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Wednesday, July 29, 2009

आज श्रावण मास का स्वाति नक्षत्र है क्या आप इसके बारे में जानते हैं..

आज श्रावण मास का स्वाति नक्षत्र है और इसमें हुई वर्षा का जल ही चातक याने कि पपीहा पीता है जिसके विषय में प्रसिद्ध है कि यह पृथ्वी पर गिरे हुए जल को नहीं पीता है। जिसके बारे में कालिदास ने “मेघदूतम” के पूर्वमेघ में लिखा है -

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मन्दं-मन्दं नुदति पवनश्चानुकूलो यथा त्वां

वामश्चायं नदति मधुरं चातकस्ये सगन्ध:।

गर्भाधानक्षणपरिचयान्नून्माबद्धमाला:

सेविष्यन्ते नयनसुभगं खे भवन्तं बलाका:॥

यक्ष मेघ को अलका की ओर प्रस्थान के लिए शुभ शकुन का उल्लेख करते हुए कहता है -

“और जैसे कि अनुकूल वायु तुम्हें धीरे-धीरे प्रेरित कर रहा है तथा गर्व से भरा यह पपीहा तुम्हारे वाम भाग में स्थित होकर मधुर शब्द कर रहा है। निश्चय ही गर्भ धारण करने के आनन्द के अभ्यास के कारण पंक्तिबद्ध बगुलियाँ नेत्रों को सुन्दर लगने वाले आपकी आकाश में सेवा करेंगी॥”

माना जाता है कि जब कभी यात्रा पर निकलें तो बायीं ओर चातक का दिखायी देना शुभ माना जाता है। मोर, चातक आदि पक्षियों का तथा हरिणों का बायीं ओर होना शुभ माना जाता है। यह भी प्रसिद्ध है कि बगुलियां वर्षा में आकाश में पंक्तिबद्ध होकर मेघ के संयोग से गर्भ धारण करती है।

Tuesday, July 28, 2009

मंदिर क्यों जायें..

यदि आपमें आध्यात्म जीवित है, या आध्यात्मिक हो रहे हैं? तो आप इसे पसंद करेंगे!

यदि आपमें आध्यात्म मर गया हैं, तो आप इसे नहीं पढ़ना चाहेंगे।
यदि आप आध्यात्म में उत्सुक हैं तो वहाँ अभी भी आशा है!
कि मंदिर क्यों जायें? ?

एक 'भक्त' गोर ने  एक ? अखबार के संपादक को शिकायती पत्र लिखा कि मंदिर जाने का कोई मतलब नहीं।

'मैं 30 साल से जा रहा हूँ  और आगे लिखा कि इतने समय में मैं कुछ 3000 मंत्र सुन चुका हूँ।


लेकिन अपने जीवन के लिए, मैं उनमें से एक भी याद नहीं कर  सकता हूँ।


इसलिये,  मुझे लगता है ये सब सेवाएँ देकर गुरु अपना समय बर्बाद कर रहे हैं और मैंने अपना समय बर्बाद किया?

इस पत्र को  “संपादक के नाम पत्र”  स्तम्भ में छापा गया और इससे असली विवाद शुरु हुआ, जिससे संपादक बहुत आनंदित हुआ।

ये सब ह्फ़्तों तक चलता रहा जब तक कि यह पक्की दलील नहीं दी गई -

मैं लगभग 30 साल से शादीशुदा हूँ और इस समय में मेरी पत्नी ने लगभग 32.000  बार भोजन पकाकर खिलाया होगा!

लेकिन जीवनभर खाना खाने के बाद भी मैं पूरी सूचि तो क्या ? मैं उनमें से कुछ एक भी याद नहीं कर सकता।

लेकिन मैं यह जानता हूँ ... उस खाने से मुझे बल मिला और मुझे मेरा काम करने की जरूरत के लिये ताकत दी।

अगर मेरी पत्नी ने मुझे भोजन नहीं दिया होता, तो शायद आज मैं शारीरिक रूप से मर चुका होता ?

इसी तरह, अगर मैं मंदिर में पोषण के लिए नहीं गया होता तो मैं आज आध्यात्मिक रुप से मृत हो गया होता।

जब आपको कुछ भी समझ नहीं आता है .... तो भगवान ही कुछ करते हैं ! विश्वास दिखता है? अदृश्य, अविश्वसनीय को मानना ही पड़ता है और असंभव सी चीज भी प्राप्त हो जाती है!


भगवान का शुक्र है हमारे भौतिक और हमारे आध्यात्मिक पोषण के लिये!

अनुवादित - सोर्स

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indiatrace.com इंडियाट्रेस.कॉम मोबाईल, वाहन, आई.पी एड्रेस कुछ भी खंगालिये केवल भारत के लिये

क्या कोई बारबार मोबाईल पर फ़ोन करके आपको परेशान कर रहा है और आपको उसकी जगह का पता लगाना है कि वह किस जगह का नंबर है और किस कंपनी का उपभोक्ता है।

किसी भी वाहन का नंबर डालिये और उसके बारे में जानकारी आपके सामने होगी।

पिनकोड किस शहर का है ट्रेस कर सकते हैं।

आई.पी. एड्रेस किस जगह का है ट्रेस कर सकते हैं।

कोई डोमैन किसका है और अगर उसका पूरा पता और फ़ोन नंबर चाहते हैं तो वो भी आप ट्रेस कर सकते हैं।

ये साईट केवल भारत के लिये है, और भी कई चीजें ट्रेस करती है, खंगालिये ।

Monday, July 27, 2009

ऑनलाईन मूवी टिकिट करने के लिये कुछ वेबसाईट्स

movieये कुछ वेबसाईट्स हैं जिससे आप सीधे ऑनलाईन टिकिट बुक करवा सकते हैं और अच्छे अच्छे ऑफ़र्स का लाभ भी उठा सकते हैं।

क्याजुँगा -  KyaZoonga.com    

फ़नसिनेमा -  FunCinemas.com

एडलेबसिनेमा -  AdlabsCinemas.com

बुकमायशो -  BookMyShow.com

इटझसिनेमा -  ITZcinema.com

आइनोक्स मूवी - InoxMovies.com

पीवीआर सिनेमा -  PVRcinemas.com

इसिमूवीइंडिया -  EasymoviesIndia.com

फ़ेमसिनेमा - Famecinemas.com

सत्यमसिनेप्लेक्स -  Satyamcineplexes.com

दसिनेमा -  TheCinema.in

तो भूल जाइये वो लंबी लाईनें और खरीदिये ऑनलाईन टिकिट अपने घर या दफ़्तर से ही, साथ ही टेन्शन भी खत्म कि टिकिट मिलेगी या नहीं, पिक्चर देख पायेंगे या नहीं।

Sunday, July 26, 2009

“पिलाओ सांप को दूध..” और उज्जैन में प्रथम मंजिल पर नागचंद्रेश्वर का मंदिर की मेरी यादें

“पिलाओ सांप को दूध..” आवाज बहुत सुनाई देती थी जब हम अपने छोटे से शहर में रहते थे, आज यह बात इसलिये याद आ गई जब बहुत सारी पोस्टें नागपंचमी के उपर पढ़ीं तो पता चला कि आज नागपंचमी है।

अलसुबह आवाज आना शुरु हो जाती थीं “पिलाओ सांप को दूध..” सपेरों की और वे अपने कपड़े की झोली में बांस की टोपली में सांप लेकर उनके मुंह को पकड़कर उनसे जबरदस्ती दूध पिलवाया करते थे, फ़िर सांप को उसी टोपली में छोड़कर बीन बजाकर सांप को हमला करने के लिये आमादा करते थे, ऐसे दृश्य हमने बचपन में बहुत देखे हैं।

एक बार हमने भी बीन बजाने की कोशिश की थी पर जब तक बराबर अभ्यास न हो कोई बजा नहीं सकता, जैसे शंख, बहुत जान लगाकर फ़ूँक मारना पड़ती है। पेट की अंतड़िया तक दुखने लगती है इतनी ताकत लगाना पड़ती है।

जब स्कूल और कालेज में पढ़ते थे तब मजाक में कहते थे एक दूसरे को कि मैं तेरे घर आने वाला हूँ दूध पीने के लिये, और दोस्त के घर पहुंचकर आवाज देते “पिलाओ सांप को दूध..”

महाकालेश्वर, उज्जैन में प्रथम मंजिल पर नागचंद्रेश्वर का मंदिर है जो कि पूरे वर्ष में केवल एक बार नागपंचमी के दिन ही खुलता है, जब हम पढाई करते थे तो लगभग हर वर्ष हम दर्शन करने जाते थे, कहते हैं स्वयं साक्षात तक्षक विराजमान हैं। साल दर साल जनसैलाब में वृद्धि होते देखी है, आस्था का व्यापार बड़ने लगा है, पहले जब लगभग हम रोज महाकाल में संध्या आरती में जाते थे तब शायद महाकाल के इतने भक्त नहीं थे जितने कि सिंहस्थ के बाद आने लगे, और हम आसानी से आरती में सक्रिय भूमिका निभाते थे नंदी गृह में बड़े घंटे बजाकर। पर आज संध्या आरती में जाना उतना ही मुश्किल ।

फ़ाईलहिप्पो.कॉम (filehippo.com) सभी ओपनसोर्स सोफ़्टवेयरों के नये वर्शन डाउनलोड करने के लिये

फ़ाईलहिप्पो.कॉम (filehippo.com) यह एक ऐसी साईट है जहां आपको लगभग सभी ओपनसोर्स सोफ़्टवेयरों के नये वर्शन डाउनलोड करने के लिये मिलेंगे। सोफ़्टवेयर्स को अलग अलग सेक्शन में कर दिया गया है जिससे खोज में आसानी होती है।


सबसे ऊपर के सेक्शन में नये वर्शन किस ओपनसोर्स सोफ़्टवेयर के उपलब्ध हैं उसकी जानकारी दी गई है। इसके पास ही एक और सेक्शन दिया गया है जिसमें सबसे ज्यादा कौन से सोफ़्टवेयर डाउनलोड किये गये हैं उन्हें दिया गया है।


फ़ाईलहिप्पो की सबसे अच्छी एक नया वर्शन अपडेट चेकर दिया गया है जिसे डाउनलोड कर लें जब भी आपके पीसी पर किसी ओपनसोर्स सोफ़्टवेयर का नया वर्शन उपलब्ध होगा तुरंत ही यह आपको बता देगा।


फ़ाईलहिप्पो.कॉम के लिये यहाँ चटका लगाईये।

ब्लोगर्स के विचारों के इंतजार में – क्या नई बहू को थोड़े दिन ससुराल में रुकना चाहिये और नई व्यवस्था को समझना चाहिये ?

नई बहू को थोड़े दिन ससुराल में रुकना चाहिये और नई व्यवस्था समझना चाहिये। ससुराल में साथ में रहने से नये परिवार के प्रति अपनापन भी आयेगा और उनकी व्यवस्थाएं भी समझ में आयेंगी।

ज्यादातर ब्लागर्स इस बात से सहमत हैं कि नई बहू को ससुराल में कुछ वक्त गुजारना चाहिये और कुछ का कहना है कि आजकल नई बहू से सास ससुर ने कुछ उम्मीद लगाना ही छोड़ दिया है।

आपकी महत्वपूर्ण राय की प्रतीक्षा है इस पोस्ट पर -

नई बहू का कुछ समय ससुराल में रहना जरुरी है !!

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Friday, July 24, 2009

बारिश में अपना धंधा बहुत अच्छा चलता है।

रोज ऑफ़िस आना जाना हम ऑटो से करते हैं और ऑटो में बैठते ही अपनी हिन्दी की किताब पढ़ना शुरु कर देते हैं पूरा आधा घंटा मिल जाता है। रोज आधा घंटा या कभी ज्यादा कभी थोड़ा कम समय का सदुपयोग हम हिन्दी साहित्य पढ़ने में व्यतीत करते हैं, शाम को लौटते समय अँधेरा हो जाता है तो शाम का वक्त फ़ोन पर बतियाते हुए अपने रिलेशन मैन्टेन करने मैं व्यतीत करते हैं। इस आधे घंटे में हम शिवाजी सामंत का प्रसिद्ध उपन्यास “मृत्युंजय” पढ़ चुके हैं, जिसके बारे में कभी ओर चर्चा करेंगे। आजकल महाकवि कालिदास का प्रसिद्ध खण्डकाव्य “मेघदूतम” पढ़ रहे हैं।

आज सुबह जब मैं  ऑटो से अपने ऑफ़िस जा रहा था, तो बहुत धुआंधार हवा के साथ बारिश हो रही थी। आटो में दोनों तरफ़ प्लास्टिक का पर्दा गिराने के बाद भी कुछ बूँदे हमें छू ही रही थीं। हम बारिश का मजा ले रहे थे तभी ऑटोवाला बोला कि आप किधर से जायेंगे “मलाड सबवे” से या कांदिवली के नये “फ़्लायओवर” से, हमने कहा कि हमारा रास्ता तो “फ़्लायओवर” वाला ही है क्योंकि यह रास्ता बारिश में सबसे सुरक्षित है, कहीं भी पानी नहीं भरता है। “मलाड सबवे” में तो थोड़ा बारिश होने पर ३-४ फ़ीट पानी भर जाना मामूली बात है।

 

फ़िर ऑटो वाला बोला कि साहब ये बारिश में अपना धंधा बहुत अच्छा चलता है क्योंकि हर आदमी ऑटो में आता जाता है, पैदल चलने वाला भी ऑटो में सवारी करता है। बस की सवारी भी ऑटो में यात्रा करती है  वह भी यह सोचती है कि कहां बस में भीगते हुए जायेंगे। लोकल ट्रेन में पास के स्टेशन पर जाने वाले भी ऑटो में ही यात्रा करते हैं तो कुल मिलाकर यात्री ज्यादा हो जाते हैं और ऑटो कम। अमूमन आधे ऑटो वाले ही बारिश में ऑटो बाहर निकालते हैं क्योंकि बारिश में ऑटो खराब होने का डर ज्यादा रहता है। वह ऑटोवाला शुद्ध हिन्दी भाषा में बात कर रहा था और जौनपुर टच टोन लग रही थी। वैसे यहाँ पर ज्यादातर ऑटो वाले यूपी या बिहार से ही हैं और उनसे ही शुद्ध हिन्दी सुनने को मिलती है, नहीं तो यहां हिन्दी भाषा का विकृत रुप ही बोला जाता है।

Thursday, July 23, 2009

नई बहू का कुछ समय ससुराल में रहना जरुरी है !!

जब कोई भी माता पिता अपने लड़के की शादी करते हैं तो मन में कहीं न कहीं ये आस होती है कि नई बहू आयेगी और हमारी सेवा करेगी और हम उसे बेटी मानकर प्यार देंगे।

 

अक्सर लड़का घर से दूर होता है तो शादी के तुरंत बाद ही वह उनकी नई बहू को अपने साथ ले जाता है और अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करता है। परंतु छोटी छोटी बातों पर झगड़ा या मनमुटाव होता है या फ़िर दोनों में से किसी एक को दूसरे की आदतों के साथ समझौता करना पड़ता है। हमेशा आशा ये की जाती है कि बहू घर में आयी है तो घर सम्भालेगी, और अपने नये घरवालों की हर छोटी बड़ी बातों का ध्यान रखेगी

 

ससुराल में बहू को कुछ समय इसीलिये ही बिताना चाहिये कि वह सभी घरवालों को भली भांति समझ लें और घरवाले अपनी नई बहू को जान लें और अपने अनुकूल ढाल लें, जो संस्कार और जिन नियमों में उन्होंने अपने लड़के को पाला है बहू उन नियमों से भली प्रकार परिचित हो जाये जिससे नई दंपत्ति को असुविधा न हो। लड़के को क्या क्या चीजें खाने में पसंद हैं क्या नापसंद हैं। कैसे मूड में उससे कैसा व्यवहार करना है यह तो केवल ससुरालवाले ही बता सकते हैं। ससुराल में रहने से उसका घरवालों के प्रति अपनापन पैदा होता है, नहीं तो अगर वो कुछ दिनों के लिये ही ससुराल जायेगी तो केवल मेहमान बनकर मेजबानी करवाकर आ जायेगी,  अपनेपन से सेवा नहीं कर पायेगी।

 

आप अपनी राय से जरुर अवगत करायें।

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Wednesday, July 22, 2009

बैंकज्ञान ब्लोग का नया बैनर मेरे ब्लोग कल्पतरु पर

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आज बहुत ढ़ूँढ़ने के बाद मैं अपने बैंकज्ञान ब्लोग का बैनर बना पाया हूँ, जरा देखिये ओर बताईये कैसा है।

अगर किसी को पता हो तो बतायें कि आसान तरीके से बैनर कैसे बना सकते हैं।

वैसे यह सलाह मुझे कुवैत वाले जीतू भाई ने दी थी, उनका धन्यवाद।

Tuesday, July 21, 2009

हरिओम पँवार की कविताएँ

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आज भी वो दिन याद है जब हम रात रात भर कवि सम्मेलन में हरिओम पँवार को सुनने के लिये बैठा करते थे और उस जमाने में अपना टेपरिकार्डर और ३-४ खाली कैसेट, और ४-६ बैटरी लेकर बिल्कुल मंच के सामने आसन जमा लेते थे।

 

हरिओम पँवार जब कविता पाठन करने मंच पर आते तो सबसे पहले वो कहते कि अगर किसी को उठ कर जाना है तो पहले ही निकल जाये और अगर कोई बीच में से उठा तो उसे गद्दार घोषित कर दिया जायेगा और वाकई अगर कोई उनके कविता पाठन के  बीच में से उठता तो उसे वो हाथों हाथ सीधा कर देते थे। पेशे से वकील हैं पर वीर रस के कवि हैं मेरठ के रहने वाले हैं, मतलब हमारे पैतृक शहर के।

 

जब हरिओम जी मंच पर कविता पाठन के लिये खड़े हो जाते तो खून में जोश आ जाता था और लगता था कि बस अब पाकिस्तान सामने हो तो हम उसे ध्वस्त कर दें।

 

अब वो हमारी कैसेट सब खराब हो गई हैं हमारा संग्रह खत्म हो गया है, गूगल पर बहुत ढूंढने की कोशिश की पर एमपी३ भी नहीं मिली और न ही कोई छपी हुई अगर मिली भी तो इक्का दुक्का।

अगर किसी के पास एमपी३ में हो तो कृप्या हमसे शेयर करें।

१-२ कविता यूट्यूब पर मिली। यहां चटका लगाइये  उनकी एक कविता “घायल घाटी का दर्द सुनाने निकला हूँ, कश्मीर का दर्द”  देखने के लिये और वीर रस के जोश से अपने आप को सारोबार कीजिये।

Monday, July 20, 2009

चलो टल्ले खाकर आते हैं।

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हमारे एक मित्र इन्दौर में थे एक शाम छुट्टी के दिन बोर हो रहे थे तो बोले कि चलो टल्ले खाकर आते हैं जेल रोड तक। तो उनकी छोटी बिटिया उनके पीछे पड़ गई कि मुझे भी टल्ले खाना है मैंने आज तक टल्ले नहीं खाये हैं आप तो रोज अकेले अकेले ही टल्ले खाकर आ जाते हो। हमारे मित्र मुस्कराकर रह गये और अपनी छोटी बिटिया को साथ में लेकर निकल पड़े टल्ले खाने। एक घंटे बाद वापिस घर पर आये तो बिटिया ने अपनी मम्मी से शिकायत की, कि पापा ने मुझे टल्ले नहीं खिलवाये खुद तो रोज अकेले अकेले खाकर आ जाते हैं, तब उनकी मम्मी ने समझाया कि बेटी इसे ही टल्ले खाना कहते हैं उसने सोचा था कि पानी पुरी या भेल चाट से तो कुछ ज्यादा ही लाजबाब स्वाद होता होगा इस टल्ले का, तभी तो पापा अकेले याद दोस्तों के साथ टल्ले खाने जाते हैं।

 

मालवा में आमतौर पार टाइमपास के लिये घूमने को टल्ले खाना कहते हैं।

Sunday, July 19, 2009

खोया हुआ मोबाईल वापिस मिला, मुम्बई की ईमानदारी की “जय हो”

दो दिन पहले हमारा खोया हुआ मोबाईल वापिस मिल गया। हमारे  सेमसंग मोबाईल में हमने ट्रेकर चालू किया हुआ था और जैसे उसमें नई सिम डाली गई हमारे पास उस नये नंबर से एस.एम.एस. आ गया। हमने फ़ोन करके उससे कहा कि ये तो हमारा मोबाईल है जो थोड़े दिनों पहले लापता हो गया था। तो उसने हमसे टाईम और जगह फ़िक्स कर हमारा मोबाईल वापिस कर दिया। बस हमें हमारा १जीबी का मेमोरी कार्ड नहीं मिला और मोबाईल में एक भी नंबर नहीं मिला, बस मोबाईल मिल गया वही बड़ी बात है। एस.एम.एस. और फ़ोटो वह देख/पढ़ नहीं पाया क्योंकि हम ये हमेशा पासवर्ड के जरिये सुरक्षित रखते हैं। क्योंकि हमारा यह मानना है कि ये दो चीजें मोबाईल में निजी होती हैं और इन्हें सुरक्षित रखना चाहिये तो ये दोनों चीजें हमें सुरक्षित मिलीं।

 

वह एक आटो वाला था जिसे मेरा मोबाईल उसके आटो में पड़ा मिला जो किन्हीं अज्ञात लोगों द्वारा फ़ेंका गया था। उसमें न सिम थी और न ही कोई मोबाईल नंबर।

 

आखिर क्या है यह सेमसंग मोबाईल ट्रेकर -

सेमसंग मोबाईल में मोबाईल ट्रेकर फ़ोन सिक्यूरिटीज में होता है जिसमें आप कोई भी दो मोबाईल नंबर फ़ीड कर सकते हैं, जब भी सिम बदलेगी तो हमेशा एक एस.एम.एस. इन दो मोबाईल नंबरों पर चला जायेगा और आपको पता चल जायेगा कि कौन आपके मोबाईल का उपयोग कर रहा है, अब वो भले ही कितने ही सिम बदल ले, आपको हर नंबर पता होगा क्योंकि आपके पास उतनी ही बार एस.एम.एस. आ जायेगा। है ना कमाल की सुविधा।

ज्यादा जानकारी के लिये यहां चटका लगा सकते हैं।

Friday, July 17, 2009

चिन्डोगु.कोम http://www.chindogu.com आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है।

इन अविष्कारों को करने वाले कोई बहुत बड़े वैज्ञानिक नहीं हैं परंतु रोजमर्रा की परेशानियों से निपटने के लिये लोगों ने कुछ उपाय करना शुरु किये और बिना कापीराईट के आपस में उसकी विधी बताना शुरु किया, और एक संस्था बनाई अंतर्राष्ट्रीय चिन्डोगु सोसायटी। ये लोग अभी तक ६०० से ज्यादा अविष्कार कर चुके हैं। कुछ अविष्कारों के चित्र देखिये।










ज्यादा जानकारी के लिये यहाँ चटका लगाइये।

zoomin.com का खास तोहफ़ा केवल 19 जुलाई तक - दस फ़ोटो प्रिंट फ़्री 4"x6" साईज के।

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२. आपकी डिजिटल फ़ोटो आप सबको दिखा सकते हैं और प्रिंट भी करवा सकते हैं।
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४. बहुत ही अच्छी गुणवत्ता की फ़ोटो प्रिंट्स।
५. घर पर पहुँचाने की सुविधा, भारत में कहीं भी, वो भी पूर्ण सुरक्षा के साथ जिससे आपके फ़ोटो खराब न हों।

ज़ूमइन.कोम से फ़्री फ़ोटो पाने के लिये आसान से क्रमों का अनुसरण करिये -
१. अपने ज़ूमइन.कोम खाते के लिये ज़ूमइन.कोम पर जाकर साईन अप करिये।
२. डिजिटल कैमरे, कम्प्यूटर, पिकासा या फ़्लिकर से फ़ोटो अपलोड करिये।
३. जिन फ़ोटो का प्रिंट का ऑर्डर देना है उन सबको जोड़ दीजिये अपने खरीदी सूची में और चेकआऊट कीजिये।
४. चेकआऊट के दौरान प्रमोशन कोड 4X6PRINTS दीजिये दस फ़्री फ़ोटो प्रिंट पाने के लिये।

कूरियर के चार्जेस लगेंगे वो है २५ रुपये और टेक्स तो कुल मिलाकर 27.58 रुपये देने पड़ेंगे। भुगतान क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या मोबाइल स्टोर पर नकद में कर सकते हैं।

Wednesday, July 15, 2009

अगर मुख्यमंत्री का वरदहस्त है तो कोई क्या कर सकता है, न्याय की देवी भी अपनी आँख पर काली पट्टी बँधी होने का मातम मनायेगी|

आखिरकार सभरवाल सर के हत्यारे बेगुनाह साबित कर छुटवा लिये गये। भले ही उन्हें टी.वी. पर सर के साथ भद्दी भाषा में बात करते हुए दिखाया गया हो, जान से मारने की धमकी देते हुए दिखाया गया हो, हमारी पहुँच कहां तक है ये भी कहते हुए दिखाया गया हो। पर उनका कोई बाल भी बांका कर सकता है क्या, क्योंकि हमारे माननीय मुख्यमंत्री का वरदहस्त है उनके ऊपर।

टीस इसलिये उठी कि मैं भी उसी माधव महाविद्यालय में पढ़ा हूँ और इस गंदी राजनीति को बहुत पास से देखा है। जहां एक प्रोफ़ेसर दूसरे प्रोफ़ेसर के लिये षड़्यंत्र रचता है वो भी छात्र राजनीति के द्वारा। जिस दिन यह घटना हुई, ठीक उसके एक दिन पहले मैं रायपुर से भोपाल के लिये ट्रेन में था और अपने मित्रों को यही बता रहा था कि माधव महाविद्यालय में तो हरेक छात्र नेता है, और कोई भी कुछ भी कर सकता है, और अब चुनाव हैं कुछ भी हो सकता है। शायद किसी की जान भी जा सकती है शायद किसी प्रोफ़ेसर की भी क्योंकि वहां के छात्र बहुत ही उच्चश्रंखल हैं, उद्दंड हैं, जो कि वहीं के गुरुओं द्वारा अपना वर्चस्व बनाने के लिये बना दिये गये हैं। पर मुझे यह पता नहीं था कि जो मैं बोल रहा हूँ वही अगले सत्य होने वाला है। सभरवाल सर ऐसे नहीं थे और उन्हें चुनाव की देखरेख के लिये नियुक्त किया गया था और वे किसी के दबाब में नहीं आते थे, पहले तो छात्र नेताओं ने उन्हें हटवाने की बहुत कोशिश की परंतु कामयाब नहीं हो पाये तो उनकी हत्या कर डाली।

सारे सबूत होते हुए भी हत्यारे बेगुनाह छूट गये और कोई भी कुछ भी नहीं कर पाया। शायद उज्जैन की जनता ही इंसाफ़ करे, नहीं तो ये लोग अब भाजपा में किसी प्रतिष्ठित पद पर बैठा दिये जायेंगे और कोई भी कुछ भी नहीं कर पायेगा, और न्याय की देवी भी अपनी आँख पर काली पट्टी बँधी होने का मातम मनायेगी।

Saturday, July 11, 2009

नया सोफ़्टवेयर एक दिन के लिये फ़्री - Giveaway of the day

giveawayoftheday.com एक ऐसी वेबसाईट है जो कि नया सोफ़्टवेयर एक दिन के लिये फ़्री में उपलब्ध करवाती है जब भी कोई नया सोफ़्टवॆयर बाजार में आता है और अगर उसका गठबंधन इस साईट से होता है तो २४ घंटे के लिये वह सोफ़्टवेयर फ़्री में डाउनलोड के लिये उपलब्ध होता है वह भी अपनी सम्पूर्ण विशेषताओं (Features) के साथ। साथ में उस सोफ़्टवेयर की पूरी समीक्षा भी उपलब्ध होती है। २४ घंटे बाद वह सोफ़्टवेयर ट्रायल वर्जन में उपलब्ध होगा। यह एक बहुत अच्छा प्रयास है इस वेब साईट के द्वारा।

इसका टिकर कोड अपने ब्लोग पर लगाकर ब्लागर इसका प्रचार भी कर सकते हैं।

Friday, July 10, 2009

मेरा नया ब्लोग "बैंकों के बारे में जानकारी"

मैंने एक नया ब्लोग शुरु किया है "बैंकों के बारे में जानकारी"।
मेरी कोशिश है कि आम जनता को बैंकों के बारे में उनका ज्ञानवर्धन कर सकूँ।

Thursday, July 09, 2009

ओम भैया (ओम व्यास ओम) अब स्कूटर पर नहीं देखेंगे।

अक्सर ओम भैया (ओम व्यास ओम) फ़्रीगंज में सुबह अपने दफ़्तर जाते वक्त मामा पान पर मिल जाते थे अपनी सफ़ेद स्कूटर पर, पर अब ओम भाई कभी स्कूटर पर नहीं दिखेंगे यह उज्जैन के लिये अपूरणीय क्षति है, उनके छोटे भाई संजय व्यास मेरे अच्छे मित्रों में से हैं। भगवान शोक-संतप्त परिवार को इस गहन वेदना को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।

शादी के लिये एक बहुत ही अच्छी वेबसाईट

Wednesday, July 08, 2009

नर्सरी और प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए सबसे अच्छी पत्रिका “मेजिक पोट” (MagicPot)

यह बच्चों के लिये सबसे अच्छी पाक्षिक पत्रिका है। यह एक अद्भुत पत्रिका है जिससे मजे से ओर आसानी से विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को सीख सकते हैं। विशेष रूप से नर्सरी और प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए। इस पत्रिका में ऐसी बहुत सी गतिविधियाँ हैं जिससे बच्चे का दिमाग तेज होगा जैसे कि डॉट जोड़ना, रंग भरना, नैतिक कहानियाँ, महाकाव्य ओर भी बहुत कुछ। इसमें चित्र पहेलियाँ हैं जिसमें अंतर बताना है।


हर पहेली के नीचे मेजिकपोट में एक नोट दिया रहता है कि इस पहेली या अभ्यास से बच्चों को क्या लाभ है। यह पत्रिका रंगीन है ओर बच्चों के मन को जो जो भाता है वह सब कुछ इसमें हैं। पत्रिका में सबसे अच्छी चीज है, चित्रों के समूह में से एक अलग चित्र को बच्चों को चयन करने को देते हैं।


कुल मिलाकर बच्चों के लिये सबसे बेहतरीन पत्रिका, ज्यादा जानकारी के लिये यहाँ चटका लगाइये। यह हिन्दी में नहीं इंग्लिश में है अगर इसका हिन्दी वर्जन भी होता तो शायद इससे अच्छी कोई पत्रिका नहीं हो सकती थी।

Monday, July 06, 2009

तकनीकी छात्रों के जबाब ये कुछ भी कर सकते हैं... EXCLUSIVELY FOR ENGINEERING STUDENTS.........

Ques: We know that 2/10=0.2

but

Prove that 2/10=2

Ans : Normal college students insist Question is "OUT of Syllabus".

but

Engineering Students replied:

2=two,
10=ten.

therefore Two/Ten = Two/Ten = wo/en.

w=23,
o=15,
e=5,
n=14.

therefore

w+o=23+15=38
&
e+n=5+14=19

Therefore wo/en=38/19=2.

Hence Proved


FOR, Engineers “It doesn’t matter ans kya hai, they say ans kya lana he."


Sunday, July 05, 2009

आज पापाजी की बहुत याद आ रही है।

आज सुबह से पता नहीं क्यों अतीत में अपने जीवन को झांक रहा था और उस सबमें पापाजी ने क्या किया अपने परिवार और मेरे लिये पता नहीं क्यों यह सब विश्लेषण करने की कोशिश कर रहा था। पर मैं कोई बहुत बड़ा तत्वज्ञानी नहीं कि मैं उस विशाल ह्रदय पिता के कार्यों का विश्लेषण कर सकता, पर हाँ यह बात तो मैं बहुत ही अभिमान के साथ कह सकता हूँ कि आज जो कुछ भी मैं हूँ केवल अपने माता पिता के दिये गये संस्कारों के कारण हूँ। अगर संस्कार नहीं होते तो मैं शायद कहीं ओर होता जो मेरे करीबी ओर मेरे अपने बहुत अच्छे से जानते हैं, जब मैं अपनी राह भटक गया था। परंतु संस्कारों ने मुझे सही राह दिखाई और मुझे गर्त में जाने से बचा लिया।

बचपन की यादों में झांक रहा था तो देखा कि पापाजी सुबह जल्दी उठकर अपनी साईकिल लेकर बैंक के काम से दौरा करने चल दिये हैं उन दिनों में परिवहन की उतनी अच्छी व्यवस्था तो थी नहीं, तो उन्हें एक दिन में तकरीबन ३०-४० किलोमीटर साइकिल चलानी पड़ती थी, अगर कहीं दूर गाँव जाना होता था तो पहले बस के ऊपर साईकिल रखते और फ़िर जहां जिस गाँव में जाना होता वहां साईकिल लेकर चल देते थे। फ़िर देर रात थकेहारे कब में आते थे हमें तो पता ही नहीं चलता था क्योंकि उस समय कोई टी.वी. तो था नहीं, मैं तकरीबन शाम ७-८ बजे के आसपास सो जाता था। कभी कभी दौरा २-३ दिन का भी हो जाता था। बस बचपन का इतना ही मुझे याद है।

पापाजी अपने छह: भाई बहनों में सबसे बड़े हैं, और मैंने उनकी एक बात को और ध्यान से देखा कि जब भी चाचाजी, फ़ूफ़ाजी या कोई ओर घर पर आता वो उनके साथ थोड़ी ही देर समय बिताते और बाकी समय बाहर जाकर पेड़ पौधे के साथ या पानी की टंकी भरने में या कुछ ओर करने में अपने को व्यस्त रखते। वैसे तो सब समझदार हैं पर यह बात मेरे समझ में न आई, पर वक्त ने मुझे बता दिया कि पापाजी क्यों ऐसा करते हैं। बड़ों की इज्जत अपने हाथों में होती है, यही बात मैं उनकी इस बात से सीख पाया। ओर भी बहुत कुछ सीखने को बाकी है जो शायद ऐसे ही जिंदगी की पाठशाला में सीखने को मिलेगा।

यादें तो बहुत हैं पर कहने के लिये शब्द नहीं मिल रहे हैं जब भी शब्द मिलेंगे यादों को पिरोने के लिये वो यादें जरुर कलमबद्ध करुँगा। मुझे गर्व है मेरे पापाजी के ऊपर कि वो मेरे पापा हैं।

Saturday, July 04, 2009

कम्प्यूटर पर पासवर्ड कैसे छुपाएँ, कीबोर्ड से लिखते समय । कोई देख नहीं पाये कि आप अपने मोनिटर पर क्या कर रहें और क्या सर्फ़िंग कर रहे हैं और ताऊ....

कम्प्यूटर पर पासवर्ड कैसे छुपाएँ, कीबोर्ड से लिखते समय ।




कोई देख नहीं पाये कि आप अपने मोनिटर पर क्या कर रहें और क्या सर्फ़िंग कर रहे हैं।




और ये सबसे उम्दा....






और ये सब ताऊ से देखते न बना और आँखें बंद कर लीं -


मेरा नया चिठ्ठा blog.co.in पर और मेरी परेशानी

मैंने अपना नया चिठ्ठा blog.co.in पर http://bankgyan.blog.co.in एड्रेस पर बनाया है क्योंकि यहां पर कमाई की कुछ उम्मीद है वह भी भारत की मुद्रा में, जैसा कि ब्लोग के शीर्ष पेज पर जानकारी दी गई है।

मेरे इस ब्लोग पर बैंकों के बारे में छोटी बड़ी जानकारियां होंगी। सभी को किसी न किसी तरह की परेशानी का सामना बैंक में करना पड़ता है, मेरा यह प्रयास है कि इससे वह कम से कम बैंको एवं उपभोक्ताओं के अधिकारों से परिचित हों।

मेरी परेशानी -
मैंने अपना नया चिठ्ठा चिठ्ठाजगत और ब्लोगवाणी पर लिंक के लिये भेजा था, जिसमें से चिठ्ठाजगत से तो ईमेल आ गया, पर ब्लोगवाणी के ईमेल का इंतजार है।

चिठ्ठाजगत से ईमेल में ३ तरह से अधिकृत करने की प्रक्रिया दी गई है, जिसमें पहली प्रक्रिया से में चिठ्ठे को चिठ्ठाजगर पर दिखा तो पाया पर html कोड मेरी पोस्ट के साथ दिख रहा है।

दूसरी प्रक्रिया में साईड बार में विजेड पर ये लिक लगाना है पर blog.co.in पर शायद यह सुविधा नहीं है अगर किसी ब्लोगर को पता हो तो कृप्या मार्गदर्शन करें।

तीसरी प्रक्रिया में चिठ्ठे के html में कोड पेस्ट करना है पर blog.co.in पर कैसे करेंगे, यह पता नहीं लग पाया, अगर किसी ब्लोगर को पता हो तो कृप्या मार्गदर्शन करें।

या फ़िर मैं इसे blogger.com पर ले आऊँ, बताएँ।

Thursday, July 02, 2009

बैंकों के बारे में जानकारी मेरा नया चिठ्ठा।

बैंकों के बारे में जानकारी इस विषय पर मैंने एक नया चिठ्ठा शुरु किया है, आईये देखिये

http://bankgyan.blog.co.in

अगले सप्ताहों के लिये मार्केट टिप्स – सेनसेक्स एवं निफ़्टी के लिये

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कृपया अपने विवेक से निर्णय लें। हानि या लाभ की स्थिती में ब्लाग की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।

अगले २ सप्ताह की मार्केट टिप्स – सेनसेक्स एवं निफ़्टी के लिये


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