Thursday, January 21, 2010

मुंबई से चैन्नई की उड़ान यात्रा और कुछ अनुभव.., बादलों के बीच में उड़ना जैसे कि देवलोक में आ गये हों

    कल सुबह हम अपने एक प्रोजेक्ट के लिये थोड़े दिनों के लिए चैन्नई आये हैं, सुबह ७.०५ की उड़ान थी हमारी मुंबई से चैन्नई के लिये। विमान था इंडियन एयरलाईन्स का हमें लगा सरकारी है खटारा ही होगा, पर जब विमान ने उड़ान उड़ी आशाओं के विपरीत विमान तो बहुत ही अच्छी श्रेणी का निकला, खैर फ़िर जब उड़े तो पहुँच गये बादलों के देश में उससे पहले खिड़की से नजारा देखा तो पूरी मुंबई एक जैसी ही नजर आ रही थी, पहचान नहीं सकते थे कि कौन सी जगह है। बादलों के देश में एक तरफ़ से सूर्य भगवान थे तो लोगों ने अपने खिड़कियों के शटर गिरा लिये। हम दूसरी तरफ़ थे तो बादलों को देख रहे थे, ऐसा लगा कि हम कहीं देवलोक में आ गये हों। या ये सब कोई रुई के पहाड़ हों।

    जैसे कि धरती पर हम लोग एक जमीन के टुकड़े की खरीद फ़रोख्त करते रहते हैं, वैसे ही ये लोग भी अपनी इस बादलों की दुनिया के लिये करते होंगे और हम मानव उनकी दुनिया में अपना विमान घुसाकर उन्हें परेशान करते होंगे। तो यहाँ के प्राणियों को भी तकलीफ़ होती होगी, तभी हमारा नाश्ता आ गया, जो शायद टिकिट पर नहीं लिखा था खैर हमें तो जबरदस्त भूख लगी थी, क्योंकि सुबह ४ बजे के उठे थे, हालांकि घर से हलका नाश्ता कर लिया था, पर फ़िर भी।

    विमान परिचारिका आयी और हमारे सीट में से एक टेबल नुमा चीज निकाली और पूछा कि वेज या नॉनवेज, तो हमने अपनी पसंद वेज बतायी और उसने वेज नाश्ता रख दिया, जिसमें इडली बड़ा सांभर, ब्रेड, कुछ कटे हुए फ़ल, निंबु पानी, चाय के लिये कप और एक पानी की छोटी बोतल। नाश्ता कर लिया पेटपूजा हो गई, फ़िर वही परिचारिका आकर नाश्ते की प्लेट ले गयी, चूँकि नाश्ते की प्रक्रिया के लिये बहुत ही सीमित समय होता है, तो विमान की सारा स्टॉफ़ बहुत ही मुस्तैदी से कार्य कर रहा था। जैसे ही उन लोगों ने नाश्ते की प्लेट्स ली सभी से वैसे ही कैप्टन का मैसेज आ गया कि आप चैन्नई कामराज विमानतल पर उतरने वाले है और फ़िर मौसम की जानकारी दी गई।

    बाहर निकले अपना बैग कन्वेयर बेल्ट से उठाया। और चल पड़े प्रीपैड टेक्सी के लिये क्योंकि हमें बताया गया था कि यहाँ पर कुछ भी मीटर से नहीं चलता है। सब जगह जबरदस्त मोलभाव करना पड़ता है। करीब १ घंटा लगा हमें अपने गंतव्य पहुंचने में क्योंकि चैन्नई में ट्राफ़िक की रफ़्तार बहुत ही सुस्त है। और तापमान लगभग मुंबई जैसा ही है।

12 comments:

  1. म्रत्यु से देवलोक और फिर मृत्युलोक तक सकुशल पहुँचने के लिए बधाई और वापसी की भी इसी मार्ग से शुभकामनाएं !

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  2. बढ़िय यात्रा वृतांत रहा...छोटी दूरी की यात्रा इतनी फटाक से हो जाती है कि पता ही नहीं लगता.

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  3. चे्न्नई एयरपोर्ट से शहर आते समय टैक्सी 800से1000 लेती है और शहर से एयरपोर्ट 300मे पहुंचा देती है। कमाल का शहर है।



    कब तक युवा रहेगा बसंत?

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  4. वाह ये तो मजेदार रही आपकी हवाई यात्रा , अब जमीनी यात्रा अजी चेन्नई भ्रमण के बारे में कुछ हो जाए क्या ख्याल है
    अजय कुमार झा

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  5. @ललित जी - अगर आप प्रीपैड टैक्सी लेते हैं तो कम से कम आपको लुटने का डर तो नहीं रहता, हमें तो इतने रुपये नहीं लगे।

    @अजय जी - बस इंतजार कीजिये जमीनी यात्रा भी शुरु करेंगे अगर समय मिल पाया तो।

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  6. बढ़िया लगा आपका यात्रा वृतांत ..

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  7. हवाई यात्रा का अनुभव अपने आप में एक ख़ास अनुभव होता है।
    अच्छा वृतांत।

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  8. देखिये, कब मुलाकात होती है आपसे.. :)

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  9. आजा मैं हवाओं में उठा के ले चलूं तू ही तो मेरा दोस्त है ..... ।

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