ब्लॉग पर विज्ञापनों के लिये प्रयोग जारी है, अगर आपको ब्लॉग पढ़ने में कोई परेशानी आ रही हो तो कृप्या टिप्पणी करें।

Wednesday, September 30, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – ३२

गाढोत्कण्ठाम़् – विरह वेदना से उत्पन्न प्रिय या प्रिया से मिलन की उत्कट इच्छा ही उत्कण्ठा कहलाती है। उत्कण्ठा का लक्षण इस प्रकार है -
रागेष्वलब्धविषयेषु वेदना महती तु या।
संशोषणी तु गात्राणां तामुत्कण्ठां विदुर्बुधा:॥
अर्थात जिससे प्रेम हो उसके न मिलने पर मन में ऐसी वेदना होने लगती है कि जिससे शरीर सूखता जाता है, उसे उत्कण्ठा कहते हैं।


बालाम़् -  षोडशी नवयुवती को कहते हैं। स्त्रियाँ १६ वर्ष तक बाला, ३० वर्ष तक

Tuesday, September 29, 2009

ब्लॉगवाणी वापिस शुरु हिन्दी ब्लॉगरों को शुक्रिया अदा करना चाहिये…. धन्यवाद मैथिलीजी

आज सुबह मैं अपने ब्लॉग पर ही विचरण कर रहा था कि एकाएक ब्लॉगवाणी का कोड वापिस से नजर आ गया और फ़िर ब्लॉगवाणी साईट खोली तो वापिस से वह अपनी जगह पर अपनी नई पोस्टों के साथ हमारा मुस्कराकर अभिवादन कर रही थी।


बधाई हो ब्लॉगवाणी के संचालको आपको कि आपने हिन्दी के प्रति प्रेम और सम्मान प्रदर्शित किया और हिन्दी ब्लॉगजगत के आव्हान पर आप वापिस से ब्लॉगवाणी को ले आये। आपको बहुत बहुत धन्यवाद।

एक विनम्र निवेदन है कि ऐसे बुरा न मानें यह तो समाज है और इसमें हरेक तरह के लोग होते हैं अगर गुण्डे न होंगे तो पुलिस की जरुरत ही न होगी उससे पता नहीं कितने लोगों की रोजी रोटी पर असर पड़ेगा। कृप्या अपना बड़्प्पन बनाये रखें।


ब्लोगवाणी का ब्लॉग पढ़ें।





कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – ३१

कलबतनुताम़् – यहाँ कलभ को उपमान बनाया गया है; क्योंकि कलभ और मेघ दोनों में ऊँचाई तथा वर्ण की समानता है तथा मेघ इच्छानुसार रुप धारण करने वाला है। यहाँ तनु का अर्थ शरीर न लेकर छोटा लिया गया है। बत्तीस साल की उम्र वाले हाथी के बच्चे को कलभ


Monday, September 28, 2009

ओहो ब्लॉगवाणी बंद हो गया पर हमारी क्या गलती थी….

                   आज सुबह उठकर ब्लॉगवाणी साईट खोली, नये हिन्दी चिट्ठे पढ़ने के लिये पर ये क्या ये तो अलविदा का सन्देश ब्लॉगवाणी के तंत्रजाल पर। कल ही किसी महाशय की पोस्ट पढ़ी थी जिसमें ब्लॉगवाणी  की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाये गये थे, पोस्ट पढ़कर बुरा तो लगा कि इन महाशय को शायद ब्लॉगवाणी का हिन्दी चिट्ठों के प्रति योगदान पता नहीं होगा इसलिए यह उसके और उसके पीछे जुड़ी टीम की मेहनत को नजर अंदाज कर रहे हैं। ब्लॉगवाणी साईट के मालिकों ने कभी भी इसका उपयोग अपने व्यावसायिक गतिविधियों के लिये नहीं किया, केवल हिन्दी के प्रति प्रेम और हिन्दी के प्रति सम्मान और जन जन ब्लॉगरों के बीच में से एक लेखक का निकालना ही उनका यह हिन्दी एग्रीगेटर चलाने का उद्देश्य था। पर कुछ नासमझ हमारे ही भाई बंद लोग उनकी गतिविधियों के पीछे पड़ गये जैसे वे उनके घर की मुर्गी हो जिसे कुछ भी बोल सकते हों या उनका चिट्ठे को कुछ व्यावसायिक नुकसान हो रहा हो।

                अब इन नासमझ लोगों को क्या कहें कि वाणी से कुछ भी किया जा सकता है अगर मीठी होगी तो सब आपके पास आयेंगे और बुरी होगी तो सब दूर भागेंगे। केवल शब्द की जादूगरी से बनती हुई बात को बनाया जा सकता है और बिगाड़ा भी जा सकता है। मेरा ब्लॉगवाणी के संचालकों से विनम्र निवेदन है कि इन जैसे ब्लॉगरों को नजरअंदाज कर अपने हिन्दी के प्रति प्रेम और सम्मान को बनाये रखें और इस बेहतरीन हिन्दी ब्लॉग एग्रीगेटर को शुरु कर इसे इतिहास का पन्ना न बनने दें।


alvidablogvaani

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – ३०

रक्ताशोक: – अशोक दो प्रकार का होता है - (१) श्वेत पुष्पों वाला, (२) लाल पुष्पों वाला। रक्ताशोक का प्रयोग यहाँ साभिप्राय है; क्योंकि रक्ताशोक कामोद्दीपक होता है; अत: प्रेमी लोग अपने घरों में रक्ताशोक को लगाते हैं। कवि प्रसिद्धि के अनुसार किसी सुन्दर युवती के बायें पैर के प्रहार से अशोक वृक्ष में पुष्प निकलते हैं।


केसर: – अशोक वृक्ष की तरह केसर वृक्ष को भी कामोद्दीपक

Sunday, September 27, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २९

दिनकरहयस्पर्धिन: - (सूर्य के घोड़ों से प्रतिस्पर्धा करने वाले) अलकापुरी के घोड़े पत्तों के समान हरे वर्ण वाले हैं। क्योंकि सूर्य के घोड़े भी हरे वर्ण के माने जाते हैं, अत: अलकापुरी के घोड़े रंग में भी तथा वेग में भी सूर्य के घोड़ों से स्पर्धा करते हैं।


प्रत्यदिष्टाभरणरुचय: – आभूषणों की अभिलाषा छोड़े हुए । वीर योद्धाओं का आभूषण शक्तिशाली शत्रु के प्रहार से हुए घाव के निशान होते हैं, स्वर्ण आदि के आभूषण नहीं। अलका के योद्धा रावण की तलवार

Saturday, September 26, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २८

गत्युत्कम्पात़् – कमिनियाँ अपने प्रियतमों के पास अभिसार के लिये शीघ्रतापूर्वक जाती हैं, क्योंकि एक तो रात्रि का भय दूसरे किसी को उनके जाने का पता न चल जाये। इसलिये शरीर के हिलने-डुलने से उनके केशपाश में लगे अलंकरण आदि मार्ग में गिर जाते हैं, जिससे यह सूचित हो जाता है कि अभिसारिकाएँ इस मार्ग से गयी हैं।


पत्रच्छेदै: – पत्तों के टुकड़ों से – इससे सिद्ध होता है कि स्त्रियाँ प्राचीन काल में अपने श्रंगार प्रसाधन में फ़ूल-पत्तियों का उपयोग करती थीं।


कामिनीनाम़् – साधारणत: तरुणी और सुन्दर स्त्री को कामिनी कहते हैं। किन्तु यहाँ पर अतिशय काम से पीड़ित स्त्री अर्थ ग्राह्य है, क्योंकि कामश्चाष्टगुण: स्मृत: स्त्रियों का काम वेग पुरुषों की अपेक्षा आठ गुना होता है, चाणक्य की इस उक्ति के अनुसार स्त्रियों को कामिनी कहते हैं। इसलिए इसका अर्थ यहाँ अभिसारिकायें हैं। अभिसारिका दो प्रकार की होती हैं, अपने पास प्रियतम को बुलाने वाली और दूसरी स्वयं प्रियतम के पास जाने वाली, यहाँ पर दूसरी प्रकार की अभिसारिका दृष्टिगोचर होती है।


सकलमबलामण्डनम़् - (सम्पूर्ण स्त्रियों की प्रसाधन सामग्री को) भाव यह है कि अकेला कल्पवृक्ष ही वहाँ की स्त्रियों के लिये समस्त प्रसाधन सामग्री प्रस्तुत कर देता है। यह प्रसाधन सामग्री चार प्रकार की बतायी है। रसाकर के अनुसार -
कचधार्यं देहधार्यं परिधेयं विलेपनम़्।
चतुर्धा भूषणं प्राहु: स्त्रीणां मन्मथदैशिकम़्॥
अर्थात कचधार्य, देहधार्य, परिधेय और विलेपन – ये चार प्रकार की है। पुष्पोद़्भेदम़् (कचधार्य) [केशों में धारण करने योग्य], मधु तथा भूषणानां विकल्पान (देहधार्य) [शरीर पर धारण करने योग्य], चित्रं वास: (परिधेय) [पहने जाने वाला], लाक्षारागम़् (विलेपन) [लेप किया जाने वाला]। इस प्रकार ये स्त्रियों के काम के उपदेशक चार प्रकार के अलंकार होते हैं।

Friday, September 25, 2009

एक कार्टून - हाँ जी मैं एक साधारण सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हूँ ।

आज मुझे एक चेन ईमेल मिला जिसमें यह बहुत ही अच्छा कार्टून मिला है आप भी देखिये -



चित्र बड़ा करने के लिये चित्र पर क्लिक करें।

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २७

नीवीबन्धोच्छ्वसितशिथिलम़् – अधोवस्त्र की गांठ के खुल जाने के कारण ढीला। नीवी का अर्थ स्त्रियों के नीचे के वस्त्र की गांठ होता है तथा नीवी अधोवस्त्र को भी कहते हैं।


बिम्बाधराणाम़् – बिम्ब फ़ल के समान (लाल) ओष्ठ वाली स्त्री को बिम्बाधरा कहते हैं। अथवा प्रियतम के बार-बार चुम्बन

Thursday, September 24, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २६

कुसुमशरजात़् – कामदेव के धनुष का दण्ड इक्षु से बना माना जाता है तथा प्रत्यञ्चा काले काले भौरों की श्रेणी से तथा उससे छोड़े जाने वाले वाण पाँच माने जाते हैं


इष्टसंयोगसाध्यात़् – अलका निवासी ज्वरादि से पीड़ित नहीं होते थे और यदि वे किसी से पीड़ित होते थे तो काम जन्य सन्ताप से

Wednesday, September 23, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २५

उन्मत्तभ्रमरमुखरा: – अलकापुरी में वृक्षों पर सभी ऋतुओं में सदा पुष्प विकसित रहते हैं, इसीलिये भ्रमर भी नित्य उन पर गुञ्जारते रहते हैं।


पादपा नित्यपुष्पा: – यद्यपि वृक्षों पर समय-समय पर पुष्प विकसित होते हैं परन्तु वहाँ अलकापुरी में वृक्ष सदा पुष्पों से युक्त रहते हैं।


हंसश्रेणीरचितरशना – हंस कमलनाल खाते हैं, अलकापुरी में कमलनियों पर

Tuesday, September 22, 2009

जुहु पटाटी !!

हमने अपने परिवार के साथ जुहु चौपटी घूमने जाने का कार्यक्रम बनाया और साथ मै अपने मित्र से भी पूछा और वे भी हमारे साथ आ गये। हमारे बेटेलाल की जबान पर चौपाटी शब्द चढ़ नहीं रहा था वो बार-बार पटाटी बोल रह था। हमें भी उसकी ये नई शब्दावली अच्छी लगी, कि जुहु

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २४

हलभृत इव – बलराम गौरवर्ण के थे और वे नीले वस्त्र धारण करते थे। जब वे कन्धे पर नीला दुपट्टा रखते थे तो और भी सुन्दर प्रतीत होते थे। इसी की कल्पना कवि ने की है कि कैलाश पर्वत श्वेत है और उस पर काला मेघ बलराम की शोभा को धारण कर लेगा।


हेमाम्भोजप्रसवि – यह मान्यता है कि गंगा आदि के दिव्य जलों में स्वर्णकमल

Monday, September 21, 2009

जलती हुई कार पर एक आटोवाले का विश्लेषण !!

कल मतलब कि इस रविवार याने कि २० सितम्बर को हम अपने परिवार के साथ जुहु पटाटी (इसको हम बाद मैं बतायेंगे) गये थे। विले पार्ले से अपने घर ऑटो से आ रहे थे, गोरेगाँव में वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर जाम लगा हुआ था, ट्राफ़िक सुस्त रफ़्तार से बढ़ रहा था। बस ये पता चल रहा था कि सड़क पर किसी गाड़ी में आग

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २३

बलिनियमनाभ्युद्यतस्य विष्णो: – बलि प्रह्लाद का पौत्र तथा विरोचन का पुत्र था। वह असुरों का राजा था तथा दानशीलता के लिये प्रसिद्ध था। विष्णु वामन का अवतार लेकर ब्राह्मण के वेश में बलि के यहाँ पहुँचे और तीन पग पृथ्वी की याचना की और बलि के स्वीकार कर लेने पर पहले पग में पृथ्वी और दूसरे

Sunday, September 20, 2009

झाबुआ की कुछ यादें नवरात्र गरबा डांडिया की….

          झाबुआ छोड़े हुए काफ़ी समय हो गया लगभग १४ वर्ष परंतु नवरात्र की बात याद आते ही अकस्मात ही झाबुआ की यादें आ जाती हैं क्योंकि उन दिनों हम कालेज में थे और अपना दोस्तों का दायरा भी अच्छाखासा था। नवरात्र शुरु होने के १०-१५ दिन पहले से ही

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २२

त्रिपुरविजय: – पुराणों के अनुसार मय नामक राक्षस ने आकाश, अन्तरिक्ष और पृथ्वी पर सोने, चाँदी, और लोहे के तीन नगर बनाये थे। त्रिपुर में स्थित होकर विद्युन्माली, रक्ताक्ष और हिरण्याक्ष देवताओं को सताने लगे। इसके बाद देवताओं ने शिव से प्रार्थना की। शिव ने देवताओं की प्रार्थना से उन दैत्यों पर वाणों की वर्षा की, जिससे वह निष्प्राण होकर गिर पड़े। मय राक्षस ने त्रिपुर में स्थित सिद्धाऽमृत रस

Saturday, September 19, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २१

शुभ्रत्रिनयनवृषोत्खातपड़्कोपमेयाम़् – बैल आदि जब सींगों से मिट्टी आदि को उखाड़्ते हैं तब उसे उत्खातकेलि कहते हैं। यहाँ कवि ने कल्पना की है कि श्वेत हिम युक्त हिमालय पर स्थित काला मेघ ऐसा लगता है जैसे शिव के नन्दी बैल, ने जो कि श्वेत है, अपने ऊपर उखाड़ी हुई कीचड़ डाल दी हो।

                          यहाँ महाकवि ने शिव के लिए त्रिनयन शब्द का प्रयोग कर एक कथा की ओर संकेत किया है यह कथा महाभारत के अनुशासन पर्व

Friday, September 18, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – २०

वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड अ. ३९-४० के अनुसार राजा सगर ने इन्द्र पद प्राप्ति के लिये अश्वमेध यज्ञ प्रारम्भ किया, परन्तु पर्व के दिन इन्द्र ने राक्षस का रुप बनाकर अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को चुराकर पाताल में कपिल मुनि के आश्रम में बाँध दिया। सगर के साठ हजार पुत्र घोड़े को खोजते हुए कपिल मुनि के आश्रम में पहुँचे और उनको ही उस अश्व का चोर

Thursday, September 17, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १९

कौरवं क्षेत्रम़् – कुरुक्षेत्र थानेसर से दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। शतपथ ब्राह्मण में भी इसे धर्मक्षेत्र कहा गया है। यहाँ सूर्यकुण्ड या ब्रह्मसर नाम का तालाब है। जिस पर सूर्य ग्रहण के अवसर पर धार्मिक मेला लगता है। महाभारत का युद्ध भी इसी क्षेत्र में हुआ था।


गाण्डीव अर्जुन के धनुष का नाम है।  कहा जाता है कि यह धनुष सोम ने वरुण को तथा वरुण ने अग्नि को दिया था। खाण्डव को जलाने के समय अग्नि से

Wednesday, September 16, 2009

आखिर काला अक्षर भैंस कब तक रह पायेगा, हिन्दी दिवस पर विशेष, कृप्या बिहारी लोग बुरा न मानें.....!!

आज ही हमें एक ईमेल प्राप्त हुआ जो कि विशेषत: बिहारियों के लिये आया था - बिहार में साक्षरता अभियान - Literacy Campaign in Bihar.

कृप्या बिहारी लोग बुरा न माने उनकी सभी भैसें अपनी जगह सुरक्षित हैं यह नई भैंसे

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १८

शाड़र्गिण: वर्णचौरे – कृष्ण के धनुष का नाम शाड़र्ग है, इसलिये उसे शाड़र्गी कहते हैं। कृष्ण का वर्ण श्याम है तथा मेघ का वर्ण भी श्याम है; अत: उसे कृष्ण के वर्ण को चुराने

Tuesday, September 15, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १७

हुतवहमुखे सम्भृतम़् – यह तेज का विशेषण है अर्थात तारकासुर के वध के लिये देवताओं की प्रार्थना पर महादेव ने अपने वीर्य को पार्वती में आधान किया, जब वे उसको धारण करने में समर्थ न हुई तो उन्होंने अग्नि के मुख में रख दिया। इसी कथा की ओर महाकवि कालिदास ने

Monday, September 14, 2009

स्पार्क चेवरलेट कार केवल १ लाख २० हजार रुपये में नैनों से भी सस्ती….

आप भी सोच रहे होंगे कि ये स्पार्क चेवरलेट कार केवल १ लाख २० हजार रुपये में कैसे आ सकती है जबकि उसकी वास्तविक कीमत लगभग ३ लाख रुपये है और नैनों से सस्ती कैसे है ?
स्पार्क चेवरलेट अब लाई है एक नई स्कीम मुंबईवासियों के लिये

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १६

प्राप्त्तवानीरशाखम़् – ग्रीष्म ऋतु आने पर नदी का प्रवाह कम हो जाता है और किनारे छोड़ देता है, किन्तु फ़िर भी झुकी हुई बेंत की शाखायें उसका स्पर्श किये रहती हैं।
सलिलवसनम़् – यहाँ कवि ने कल्पना की है कि जिस प्रकार कोई प्रियतम नवयुवती के नितम्बों से वस्त्र खिसकता है और वह नवयुवती उस वस्त्र को अपने हाथों में पकड़ लेती है

Sunday, September 13, 2009

घर में घरवाली के हाथ की जलेबी…..म्म्म्म़् और अपने हाथ के पोहे, आनंद ही कुछ और है….

अभी हम कुछ दिन पहले समान खरीदने रिलायंस फ़्रेश गये थे तो वहीं गिट्स का जलेबी पैक दिखाई दे गया जिसके साथ जलेबी मेकर फ़्री था बस हम वह पैक घर पर ले आये। तो हमारी घरवाली ने बस हमारा सिर ही नहीं फ़ोड़ा इतना तेज गुस्सा आ रहा था उनको, पर चलो आज उनका मूड बनाया कि तुम जलेबी बनाओ और पोहे हम बनाते हैं, क्योंकि हमें ऐसा लगता है

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १५

चिरविलसनात्खिन्न्विद्युत्कलत्र: - विलसन का सामान्य अर्थ चमकना है, परन्तु यहाँ विद्युत को मेघ की पत़्नी कहा है। इसलिए इसका अर्थ रतिक्रीड़ा करना, इठलाना, आदि भी किया जा सकता है अर्थात जिस प्रकार पत़्नी अपने पति की गोद में लेटकर, इठलाती रहती है और काम क्रीड़ा को बढ़ाकर, उसमें सहयोग कर, फ़िर थक कर सो जाती है, उसी प्रकार विद्युत भी इठलाकर तुम्हारी काम-क्रीड़ा बढ़ाक

Saturday, September 12, 2009

लगता है कि नवभारत टाइम्स ने न सुधरने की कसम खा रखी है या ये लोग हिन्दी को मजाक समझते हैं..

बहुत दिनों से नियमित ही मात्राओं की गलतियाँ, नवभारत टाइम्स में देखने को मिलती हैं पर लगातार दो दिन गलतियाँ मतलब नवभारत टाइम्स में ही कहीं कोई समस्या है, ये लोग हिन्दी को गंभीर रुप से नहीं लेते हैं और बिना प्रूफ़ रीडिंग के प्रिंट प्रोडक्शन में डाल देते हैं।
कल के नवभारत टाइम्स में मुख्य पृष्ठ में “राहुल की सादगी”

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १४

सृष्टि संहार के समय शिव द्वारा किया जाने वाला नृत्य प्रसिद्ध है, उसे ताण्डव नृत्य कहते हैं। नाट्यशास्त्रियों ने नृत्य और नृत्त में अन्तर किया है। दशरुपक में लिखा है - “अन्यद़् भावाश्रयं नृत्यं नृत्तं ताललयाश्रयम़्” अर्थात़् भाव पर आश्रित अंगसञ्चालन नृत्य कहलाता है तथा ताल व लय पर आश्रित हस्त-पाद के सञ्चालन को नृत्त कहते हैं।
पशुपते: – पशु के स्वामी। यहाँ पशु से अभिप्राय सामान्य पशु से नहीं है, अपितु शैव दर्शन के अनुसार

Friday, September 11, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १३

कण्ठच्छवि: – कण्ठ के समान कान्ति वाला, यह विशेषण मेघ के लिये आया है। कहने का आशय यह है कि क्षीर सागर के मंथन के समय कालकूट नामक विष भी निकला था, जिसका पान शिव ने किया था। परिणामत: उनका कण्ठ विष के प्रभाव से नीला पड़ गया था। इसी कारण उन्हें नीलकण्ठ भी कहा जाता है।
चण्डिश्वरस्य पुण्यं धाम – यह कहने का अभिप्राय उज्जयिनी पुरी में स्थित महाकाल मंदिर

Thursday, September 10, 2009

ताऊ.इन पर मेरा याने कि विवेक रस्तोगी का साक्षात्कार आज दोपहर ठीक ३.३३ पर और एक छोटी सी बात

आज हमारा साक्षात्कार प्रकाशित होगा दोपहर ठीक ३.३३ पर ताऊ रामपुरिया के ब्लॉग पर, आईये हमसे मिलिये और जानिये हमारे बारे में।
हम अभी मेघदूतम और कालिदास पर एक श्रंखला लिख रहे हैं, क्योंकि मेरा सोचना था कि इन बातों को आम लोगों के लिये सहज रुप में यह जानकारी उपलब्ध होना चाहिये। इसके बाद मैं शिवाजी सामंत के ऐतिहासिक उपन्यास “मृत्युंजय” दानवीर कर्ण की जीवन गाथा

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १२

प्रार्थनाचाटुकार: – प्रिया के रमण करने से थक जाने पर प्रेमी फ़िर रमण करने के लिये उसकी खुशामद करता है, मीठी-मीठी बातें करता है तथा थकान को दूर कर शरीर में ताजगी उत्पन्न करता है, उसी प्रकार शिप्रा नदी का पवन प्रेमियों के समान रमणियों की सम्भोग-थकान को दूर कर रहा है।
खण्डिता नायिका – जो पति के चरित्र पर सन्देह करती है

Wednesday, September 09, 2009

मुंबई में नहीं सुधरा तो वो आदमी कहीं भी नहीं सुधर सकता – एक ऑटो वाले का डायलॉग

कल हम ऑफ़िस से आ रहे थे तो जिस ऑटो में हम आये वह एक जौनपुरी ड्रायवर चला रहा था। हम हमारे मित्र जो कि हमारे साथ ही था उससे बात कर रहे थे। तो ड्रायवर बोला कि हमें रास्ता बता देना क्योंकि हम इस जगह केवल एक बार ही गये हैं। बस थोड़ी देर में तो वह हमसे खुल गया।
मैं अपने मित्र को किस्सा बता रहा था कि बोरिवली में जिस जगह पर हम पहले रहते थे मैं एक बार ऑटो में बैठ्कर गया तो वह ऑटो वाला हमसे बोला कि “साहब हम पिछले पंद्रह सालों से ऑटो चला रहे है,

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – ११


उज्जयिनी के लिये मेघदूतम़् में महाकवि कालिदास ने लिखा है -
यक्ष मेघ को निर्देश देता है कि अवन्ति देश में पहुँचकर उज्जयिनी

Tuesday, September 08, 2009

मिश्रधन की शक्ति देखिये इस दुनिया का आठवां आश्चर्य – एक कहानी (Power of Compounding - 8TH WONDER OF THE WORLD – A Tale)

लंबे समय में अगर धन को रिकरिंग जमा किया जाता है तो उसकी शक्ति को

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – १०

मेघ को नायक और निर्विन्ध्या नदी को नायिका बनाते हुए कालिदास कहते हैं कि नायिका के कमर पर बाँधी हुई करधनी, झन-झन करती हुई कामोद्दीपक मानी जाती है। तरंगों के चलायमान होने पर शब्द करते हुए पक्षियों की पंक्तियाँ निर्विन्ध्या की करधनी मानी गयी है।
प्रणयवचनम़् - जिस प्रकार नायिका कमर की करधनी की झंकार बढ़ाकर मदमाती चाल से बार बार नाभी प्रदर्शन द्वारा नायक प्रणय का निमन्त्रण देती है, उसी प्रकार

Monday, September 07, 2009

क्या मेरे दिन अच्छे चल रहे हैं, कुछ समझ में नहीं आ रहा आप ही बतायें…

अभी इस बार की पूछी गई ताऊ पहेली में हम द्वितिय विजेता और विवेक सिंह जी द्वारा जारी की गई प्रहेलिका में भी विजेता घोषित हुए हैं।
पर हमारे बेटेलाल की तबियत कुछ नासाज चल रही है, सर्दी, जुकाम, बुखार सब है डाक्टर को भी दिखाया और दवाई भी दिलाई, डाक्टर ने तो म्यूनिसिपल हस्पताल को रिफ़र कर दिया कि वहाँ टॉमीफ़्लू की गोलियां मुफ़्त मिलती हैं,

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – ९

वेत्रवती – प्राचीन कालीन वेत्रवती को आधुनिक युग की बेतवा नाम से जाना जाता है और उसके किनारे विदिशा नगर था जो दशार्ण देश की राजधानी था। यह विन्ध्याचल के उत्तर से निकलती है तथा भिलसा (प्राचीन काल का विदिशा)  में होती हुई कालपी के निकट यमुना नदी में मिल जाती है।
विदिशा नगरी में वेश्याएँ स्वच्छन्द विहार करती हुई, पर्वत की कन्दराओं में पहुँचकर वहाँ के नागरिकों के साथ रमण

Sunday, September 06, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – ८

किरात आदि कुछ विशेष जातियाँ जंगल में घूमती रहती हैं। उनकी स्त्रियाँ लकड़ी, फ़ल, शहद आदि एकत्र करने के लिये इधर-उधर घूमती रहती हैं। वहीं जंगल में पत्तों की शय्या बनाकर कुंञ्जों में अपने पति के साथ रमण

Saturday, September 05, 2009

irctc.co.in रेल्वे का मिला जुला खेल या इस सरकारी तंत्र के पास संसाधनों Infrastructure की कमी


हम irctc.co.in साईट का उपयोग करते ही रहते हैं क्योंकि हम या हमारे घर में से या फ़िर हमारे किसी न किसी परिचित का टिकिट हम करवाते ही रहते हैं। इस पर भी बहुत बड़ा खेल चल रहा है कहने को तो इंटरनेट के जरिये बहुत ही अच्छी सुविधा मुहैया करवा दी है परंतु अभी भी इसमें बहुत सारे झोल हैं। जिससे irctc या रेल्वे संसाधनों की कमी बताकर तो हाथ नहीं झाड़ सकती है। और जो भी यात्री इंटरनेट से टिकिट करवाते हैं उनके लिये तो कुछ विशेष

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – ७

प्रेमाश्रु – ग्रीष्म ऋतु की भयंकर गर्मी पर्वत को तपा डालती है तथा जब प्रथम वर्षा की बूँदें उस पर गिरती हैं तो उसमें से वाष्प निकलती है। आषाढ़ में लम्बे समय के बाद पर्वत जब मेघ से मिलता है, तो उसकी बूँदों से पर्वत से गर्म-गर्म वाष्प निकलती है। कवि ने कल्पना की है कि वे विरह के आँसू निकल रहे हैं।
पत्थरों से टकराने के कारण नदियों का जल हल्का व

Friday, September 04, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – ६

विरहणी स्त्रियों का चित्रण – जिन स्त्रियों के पति परदेश चले गये हैं, ऐसी स्त्रियां शारीरिक श्रृंगार नहीं करती हैं। ऐसी स्थिती में उनके केश  बिखरे होने के कारण मुख और आंखों पर आये हुए हैं। वे स्त्रियाँ मेघ को देखने के कारण उन केशों के अग्रभाग को ऊपर से पकड़े होंगी।
प्राचीन काल में आधुनिक युग के समान आवागमन के साधन नहीं थे, इसलिये व्यक्ति वर्षा ऋतु अपने घर व्यतीत करते थे। शेष आठ माह घर

Thursday, September 03, 2009

गणपति विसर्जन अनंत चतुर्दशी पर सीधे मुँबई से विवेक रस्तोगी..

अनंत चतुर्दशी पर वैसे तो मुँबई में छुट्टी का ही माहौल रहता है, गणपति उत्सव मुँबई का सबसे बड़ा त्यौहार होता है। भीड़ और उनकी श्रद्धा और उनकी भक्ति देखते ही रह जायेंगे। छोटे बड़े गणपति मुँबई के रास्तों से अपने विसर्जन स्थलों पर रवाना हो गये हैं, गणपति विसर्जन के लिये २ बजे से निकलना शुरु हो गये थे, हम अपने ऑफ़िस से निकलने में थोड़ा लेट

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बारे में – ५

यक्ष का प्रिया विरह - यक्ष कितना दुर्बल हो गया है अपनी प्रिये से दूर होकर कि उसके हाथ में जो स्वर्ण कंकण पहन रखा था वह ढ़ीला हो जाने के कारण गिर पड़ा था, जिससे उसकी कलाई सूनी हो गई थी।
कालिदास के अनुसार - आषाढ़ के प्रथम दिन से ही वर्षा का प्रारम्भ होता है।
वप्रक्रीड़ा उस क्रीड़ा को कहते हैं जब प्राय: मस्त सांड, हाथी, भैंसे

Wednesday, September 02, 2009

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बार में – ४

मेघदूतम़् में यक्ष को एक वर्ष अपनी यक्षिणी से दूर रहने का शाप मिला है, यक्ष रामगिरी पर्वत के आश्रम में निवास करता है और यक्षिणी अलकापुरी हिमालय पर निवास करती है।
शाप का कारण – कवि ने शाप का कारण यक्ष द्वारा अपने कार्य से असावधानी करना बताया है, परंतु साफ़ साफ़ नहीं बताया गया है कि शाप

Tuesday, September 01, 2009

ऑटो वाले का बेहतरीन डायलॉग

ऑफ़िस से घर आने के लिये ऑटो में बैठे तो उसने एक बेहतरीन डायलॉग बोला जो कि हमने उससे २-३ बार उससे सुना कि हमें याद

कुछ बातें कवि कालिदास और मेघदूतम़ के बार में – 3 (महाकवि कालिदास की सात रचनाएँ भाग - २)

५. मालविकाग्निमित्र – यह श्रंगार रस प्रधान ५ अंकों का नाटक है। यह कालिदास की प्रथम नाट्य कृति है; इसलिए इसमें वह लालित्य, माधुर्य एवं भावगाम्भीर्य दृष्टिगोचर नहीं होता तो विक्रमोर्वशीय अथवा अभिज्ञानशाकुन्तलम में है। विदिशा का राजा अग्निमित्र

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