surrender to a spiritual master, serve him nicely and then humbly question. Then the spiritual knowledge flows. Did you receive your knowledge by this process?

Muslim: No.

Balaji: Then, how did you learn?

Muslim: I read from the Oxford university press edition of your Vedas.

Balaji: See, that is the problem. Neither the person who wrote the book nor you who read his book understood the Vedas in the way it is recommended. One cannot understand the vedic scriptures by a mere knowledge of Sanskrit, the same way a person with just a knowledge of English cannot understand a
chemistry or physics book, though it may be written in the English language. But I see that you have a genuine interest in understanding our scriptures (with a pinch of sarcasm). Now, you want to take this
Bhagavad gita?

Muslim (With a completely confused look): No, No. I will call you later. He hurriedly walked away with his cheerleaders.

भाग ३ - आपको यूलिप (ULIP) के बारे में क्या क्या पता होना चाहिए… ? यूलिप क्या होता है.. [What is ULIP.. Part 3]

यूलिप लेते समय कौन सी बातों पर ध्यान देना चाहिये

जब भी आप कोई भी ब्रोशर देख रहे हों यूलिप बीमा खरीदने के लिये, हमेशा कुछ चीजों को ध्यान से देखना चाहिये जो कि निम्न हैं -

  • सभी प्रकार के शुल्क जो कि योजना के तहत काटे जाने हैं
  • समय से पहले धन की निकासी होने पर शुल्क
  • सुविधाएँ और लाभ
  • क्या क्या बीमे में कवर किया गया है और क्या नहीं
  • लेप्स होने पर इसके क्या नुकसान हैं
  • अन्य प्रकटीकरण (Other Disclosures)
  • उदाहरण जो कि देय लाभ को प्रदर्शित करते हैं उसे ६% और १०% दोनों स्थितियों में रिटर्न की गणना कर लें।

यूलिप के लाभ

यूलिप के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं -

  • बीमा और निवेश, यह आपकी दोनों आवश्यकताओं का ध्यान रखता है।
  • आपको अपने निवेशों का प्रबंधन करने की जरुरत नहीं होती है।
  • यूलिप आपको अपने धन को जिस प्रकार चाहें उस प्रकार से चुन सकते हैं, इसकी पूरी आजादी होती है।
  • सामान्य बीमा योजनाओं के विपरीत, इसमें आप अपने प्रीमियम की राशि को बड़ा भी सकते हैं, अगर आप के पास अतिरिक्त धन होता है तो आप इसके द्वारा अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं।
  • यूलिप में निवेश के परिवर्तन का विकल्प (Switching Option) भी उपलब्ध होता है| यह आपको अपने निवेश को विभिन्न कोषों में स्विच करने का विकल्प देता है, जो कि आप अपने विवेक से बाजार के उतार चढ़ाव और अपने पसंद के अनुसार स्विच कर सकते हैं।

मेरी उज्जैन यात्रा में चाय-पान के दौरान एक चाय गुमटी का फ़ोटो.. अपनी मित्र मंडली के साथ चा-पान.. और गुमटी की विशेषता

मैं जब भी उज्जैन जाता हूँ तो अपने मित्रों के साथ दोपहर की चाय पीना वो भी गुमटी पर खड़े होकर नहीं भूलता हूँ, सबको फ़ोन करके बुला लेते हैं और चाय की गुमटी पर दोपहर के निश्चित समय पर सारे दोस्त इकट्ठे हो जाते हैं चा-पान के लिये।

इस दौरान मैंने गुमटी की एक विशेषता देखी थी जो मैं अपने ब्लॉग पर लगाना चाहता था, इस बार फ़ोटू खींच ही लाया, देखिये

26122009144604

सोनू टी स्टॉल क्या स्टाईल में लिखा है।

और ये रहे सोनू जी स्टॉल चलाने वाले -

26122009144625

इस फ़ोटो में एक और मजेदार बात देखिये कि दूध के तपेले को कैसे ढ़का गया है, अखबार के द्वारा। जब हमने बोला कि भई दूध में उबाल आ गया है अब इसको ढ़ंक दो तो उसने झट से अखबार हमारे हाथ से लिया और दूध के तपेले पर ढ़ंक दिया।

Tuesday, January 12, 2010

भाग २ - आपको यूलिप (ULIP) के बारे में क्या क्या पता होना चाहिए… ? यूलिप क्या होता है.. [What is ULIP.. Part 2]

यूलिप की विशेषताएँ -

   यूलिप बीमा और निवेश का संयोजन है। निवेशक के कुल निवेश में से एक भाग से जीवन की सुरक्षा प्रदान की जाती है और बची हुई पूरी राशी यूनिट फ़ंड में निवेश कर दी जाती है। यूलिप की राशि का यूनिट एक तत्व होती है। जैसे कि म्यूचयल फ़ंड में, वैसे ही बीमा कंपनियाँ यूलिप में निवेशकों को यूनिट आवंटित करती हैं और शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य (NAV) की दैनिक आधार पर घोषणा की जाती है। यूलिप में निवेश की गई राशि का प्रदर्शन आपके द्वारा चुनी गये कोष के ऊपर निर्भर करता है।

   यूलिप की कुछ अद्वितीय विशेषताएँ भी हैं, जो अन्य किसी निवेश उत्पाद में उपल्ब्ध नहीं होती है। यूलिप की कुछ विशेषताएँ -

  • टॉप अप सुविधा
  • स्विचिंग सुविधा (कोष को इक्विटी या डेब्ट में स्विच करना)
  • बीमा अवधि के दौरान, सुरक्षा के स्तर को कम या ज्यादा कर सकते हैं।
  • बीमा सुरक्षा आवरण बनाये रखने का विकल्प
  • निवेश को समय पूर्व निकास (Surrender Option)
  • राइडर्स विकल्प जो कि आपकी मुख्य पॉलिसी के विशेषताओं के साथ मिल सकता है, जो कि अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है।

यूलिप में निवेश राशि को विभिन्न प्रकार के कोषों में रखने का विकल्प

   ज्यादातर बीमा कंपनियाँ विभिन्न प्रकार के कोषों में निवेश रखने का विकल्प देती हैं, जिससे निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त कर सके और जिसमें कि समय और जोखिम आप खुद आपके निवेश के लिये तय कर सकते हैं। रिटर्न की राशि का सीधा संबंध आपकी जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करता है, क्योंकि यहाँ पर विभिन्न प्रकार के कोष हैं, जिसे निवेशक ही चुनता है। सामान्यत: जो कोष सबसे ज्यादा उपयोग किये जाते हैं वे इस प्रकार हैं -

  • इक्विटी कोष (Equity Funds)
  • संतुलित कोष(Balanced Funds)
  • फ़िक्स्ड ब्याज जौर बॉन्ड कोष(Income, Fixed Interest and Bond Funds)
  • नकद कोष(Cash Funds)

मैंने अपने ब्लॉग टेम्पलेट में कुछ बदलाव किये हैं, अब कैसा लग रहा है, आप भी सुझाव दें

   कल मैंने अपने ब्लॉग टेम्पलेट में कुछ बदलाव किये हैं, जैसे कि हेडर में “कल्पतरु” का लोगो लगाया है। मुख्य पोस्ट की जगह की चौड़ाई बढ़ाई है, साईड बार की चौड़ाई बढ़ाई है।

   मैं तीन कॉलम का टेम्पलेट लगाना चाहता था पर उसमें कुछ मुश्किलें आ रही थीं, फ़िर मैंने इसी एचटीएमएल में कुछ बदलाव कर इतना कर लिया। फ़िर लेफ़्ट याने कि उल्टे हाथ की तरफ़ भी एक छोटा सा साईडबार लगाना चाहता था, तो वह भी कर रहा था पर html स्क्रिप्ट में कुछ गड़बड़ी होने से वह नहीं हो पाया। कोई अगर मेरी सहायता कर पाये तो मुझे बहुत राहत मिल जायेगी।

   संगीता पुरी जी ने भी एक कमेंट किया था इस पोस्ट पर कि यह पोस्ट में नहीं साईड बार में होना चाहिये उसके लिये मैं एक विजेट ढूँढ़ रहा हूँ, जिससे यह कार्य भी आसान हो जाये।

Monday, January 11, 2010

भाग १ - आपको यूलिप (ULIP) के बारे में क्या क्या पता होना चाहिए… ? यूलिप क्या होता है.. [What is ULIP.. Part 1]

    यूलिप लेने पर बीमा धारक को प्रारंभिक वर्षों में ज्यादा पॉलिसी शूल्क देने पड़ते हैं। आबंटन प्रभार, फ़ंड प्रबंधन शुल्क, मोर्टेलिटि चार्जेस इत्यादि शुल्क यूलिप को महँगा बना देते हैं।  इसके अलावा बाजार में उतार चढ़ाव के कारण इसमें किये गये निवेश के शुरु के वर्षों में अपेक्षाकृत कम रिटर्न मिलता है। लेकिन धीरे धीरे शुल्क की संरचना से शूल्क कम होते जाते हैं, पहले तीन वर्षों में शुल्क ज्यादा कटते हैं। आईआरडीए ने यूलिप की फ़ीस का जो नया तरीका बनाया है जिससे यह और अधिक आकर्षक हो गई है। इसके अंतर्गत बीमा कंपनियाँ १० वर्ष से कम के बीमा निवेश पर ३% से ज्यादा, और १० वर्ष से ज्यादा के बीमा निवेश पर २.२५% से ज्यादा शुल्क नहीं ले सकती हैं। लंबी अवधि के बाद यूलिप से आप अपने निवेश पर अधिक से अधिक राजस्व प्राप्त करते हैं।

   जैसा कि हम सब लोग जानते हैं कि बाजार में निवेश के लिये वित्तीय उत्पाद आते ही जा रहे हैं। इन उत्पादों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है, १. जिससे उपभोक्ता को लाभ मिलता हो और २. जिससे एजेंट को लाभ मिलता हो। जैसे जैसे  वित्तीय उत्पादों की संख्या बाजार में बढ़ती जा रही है, वित्तीय उत्पाद खरीदना उतना ही जटिल होता जा रहा है, क्योंकि यह समझना बहुत मुश्किल होता जा रहा है कि कौन सा वित्तीय उत्पाद अच्छा है और कौन सा बुरा।

यूलिप क्या है -

   यूलिप का मतलब है यूनिट लिंक्ड बीमा योजना। यूलिप प्लॉन एक ऐसा वित्तीय उत्पाद है जो कि बीमे के द्वारा आपको सुरक्षा तो प्रदान करता ही है साथ में आपको निवेश का सुनहरा अवसर भी प्रदान भी करता है। यह एक अनूठा उत्पाद है जो कि आपकी बीमा और निवेश की आवश्यकताओं को एकीकृत रुप में उपलब्ध करवाता है। इसकी संरचना म्यूचयल फ़ंड के समान है, देखिये यह कैसे कार्य करता है -

  • आप बीमा कंपनी एक निश्चित आवधिक प्रीमियम भुगतान करते हैं।
  • प्रीमियम के एक हिस्से से आपको बीमा कवर दिया जाता है।
  • और बचा हुआ प्रीमियम इक्विटी या सुरक्षित बांड(Debt Market) में निवेश कर दिया जाता है।
  • बीमा धारक की मृत्यु की स्थिती में, बीमा राशि का भुगतान नोमिनी को कर दिया जाता है।
  • पॉलिसी की परिपक्वता पर पॉलिसी की परिपक्वता राशि बीमा धारक को प्रदान कर दी जाती है।

आज हमारे बेटे के लिये नया संगणक (PC) आ गया, आज तक केवल नमकीन, अचार ही उज्जैन से मंगाते थे पर आज संगणक भी वहीं से मँगवा लिया।

वैसे तो हम रह रहे हैं मुंबई में परंतु फ़िर भी कोई चीज लेनी होती है तो पहली कोशिश यही होती है कि उज्जैन से मँगवा लें, और अगर हम न जा पायें तो भी कोई सामान लाने की कोई परेशानी नहीं है, क्योंकि हमारे उज्जैन के मित्र आते जाते रहते हैं, तो आराम से अपना सामान आ जाता है, वैसे तो मुंबई से सामान लेने में कोई परेशानी नहीं है परंतु पहली बात बस यही मन में आती है कि यहाँ हर चीज बहुत महँगी है, जबकि अपने उज्जैन में सस्ती।

बस इसीलिये अपने बेटे के लिये पहले सोच रहे थे कि अपना लेपटॉप उसे देकर अपने लिये नया लेपटॉप ले लेंगे पर फ़िर परिवार वाले और मित्रगण बोले कि यह तो बड़ी अच्छी बात है पर अभी बेटा छोटा है इसलिये लेपटॉप देना ठीक नहीं, वैसे ही वह बहुत बड़ा इंजीनियर है। क्योंकि उसके लिये कोई भी खिलौना लेकर आओ तो सबसे पहले पलटकर कितने स्क्रू लगे हैं, और वो किधर से खुल सकता है यही देखता है। तो लेपटॉप का भी तिया पाँचा कर डालेगा इससे अच्छा है कि अपना लेपटॉप अपने पास रखो और उसे नया संगणक दिलवा दो।

फ़िर हमने संगणक की पड़ताल की, कि सस्ता कौन सा पड़ेगा तो हमारे बेटे को तो केवल पढ़ाई और गेम्स के लिये संगणक चाहिये था, इसलिये हमने अपने परम मित्र अंकल चित्तरंजन से मशविरा किया, ये हमारे मित्र हैं परंतु हम इन्हें अंकल ही बोलते हैं। वे बोले कि कॉन्फ़िगरेशन मैं बता देता हूँ आप वहीं से ले लो य फ़िर यहाँ से हम भी भेज सकते हैं, यहाँ पर भाव पता किये तो जो भाव हमें उज्जैन से अंकल ने दिये थे उससे कम से कम २५% ज्यादा भाव यहाँ मिल रहा था, तो आखिरकार हमने सोचा कि अब तो उज्जैन से ही मँगवाते हैं। तो बस हमने उन्हें बोल दिया और आज हमारे बेटे के लिये नया संगणक आ गया।

कल शाम को उज्जैन से हमारे मित्र नितिन अपने परिवार के साथ मुंबई आ रहे थे तो हमने उनके साथ बुलवा लिया और यहाँ पर बोरिवली जाकर अवन्तिका एक्सप्रेस से ले लिया। घर आकर सबसे पहले हमने संगणक को खोला और दर्शन किये कि हाँ कैसा दिखता है, जल्दी ही फ़ोटू भी डालेंगे।

वैसे हम उज्जैन से आमतौर पर नमकीन, अचार इत्यादि मंगवाते ही रहते हैं। क्योंकि हमें तो बस उज्जैन की नमकीन ही अच्छी लगती है, और कभी इंदौर से कोई मित्र आ रहा होता है तो प्याज के सेंव मँगा लेते हैं। आखिरकार अपना स्वाद तो वहीं का है, तो फ़िर कुछ भी हो अपने को तो बस उज्जैन की ही चीज अच्छी लगती है।

Sunday, January 10, 2010

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग ७ (What is Term Insurance…) Part 7

टर्म जीवन बीमा योजना लेने के लिये जो राशि आपने खर्च की है उस राशि पर आपको आयकर की धारा ८०(सी) के तहत छूट मिल जायेगी।

और बची हुई राशि जो कि आमतौर पर हम लोग इंश्योरेन्स के लिये निवेश करते हैं, उसे अच्छे म्यूचयल फ़ंड में या अच्छे शेयर में निवेश करें, तो आपको लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलेंगे।

टर्म इंश्योरेन्स के बारे में पूरा पढ़ने के लिये पिछली पोस्टें देखें, पोस्टों पर जाने के लिये नीचे लिंक दी गई है, चटका लगाईये -

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग १ (What is Term Insurance…) Part 1

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग २ (What is Term Insurance…) Part 2

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग ३ (What is Term Insurance…) Part 3

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग ४ (What is Term Insurance…) Part 4

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग ५ (What is Term Insurance…) Part 5

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग ६ (What is Term Insurance…) Part 6

 

संबंधित चिट्ठे पढ़ें -

कभी आपकी भी इच्छा होती है कि अगर यह मेल हिन्दी में होती तो बात ही कुछ और थी, जीमेल के ट्रांसलिशन टूल से अब यह भी संभव है किसी भी भाषा में अनुवाद करॆं…

मैं कई बार मेल पढ़ता हूँ तो आंग्ल भाषा के कुछ शब्दों का अर्थ समझ में नहीं आता है तो फ़िर अलग से विन्डो खोलकर या तो गूगल ट्रांसलेशन सेवा में जाना पड़ता है या फ़िर शब्दकोश में। पर अब हमारी इस समस्या का समाधान गूगल ने जीमेल में ही एक लैब फ़ीचर से दे दिया है, किसी भी भाषा से किसी भी भाषा में अनुवाद। देखिये कैसे होता है यह -

१. मेरे पास आंग्लभाषा में मेल आया -

image1

यहाँ पर जो गोला बना हुआ आपको दिख रहा है English to Hindi और उसके आगे लिखा है View Translated Message बस इस पर क्लिक कीजिये और हिन्दी में मेल का अनुवाद आ जाता है।

२. अनुवादित मेल देखिये -

image2

अगर आप यहाँ पर वापस से आंग्लभाषा में मेल चाहते हैं तो View original message पर क्लिक करें, मेल आंग्लभाषा में उपलब्ध होगा।

३. इस अनुवाद सेवा के फ़ीचर को शुरु कैसे करें -

image3

जीमेल की विन्डो में सीधी तरफ़ कोने में Settings के पास हरे रंग का जो जार दिखाई दे रहा है यह है जीमेल लेब का बटन उस पर क्ल्कि करें और फ़िर आपको बहुत सारे लेब फ़ीचर्स दिखाई देंगे, अनुवाद सेवा को शुरु करने के लिये निम्न लेब फ़ीचर को Enable करें और सबसे नीचे जाकर Save Changes पर क्लिक करें।

image4

तो पढ़ते रहिये अपनी भाषा में मेल।

Saturday, January 09, 2010

टर्म इंश्योरेन्स क्या होता है.. भाग ६ (What is Term Insurance…) Part 6

जब टर्म जीवन बीमा योजना का चुनाव करें तो इन बातों का ध्यान रखना चाहिये -

१. सबसे पहले यह समझ लेना चाहिये कि टर्म जीवन बीमा योजना क्या होती है, इसके क्या लाभ होते हैं, यह कैसे कार्य करती है वगैरहा।

२. सभी जीवन बीमा कंपनियाँ एक जैसी नहीं होती हैं सबकी वित्तीय स्थिती अलग अलग होती हैं, जिस भी कंपनी का जीवन बीमा लेने जा रहे हैं पहले बाजार में उसकी वित्तीय स्थिती का आकलन कर लें, उसकी बाजार में प्रतिष्ठा कैसी है, वह किस समूह से ताल्लुक रखती है इत्यादि।

३.  आम जीवन बीमा से टर्म जीवन बीमा बहुत सस्ता होता है। यह सस्ता इसलिये होता है कि ये योजनाएँ इस तरह से तैयार की गई हैं कि आप एक निश्चित अवधि के लिये ही बीमित होते हैं। अगर आप अपनी पूरी जिंदगी अपने जीवन का बीमा चाहते हैं और भुलक्कड़ हैं तो टर्म जीवन बीमा योजना आपके लिये नहीं है, आप साधारण जीवन बीमा ही लें।

४. टर्म जीवन बीमा योजना बहुत बढ़िया है अगर आप अपने परिवार और घर के लिए मृत्यु के बाद की सुरक्षा चाहते हैं। अगर आप के पास गृह ऋण है तो आप केवल ऋण राशि का भी टर्म जीवन बीमा करवा सकते हैं। जिससे अगर समय के पहले गृह स्वामी की मौत की स्थिती में बीमित के परिवार को अपना घर नहीं गँवाना पड़ेगा। बीमा कंपनी बीमित की मौत की स्थिती में पूरा गृह ऋण चुका देगी।

५. हमेशा ऐसी योजना देखे जिसमें नवीनीकरण की गारंटी हो, मतलब कि अगर भविष्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या अगर हो जाये तो बीमा कंपनी नवीनीकरण के लिये इंकार न कर दे। अगर आप इस तरह की गारंटीकृत नवीनीकरण वाली योजना खरीदते हैं तो अगर भाविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर भी आपका बीमा नवीनीकरण किया जा सकेगा।

६. परिवर्तनीय योजनाओं वाला जीवन बीमा खरीदें, अगर भविष्य में कोई और अच्छी योजना आती है तो आप अपनी इस जीवन बीमा योजना को उस योजना के लिये स्विच कर पायें, अगर किसी टर्म जीवन बीमा योजना में यह सुविधा उपलब्ध होती है तो वही लेना चाहिये, नहीं तो आपको वही योजना पूरी बीमा अवधि  रखनी होगी।

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