बिगड़े हुए चेहरेमैं कब तक देखूँ,जब तक बिगाड़ने वालों की शिनाख्त नहीं हो जातीसुन्दर रचना
अच्छा प्रयास,आभार.
यदि सहना सम्भव न हो तो कहना श्रेयस्कर है ।
वाकई काफी बार मज़बूरी में न चाहते हुए भी काम करने पड़ते है
आपकी बहुमूल्य टिप्पणी दीजिये
बिगड़े हुए चेहरे
ReplyDeleteमैं कब तक देखूँ,
जब तक बिगाड़ने वालों की शिनाख्त नहीं हो जाती
सुन्दर रचना
अच्छा प्रयास,आभार.
ReplyDeleteयदि सहना सम्भव न हो तो कहना श्रेयस्कर है ।
ReplyDeleteवाकई काफी बार मज़बूरी में न चाहते हुए भी काम करने पड़ते है
ReplyDelete