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Tuesday, June 30, 2009

इंजीनियरिंग का नायाब नमूना - बांद्रा वर्ली सी लिंक (Bandra Worli Sea Link, Mumbai)


आज इंजीनियरिंग का नायाब नमूना - बांद्रा वर्ली सी लिंक (Bandra Worli Sea Link, Mumbai) राष्ट्र को समर्पित होगा। और मुंबई के लिये एक और लेंडमार्क, मुंबईवासियों का गौरव।


Sunday, June 28, 2009

सर्वोत्तम ३०० फ़्रीवेयर सोफ़्टवेयर (Top 300 Freeware Softwares)

विनएडोनस (winAddons) वेब साइट ने "सर्वोत्तम 300 फ्रीवेयर सॉफ्टवेयर" की एक व्यापक सूची इकट्ठा की है, इंटरनेट पर. इस सूची में निम्नलिखित वर्ग शामिल हैं:

कार्यालय (Office)
पुरालेख प्रबंधक (Archive Managers)
इंटरनेट (Internet)
P2P (P2P)
चैट (Chat)
सुरक्षा (Security)
नेटवर्क (Network)
सर्वर (Server)
ऑडियो (Audio)
वीडियो (Video)
छवि (Image)
3 डी (3D)
डेवलपर्स (Developers)
सीडी / डीवीडी (CD/DVD)
कोडेक (Codecs)
प्रणाली उपयोगिताएँ (System Utilities)
यूआई संवर्द्धन (UI Enhancements)
हार्डवेयर मॉनिटरिंग (Hardware Monitoring)
खेल (Games)
शिक्षा (Education)
विविध (Miscellaneous)

आप यहाँ पर चटका लगाकर पूरी सूची पतों के साथ देख सकते है।

फ़ोंट्स का अद्भुत खजाना व स्वर्ग – डाफ़ोंट.कोम (dafont.com)

लेखन में फ़ोंट का भी अपना एक महत्व होता है और इसके लिये आपके पास कुछ अच्छे फ़ोंट हों तो लेखन और प्रभावकारी हो जाता है। अगर आप किसी विशेष तरीके के फ़ोंट खोज रहे हों तो आकर देखिये फ़ोंट्स का स्वर्ग डाफ़ोंट.कोम







७००० फ़ोंट डाउनलोड के लिये उपलब्ध हैं विन्डोज एवं मैक के लिये। आप फ़ोन्ट की शैली के आधार पर भी खोज सकते हैं जैसे बुनियादी, तकनीकी इत्यादि। आप टाप १०० फ़ोंट भी देख सकते हैं।

Saturday, June 27, 2009

झमाझम बरसात मुंबई में और आखिरी जलप्रदाय नलों के द्वारा उज्जैन में।

अभी तीन-चार दिनों से मुंबई में झमाझम बरसात हो रही है और कल से ज्यादा झमाझम बरसात हो रही है तो इसके कारण ट्रैफ़िक का बुरा हाल है, जगह जगह पानी भरा हुआ है सड़क पर भी और रेल्वे ट्रेक पर भी। चलो मन को तसल्ली हुई कि इस साल का मानसून आखिरकार आ ही गया।

आज सुबह ही उज्जैन अपने घर पर बात हुई, आज मेरे माताजी पिताजी की शादी की ३५ वीं सालगिरह है तो पहले तो हमने उन्हें शुभकामनाएँ दी फ़िर वो बोले कि १ घंटे बाद बात करेंगे क्योंकि आज आखिरी बार नल से जलप्रदाय हो रहा है। नगरनिगम ने कहा है कि पानी खत्म हो गया है और अब केवल टेंकरों के द्वारा जलप्रदाय किया जायेगा। महाकाल की नगरी में जल की भीषण त्रासदी है और यह केवल इस वर्ष नहीं है यह लगभग पिछले ६-७ वर्षों से है।

पानी की समस्या से निपटने के लिये कुछ उपाय भी किये गये हैं और नागरिक जागरुक भी हो गये हैं। सरकार ने ट्य़ूबवेल खोदने पर रोक हटा ली और कहा कि कालोनी के १५-२० घरों के समूह बनाकर आप अपना एक ट्यूबवेल खुदवा लीजिये और पानी को आपस में उपयोग में ले लीजिये, इस तरह पानी की समस्या से कुछ हद तक छुटकारा तो मिला क्योंकि सबके निजी जलस्त्रोत सूख चुके थे या सूखने की कगार पर थे। लेकिन इन सबके पीछे एक गंभीर बात ओर है कि जलस्तर इतना नीचा जा चुका है उसे वापिस अपने पुराने स्तर पर आने में कितना समय लगेगा कह नहीं सकते। अभी जो ट्यूबवेल खुदा था उसमें जल आया लगभग ९६२ ft. पर। सबने वाटर हारवेस्टिंग अपने घर पर स्थापित करवा लिया है जिससे जलस्तर में सुधार आये। उज्जैन में भी पिछले तीने दिनों से रात को आधे घंटे बरसात हो रही है, महाकाल से विनती है कि इस बार सिंहस्थ जैसा पानी बरसा दें।

हम तो बचपन से ही इस समस्या से निपटते रहे हैं इसलिये हमारी आदत में शामिल हो गया है, कम पानी खर्च करना।

Friday, June 26, 2009

देर से ही सही पर आखिरकार सरकार को समझ में आ ही गया कि विशेष पहचान पत्र का प्रोजेक्ट नंदन नीलकेणि कर पायेंगे।

नंदन नीलकेणि को केबिनेट मिनिस्टर का दर्जा दिया गया। उन्हें विशेष पहचान पत्र भारतीय प्राधिकरण का प्रमुख बनाया गया है। चलो आखिरकार सरकार को समझ में आ ही गया कि ये काम पिछले ५-६ सालों से क्यों नहीं हो पा रहा था अब नीलकेणि को भी सरकार का पूरा सपोर्ट मिले बात तो तभी बनेगी कि कोई भी उनके काम में टांग न अड़ाये और स्वतंत्र रुप से कार्य करने दे।

आईटी क्षेत्र के लिये यह एक अच्छी खबर है कि सरकारी लोग भी अब निजी कंपनियों के अधिकारियों का लोहा मान रही हैं और उन्हें राजनीति से परे हटकर भारत के विकास में भागीदार बना रही हैं।

Thursday, June 25, 2009

पिछले ९-१० सालों से मोबाईल उपयोग कर रहे थे पर आज पहली बार मोबाईल गिरा है, आखिरकार हमसे भी लापरवाही हो ही गई।

परसों याने कि २३ जून को हमारा मोबाईल फ़ोन कहीं गिर गया और जहां गिरने का अंदेशा था वहां हमने कई बार जाकर ढूंढा पर न मिलना था और न ही मिला। एक रुपये वाले डिब्बे से फ़ोन मिलाया अपने मोबाईल नंबर पर लेकिन आऊट ओफ़ कवरेज ऐरिया का मैसेज आ रहा था। घर आकर सबसे पहले अपने एक मित्र को फ़ोन मिलाया जिनके साथ भी यह सब हो चुका था और उनसे बातचीत करने के बाद हमने अपने मोबाईल की आऊटगोइंग बंद करवाने के लिये काल सेंटर फ़ोन किया और वापिस से नंबर कैसे हमें मिलेगा इसकी जानकारी ली। अब हम परेशान कि क्या करें, वह नंबर तो वापिस नया मिल जायेगा परंतु जो फ़ोन बुक के नंबर गये जो जरुरी एस.एम.एस. थे उसका क्या करें, क्योंकि हमने कभी भी हाई-फ़ाई फ़ोन नहीं लिया । फ़ोन का मतलब हमारे लिये होता है कि आवाज आना जाना, एस.एम.एस. आना जाना। पर अब समस्या कि फ़िर नया फ़ोन खरीदें और फ़िर इतने सारे मोबाईल नंबर वापिस से ढूंढ कर नये मोबाईल में अपडेट करने की हम्माली करना पड़ेगी।

वो तो हमारी अकल चल गयी थी थोड़े दिनों पहले तो हम अपनी फ़ोन बुक एक्सेल शीट में लिख रहे थे और एन तक ही कंपलीट हो पाई थी अब ओ से जेड तक के फ़ोन नं की चुनौती हमारे सामने है। इसलिये अब सोच रहे हैं कि कोई ऐसा फ़ोन लेंगे जिससे अपने लेपटाप पर सीधे बेकअप ले सकें, भले ही उसके लिये नंबर बदलना पड़े, अब तकलीफ़ तो हो ही गई है तो थोड़ी सी और सही क्या फ़र्क पड़्ता है। सीडीएमए में इतने अच्छे मोबाईल नहीं हैं जितने कि जीएसएम में। सीडीएमए मोबाईल महंगे भी है और सुविधाएँ भी कम हैं, जबकि जीएसएम मोबाईल में कम दाम वाले फ़ोन में अच्छी आधुनिक सुविधाएँ हैं।

नंबर बदलने की कठिनाइयां जो हमें नजर आ रही हैं –

  • - कुछ लंगोटिया मित्रों के फ़ोन नंबर भी थे जो हमें अब याद नहीं हैं और केवल मोबाईल से ही संपर्क में थे, उनसे संपर्क टूट जायेगा।
  • - जहां जहां मोबाईल नंबर दे रखे हैं सब जगह अपडेट करवाना पड़ेगा।
  • - तब तक कुछ जरुरी मार्केट संबंधी जो एसएमएस आते थे उनसे महरुम रहना पड़ेगा मतलब रोज नुक्सान, अब ट्रेडिंग ही नहीं कर पायेंगे इसलिये L

वैसे हम लगभग पिछले ९-१० सालों से मोबाईल उपयोग कर रहे थे पर आज पहली बार मोबाईल गिरा है, आखिरकार हमसे भी लापरवाही हो ही गई।

खैर अगर मोबाईल किसी ने चुराया है तो जैसे ही सिम बदलेगा हमारे घर वाले मोबाईल पर मैसेज आ जायेगा क्योंकि उसमें मोबाईल ट्रेकर को हमने चालू कर रखा था। आज भी उम्मीद है कि हमें मोबाईल मिलेगा पर जब भी काल करो फ़ोन इस स्विच्ड ओफ़ सुनने को मिलता है।

Monday, June 22, 2009

नवभारत टाइम्स से (NBT)- दूसरे पैराग्राफ़ में लिखा है “महाराष्ट्र के कोंकण बेल्ट में ७ जून को मौसम ने दस्तखत दे दी, लेकिन उसकी गति थम गई।“ अब आप ही बताईये सही वाक्य क्या होगा।

नवभारत टाइम्स हिन्दी मुम्बई संस्करण के मुख्य पृष्ठ पर हिन्दी की गल्तियां अब रोज ही होने लगी हैं, पता नहीं इसके एडिटर क्या एडिट करते हैं।


अभी हाल ही की गलती देखिये शनिवार २० जून २००९ की, मुख्य पृष्ठ पर एक समाचार छपा था – “सिर्फ़ ३० दिनों के लिये बचा है पानी”। इसमें दूसरे पैराग्राफ़ में लिखा है “महाराष्ट्र के कोंकण बेल्ट में ७ जून को मौसम ने दस्तखत दे दी, लेकिन उसकी गति थम गई।“, अब भला बताईये क्या यह सही है क्या इसे ऐसा नहीं होना चाहिये था - “महाराष्ट्र के कोंकण बेल्ट में ७ जून को मौसम ने दस्तक दे दी, लेकिन उसकी गति थम गई।“

अब ब्लाग पर तो हम भाषा को सही तरीके से लिखने का प्रयत्न करते हैं पर क्या एक जिम्मेदार अखबार की जिम्मेदारी नहीं है सही हिंदी लिखने की।

Sunday, June 21, 2009

अगले सप्ताहों के लिये मार्केट टिप्स – सेनसेक्स एवं निफ़्टी के लिये

अगले सप्ताहों के लिये मार्केट टिप्स – सेनसेक्स एवं निफ़्टी के लिये

खरीदें –

GVKPL – BSE CODE – 532708 – रु. 38

IDFC – BSE CODE – 532659 – रु. 135

Federal Bank – BSE CODE – 500469 – रु. 250

GIC Housing – BSE CODE – 511676 – रु. 85

Titan Ind. – BSE CODE – 500114 – रु. 1179

कृपया अपने विवेक से निर्णय लें। हानि या लाभ की स्थिती में ब्लाग की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।

Friday, June 19, 2009

कुल्लू मनाली और बर्फ़ के पहाड़ों की सैर – कुल्लू और मनिकर्ण साहिब, गरम पानी के कुंड जिसमें खाना पकाते हैं।






अब आज हम निकल पड़े कुल्लू और मनिकरण की सैर को। मनाली से हम लगभग ११ बजे निकल पाये हम वहीं व्यास नदी के किनारे पर बैठ कर उसके कल कल निर्मल जल को निहार रहे थे और हमारा बेटा उसकी लहरों के साथ अठखेलियां कर रहा था। पर थोड़ी देर बाद हमें निकलना ही पड़ा क्योंकि समय ज्यादा हो चला था और फ़िर एक दिन और था नदी के पानी के साथ खेलने के लिये।

थोड़ी दूर जाने के बाद एक ढाबे पर चाय नाश्ते के लिये टेक्सी रोकी और थोड़ी दूर जाने के बाद ही वैष्णोमाता का मंदिर पड़ा, वहां पर मंदिर तो बहुत ही भव्य बन रहा था, लगभग ४ मंजिला अलग अलग भगवानों के मंदिर बना रखे थे और लंगर भी चल रहा था, कहते हैं कि पार्वती जी ने यहां तपस्या की थी जब उनका नाम उमा था। पर मंदिर का नाम वैष्णोमाता के नाम पर क्यों था हमें पल्ले नहीं पड़ा तो जितने भी पुजारी थे हमने सबसे यही सवाल पूछा कि यहां का महात्म्य क्या है, एक पुजारी तो गुस्सा हो गये कि आपने यह सवाल पूछने की हिमाकत कैसे की, पर बाकी सभी पुजारियों के एक ही रटे रटाये जबाब थे कि एक बाबाजी ने तपस्या की थी और उन्हें वहां पर वैष्णो देवी ने दर्शन दिये थे। पर हमारे मन को और दिल को यह मंदिर बिल्कुल नहीं जमा, ऐसा लगा कि धर्म की दुकान में आ गये हैं।

फ़िर शाल के कारखानों पर टेक्सी रुकी जहां पर हमने पशमीने की शाल देखी, लग अच्छी रही थी पर असली और नकली की पहचान न होने के कारण हमने रिस्क लेना ठीक न समझा। वहीं पर एक कोल्डड्रिंक की दुकान थी जो १० रुपये का कोल्डड्रिंक १५ रुपये में बेच रहा था तो बस हमारा गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उससे हड़्का कर पूछने लगे कि भाई ये क्या लगा रखा है क्या यहां भारत का कानून नहीं चलता है क्या जो सीधे इतना मुनाफ़ा कमाने के चक्कर में हो। पर वही एक जबाब लेना है तो लो नहीं तो आगे बड़ लो आखिर टूरिस्ट सीजन है न।

थोड़ी आगे जाने के बाद रिवर राफ़्टिंग पाईंट आने लगे थे। हमें पानी में जाने से डर लगता है इसलिये किनारे से ही दूसरे लोग रिवर राफ़्टिंग कर रहे थे, उन्हें निहार कर ही अपने मन को संतुष्ट कर रहे थे।





फ़िर चल दिये सीधे मनिकरण और साथ में चल रही थी व्यास नदी रास्ता बहुत ही खराब था हम लगभग ३.३० बजे पहुंच गये ये जगह मनाली से ८५ किमी दूर है। यहां पर गुरुद्वारा है और मंदिर हैं, यहां पर गरम पानी के दो स्त्रोत भी हैं जिनका तापमान क्रमश: ८४ एवं ९४ डिग्री है, जिनमें चावल, चने और दाल पकायी जाती हैं, एक कुँड में गुरुद्वारे के लंगर का खाना पकता है। जिसमें भक्त भी अपनी पोटली में अपने चने, चावल या दाल पका सकते हैं हमने भी चने पकाये लगभग ३० मिनिट में कच्चे चने बिल्कुल अच्छी तरह से खाने लायक हो गये थे।

यहां की कहानी शिवजी और पार्वती जी की है उन्होंने यहां पर ११,००० वर्षों तक तपस्या की थी और उसी समय पार्वती जी की अंगूठी वहां गिरकर खो गई, तो शिवजी के सारे गण भी उस अंगूठी को ढूंढने में नाकामयाब रहे तो शिवजी को गुस्सा आ गया और अपना तीसरा नेत्र खोल दिया प्रलय आने लगी, तक्षक ने अपना जहर उगलना शुरु किया जिसकी गर्मी से वहां उथल पुथल मच गयी और बहुत सारे मोती माणिक्य धरती पर आ गये, उसीमें पार्वती जी की अंगूठी भी मिल गई। उसी गर्मी से आज भी वहां ये दो स्त्रोत हैं वहां पर नंगे पैर चलना बहुत मुश्किल है क्योंकि इन गरम कुंडों के कारण पूरा फ़र्श बहुत ही गरम रहता है इसलिये वहां लकड़ी के पटिये लगा रखे है।

जय मनिकर्ण साहिब की। भोले बम कहते हुए हम वापिस मनाली की और लौट पड़े।

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अगले २ सप्ताह की मार्केट टिप्स – सेनसेक्स एवं निफ़्टी के लिये

अगले २ सप्ताह की मार्केट टिप्स – सेनसेक्स एवं निफ़्टी के लिये

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कृपया अपने विवेक से निर्णय लें। हानि या लाभ की स्थिती में ब्लाग की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।

Thursday, June 18, 2009

मैंने बहुत पहले एक माचिस के पीछे यह वाक्य पढा था ....

मैंने बहुत पहले एक माचिस के पीछे यह वाक्य पढा था जो कि मुझे आज भी याद है और सभी को बताना चाहता हूँ।

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“Practice makes man perfect, but nobody is perfect then why practice.”


Tuesday, June 16, 2009

कुल्लू मनाली और बर्फ़ के पहाड़ों की सैर – रोहतांग पास की सैर (स्नोपाईंट) Snowpoint Rohtang Pass




सुबह ५ बजे उठकर कड़ाके की ठंड में नहाकर हम लोग तैयार हो लिये रोहतांग पास (स्नोपाईंट) जाने के लिये। बिल्कुल ६ बजे हम टेक्सी में बैठकर चल दिये पहले तो वो टेक्सी पेट्रोल लेने के लिये लाईन में लगी बहुत बड़ी लाईन थी, नहीं लाईन नहीं थी जिसकी जहां मर्जी वह वहां घुस कर पेट्रोल भरवा रहा था, क्योंकि उस रोड पर वह आखिरी पेट्रोल पंप था इसके बाद फ़िर सीधे लेह में पेट्रोल पंप है।

अब हम चल दिये रोहतांग की ओर, निर्मल धवल श्यामल बर्फ़ के पहाड़ों की ओर । फ़िर लाईन से गरम कपड़े की दुकानें रास्ते में आईं जो कि गर्म कपड़े किराये पर देते हैं, क्योंकि ऊपर बहुत ही बर्फ़ीली हवाएँ चलती हैं और आँखों को जलन से बचाने के लिये चश्मे खरीद लिये, साथ में हमने स्कीईंग और गाईड भी लिया।

थोड़ी दूर जाने पर फ़िर हमने अपनी गाड़ी रुकवा कर नाश्ते के लिये एक ढाबा चुना। पीछे कल कल बहती व्यास नदी और ठंडी हवा ओर गर्म नाश्ता वाह।

अब हम चल दिये स्नोपाईंट के लिये तो कहीं पर रोड था तो कहीं पर बिल्कुल भी नहीं, डबल लेन का काम चल रहा था। बीच बीच में बहुत सारे प्राकृतिक झरने मिले। लगभग ३० किमी के बाद एक ग्लेशियर मिला जिसके बीच में से हमारी टेक्सी निकल रही थी। चूँकि हम सुबह जल्दी निकल लिये थे इसलिये हमें जाम भी नहीं मिला और हम लगभग १० बजे रोहतांग पास जो कि समुद्र तल से लगभग १३,०५१ फ़ीट ऊँचाई पर है जा पहुंचे।







वहां पर दो बड़े बड़े ग्राऊंड थे जहां पर लोग आपस में बर्फ़ से खेल रहे थे, स्कीईंग कर रहे थे, याक ओर घोड़ों की सवारी कर रहे थे, स्लेज भी चल रहे थे, बर्फ़ की मोटर साईकिल भी चल रही थीं। बस सब लोग बर्फ़ के इस अद्भुत लोक में आनंदित हो रहे थे।

हमारे परिवार ने भी जमकर स्कीईंग का मजा लिया और फ़िर स्नोबाईक का। फ़िर थोड़ी ट्रेकिंग की वहीं पर कुछ लड़्के पतंग उड़ा रहे थे तो हमने भी पूछ लिया कि भाई इधर पतंग किधर से ले आये तो जबाब मिला कि लखनऊ वाले हैं हरेक जगह पतंगबाजी का शौक पूरा करते हैं। खूब बर्फ़ से खेले और खूब तो फ़िसले। यहां पर व्यास ‌ऋषि का मंदिर है जहां से व्यास नदी निकल रही है, कहते हैं कि अर्जुन ने बाण मारकर यहां पर जल का स्त्रोत निकाला था।





थकान के बाद सोचा कि चलो अब कुछ खाने पीने का कार्यक्रम हो जाये, यहां टेन्ट में बहुत सारे छोटे छोटे ढाबे लगे हुए थे और खाने में गरम चीजों में मिल रहा था आमलेट और मैगी और चाय। खानपान के बाद करीबन १.३० बजे वापिस चल दिये मनाली के लिये क्योंकि मौसम खराब होने लगा था। और ठंडी हवा से हमें बहुत तकलीफ़ भी हो रही थी।

फ़िर वापिस मनाली आते आते वो बर्फ़ के पहाड़ हमसे दूर होते जा रहे थे। फ़िर हम उसी ढाबे पर रुककर चायपान किया और गर्म कपड़े किराये वाले वापिस किये और चल दिये आराम करने के लिये अपने होटल ।

अगले दिन का प्रोग्राम था कुल्लू रिवर राफ़्टिंग और मनिकरण का।

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कुल्लू मनाली और बर्फ़ के पहाड़ों की सैर

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Monday, June 15, 2009

कुल्लू मनाली और बर्फ़ के पहाड़ों की सैर – मनाली की लोकल सैर



कुल्लू मनाली और बर्फ़ के पहाड़ों की सैर


बस की १४ घंटे की लंबी यात्रा के बाद बहुत थकान थी पर चारों तरफ़ देवदार के वृक्ष और बर्फ़ के पहाड़ देखकर थकान कुछ हल्की हुई। होटल ने पिकअप के लिये टेक्सी भेजी थी हम उसमें सवार हो लिये और फ़टाफ़ट नाश्ता कर, तैयार होकर थोड़ी देर आराम करने का प्लान किया आँख खुली दोपहर एक बजे और फ़िर चल पड़े लोकल साईटसीन पर।




सबसे पहले तो हमने माल रोड पर दोपहर का खाना खाया और फ़िर चल पड़े वन्य विहार, जहाँ पर देवदार के ऊँचे पेड़ और बच्चों के झूले थे। हमारे बेटेलाल ने खूब तो झूले झूले और ठंडी हवा का आनंद लिया। वहीं पर एक छोटा सा वोटिंग क्लब भी था। 





फ़िर गये मोनेस्ट्री, बुद्ध भगवान का मंदिर। जिंदगी में पहली बार मैं किसी बोद्ध मोनेस्ट्री में था और बहुत ही अलग अनुभव था। मंदिर के दरवाजे के खंबों पर ड्रेगन बने हुए थे। भगवान बुद्ध की प्रतिमा बहुत ही अच्छी लग रही थी।




वहाँ से गये वशिष्ठ मंदिर जहाँ पर ‌ऋषि वशिष्ठ ने तपस्या की थी और अर्जुन ने यहां पर गुस्से में तीर मारकर गरम पानी का स्रोत निकाला था। कहते हैं कि इस पानी में नहाने से त्वचा संबंधी सारे रोग खत्म हो जाते हैं। रास्ते में वूलन वाले आवाज लगाते रहे चिंगू देख लो, हम भी एक दुकान पर देखने लगे चिंगू के कंबल देखे और बताया कि चिंगू एक बर्फ़ में रहने वाला प्राणी है जो कि आजकल बहुत ही दुर्लभ है अब उसके बालों को काट कर ये कंबल बुने जा रहे हैं ना कि मारकर ऐसा हमें बताया गया, ये सर्दी में गरम और गर्मी में ठंडे होते हैं और साथ में ५ आइटम फ़्री थे। पर चूंकि हमें कंबल लेना ही नहीं था इसलिये हम निकल लिये। वहां पर एक बहुत ही आश्चर्य़जन चीज देखने को मिली, छोटे छोटे ढाबों पर भारतीय व्यंजन नहीं, बाहर देशों के व्यंजनों के नाम लिखे हुए थे।

फ़िर निकल पड़े हिडिम्बा मंदिर जो कि भीम की पत्नी थीं वहां पर हिडिम्बा के पैरों के निशान आज भी मौजूद हैं और कहते हैं कि हिडिम्बादेवी के बिना मनाली का दशहरा पूरा नहीं हो सकता। मंदिर के बाहरी दीवार पर तरह तरह के सींग लगे हुए थे। वहीं पर घटोत्कच का एक मंदिर भी है। यहां पर हमने पहली बार याक देखे आज तक केवल फ़ोटो में ही देखे थे।
फ़िर निकल पड़े होटल आराम करने क्योंकि अगले दिन रोहतांग पास बर्फ़ के पहाड़ देखने के लिये सुबह ६ बजे निकलना था।

कुल्लू मनाली और बर्फ़ के पहाड़ों की सैर

हमारा एकदम घूमने का कार्यक्रम बन गया और हम दिल्ली में थे तो घूमने के लिये विकल्प भी बहुत थे क्योंकि हम उत्तर भारत में कहीं भी घूमने जा सकते थे। हमें और हमारे परिवार के मन में बर्फ़ के पहाड़ देखने की बहुत इच्छा थी तो एकदम कार्यक्रम बनाया गया कुल्लू मनाली का।

अपने ट्रेवल एजेंट से हमने दिल्ली से मनाली तक का वोल्वो बस का टिकट करवा लिया और टाईम तो था नहीं कुछ भी प्लान करने के लिये, कि कहां रुकेंगे क्या क्या घूमेंगे कैसे घूमेंगे। हमारे ट्रेवल एजेंट ने हमें आइडिया दिया कि आप मनाली में उतर कर बस स्टेंड से थोड़ा आगे जायेंगे तो माल रोड या फ़िर किसी और रोड पर होट्ल में मोलभाव कर लीजियेगा पर हमने सोचा कि कुछ अपने परिचित भी हैं जो कि यह जगह घूम आये हैं उनसे भी राय मशविरा कर लिया जाये और इस तरह से हमें चंडीगढ़ के एक ट्रेवल एजेंट का मोबाईल नंबर मिल गया और हमने उससे पूछा कि कुल्लू मनाली कितने दिन में घूम सकते हैं, तो उसने हमें ३ रात और ४ दिन का पैकेज बताया और हम भी उस पैकेज पर सहमत हो गये क्योंकि हमारे दिल्लीवाले ट्रेवल एजेंट ने पहले ही बोल दिया था कि सीजन चल रहा है और होटल भी बिल्कुल पैक होंगे अच्छा होगा कि आपको कोई पैकेज मिल जाये। तो हमने भी यह पैकेज फ़ाइनल कर घूमने जाने का फ़ैसला किया।

वोल्वो बस दिल्ली से मनाली के लिये जनपथ कनाट प्लेस पर होटल इंपीरियल के पास के पेट्रोल पंप से मिलती है। हमें समझ में नहीं आया कि पेट्रोल पंप से सवारी बैठाने की व्यवस्था क्यों। वैसे तो इन बसों को मजनूँ के टीले से चलना चाहिये पर शायद ये वोल्वो बसें दिल्ली ट्राफ़िक को ठेंगा दिखा रही थीं या फ़िर सब मिलीभगत थी। आखिरकार ५.०० बजे शाम के रिपोर्टिंग टाईम देने के बाद बस ७.०० बजे चल दी, बीच में एक अच्छे होटल पर रुकी जहाँ पर रात का खाना खाया गया और फ़िर जब सुबह नींद खुली तो देखा कि सड़क के साथ साथ विहंगम नदी चल रही थी और कोई बहुत बड़ा शहर नदी के उस पार था। नदी “व्यास” थी और शहर था “कुल्लू”। फ़िर सुबह ९.३० बजे हम लोग मनाली पहुंच गये।

Tuesday, June 09, 2009

कनाट प्लेस में तैनात कमांडो (commando) और हमारी आत्मीयता

हम पिछले एक महीने से कमांडोज को पालिका बाजार के पास तैनात देख रहे हैं और सोचते हैं कि कितना मुश्किल काम करते हैं ये लोग। भरी दोपहर बुलेटप्रूफ़ पहनकर और भारी बंदूक लेकर अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं केवल इसलिये कि हम लोग सुरक्षित रहें। इनकी ड्यूटी २४ घंटे रहती है।

 

जब रात को हम अपने ओफ़िस से निकलते हैं और आटो वाले से भावताव करते हैं, आटो वाले हमेशा ज्यादा पैसा मांगते हैं तो हम उनसे कहते हैं कि भैया चाकू दिखाकर लूटो ऐसे जबान से क्यों लूट रहे हो इसमें तो ये कमांडो भी हमारी मदद नहीं कर पायेंगे अगर चाकू दिखाओगे तब ये लोग हमारी मदद करेंगे। इस तरह से हमारी तो आत्मियता बन गई है इन कमांडोज के साथ।

 

कमांडोज अपना बुलेटप्रूफ़ और हथियार अपने साथ रखकर हमेशा युद्ध के लिये तैयार रहते हैं सलाम है मेरा उनके जज्बे को और हिम्मत को और उनके परिवार को।

Monday, June 08, 2009

Sigmatel चाईना मोबाईल में हिन्दी सपोर्ट उपलब्ध है।

आजकल मैं मोबाईल हैण्डसेट ढूँढ रहा हूँ जिसमें अच्छी क्षमता वाल वेब ब्राऊजर हो, हिन्दी का समर्थन हो, जावा का पूर्ण समर्थन हो, पर सीडीएमए (cdma) हो। कल ही मैं अपने एक मित्र से बात कर रहा था तो उन्होंने अपना खुद का एक हैंडसेट दिखाया जिसमें सब कुछ उपलब्ध था पर वह जीएसएम (gsm) था और चाईना का मोबाईल था सिग्माटेल। उन्होंने तकरीबन ८ माह पहले खरीदा था और बहुत ही बढ़िया चल रहा है। २ जीएसएम की सिम एक साथ उपयोग कर सकते हैं और उन्होंने खरीदा था मात्र ३००० रुपयों में।

 

बैटरी भी अच्छी चल रही है। बस हिन्दी टाईप नहीं कर सकते, मैंने अपना ब्लाग खोलकर देखा तो बहुत ही अच्छी तरह से स्क्रीन पर प्रदर्शित हुआ। बस फ़िर हमने सोचा कि चलो चाईना सीडीएमए को खोजा जाये और निकल पड़े पालिका बाजार में वहाँ सीडीएमए का एकमात्र हैंडसेट था मेलबोन (melbon) का| जो कि सीडीएमए व जीएसएम दोनों को एक साथ समर्थन करता है मतलब आप दोनों की सिम एक साथ उपयोग कर सकते हैं। पर उसमें वो चाईनीज खूबियाँ नजर नहीं आईं जिसके लिये चाईनिज मोबाईल इतने प्रसिद्ध हो रहे हैं जैसे कि अच्छी क्वालिटी का कैमरा, ४-५ स्पीकर, टच स्क्रीन, बडी स्क्रीन और भी बहुत कुछ। भाव बताया गया ५८०० रुपये, इतना दाम सुनकर हमें उस दुकान पर रुका नहीं गया और हम पालिका बाजार से निकल लिये।

 

इंडियाटाईम्स शापिंग यह मोबाईल ५५०० रुपये में उपलब्ध करवा रही है और इस चाईनीज मेलबोन मोबाईल पर एक साल की वारंटी कंपनी दे रही है जो कि चाईना मोबाईल बाजार के इतिहास में पहली बार है।

 

मोबाईल हैंडसेट की ढूँढ जारी है।

Sunday, June 07, 2009

इन.कोम (in.com) ओनलाईन गाने सुनने की बेहतरीन जगह (Ultimate site for to hear online songs)

वैसे तो यह साईट बहुत उपयोगी है, परंतु मैं इस साईट का उपयोग गाना सुनने के लिये करता हूँ। जब कभी जिस भी गाना सुनने की इच्छा होती है, in.com पर जाकर खोज के ऊपर म्यूजिक टैब दबाकर अपना मनपसंदीदा गाना लिखकर सर्च पर क्लिक कर दें, सामने उस गाने से संबंधित परिणाम होंगे। बस प्ले बटन दबाकर गाने का आनंद लीजिये। इसका बफ़रिंग बहुत ही बढ़िया है इसलिये ऐसा लगता है कि गाना लोकल ड्राईव से ही बज रहा है।

 

वैसे यहाँ कुछ हिन्दी रेडियो स्टेशन्स भी उपलब्ध हैं और आप अपनी पसंद की एलबम बनाकर उसे सुरक्षित भी कर सकते हैं।

Friday, June 05, 2009

Nokia 6265 और मोबाईल कंपनियों एवं सर्विस प्रोवाइडर्स की लूट

मैं टाटा इंडिकाम सीडीएमए लगभग पिछले चार सालों से उपयोग कर रहा हूँ और कई बार मुझे परेशानी हुई परंतु हमने अपने ग्राहक अधिकार दिखाते हुए सारी परेशानियों को दूर करवाया। कौन सी परेशानियां कैसे दूर हुईं वो कभी और बताऊँगा।

अभी मैं सैमसंग एक्सप्लोरर फ़ोन का उपयोग कर रहा हूँ पर उस पर इंटरनेट ब्राऊजर की सीमित क्षमताओं के कारण मैं कोई नया फ़ोन ढूँढ रहा था तो कोई भी अच्छा फ़ोन नहीं मिला और मिला तो नोकिया 6265. पर परेशानी यह है कि आज से ४ साल पहले भी उसका भाव 15,500 था और आज भी वही है। अब कोई मुझे बताये कि क्या ये मोबाईल खरीदने में समझदारी है ?

भाव केवल टाटा के लोकल हेडओफ़िस से ही मिलते हैं टाटा के कस्टमर केयर 121 पर किसी भी अधिकारी को भाव नहीं पता है तो उन्होंने अपने मार्केटिंग के कस्टमर केयर का नंबर 9210008282 दे दिया, वहाँ फ़ोन किया तो उनको भी कुछ पता नहीं था। अब जबकि मेरे सामने टाटा इंडिकाम की वेबसाईट पर वह फ़ोन दिख रहा था पर टाटा इंडिकाम के मार्केटिंग डिपार्टमेंट को उस फ़ोन के बारे में कुछ पता नहीं है। अब मैंने कस्टमर केयर अधिकारी को कहा कि आप अपने सुपरवाइजर से बात करवा दीजिये जिससे मैं आपकी शिकायत कर सकूँ या फ़िर कोई और नंबर दे दो तो आपके डिपार्ट्मेंट की और आपकी शिकायत कर सकूँ तो थोड़ी देर अपना म्यूजिक सुनाकर फ़ोन काट दिया ऐसा पांच बार हुआ। अब मैं इस मामले को अपने तरीके से निपटाऊँगा।

अब मैं फ़ोन लगाता हूँ तो केवल यह टेप सुनने को मिलता है “हमारे सभी कस्टमर सर्विस एक्जिक्यूटिव अभी व्यस्त हैं आपकी काल हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण है, कृप्या लाईन पर बने रहें”।

क्या कोई ब्लागर बंधु मुझे ऐसे मोबाईल हैंड्सेट के बारे में बता सकता है जिससे मैं बिना अपना सर्विस प्रोवाइडर बदले अच्छे ब्राऊजर वाला फ़ोन मिल जाये। क्योंकि जो काल की स्कीम सीडीएमए प्रोवाइडर देते हैं उतनी सस्ती काल जीएसएम वाले दे ही नहीं सकते।

कालजयी साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध रचना “हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती, स्वयम प्रभा समुज्जवला स्वतंत्रता पुकारती॥“

जब हम कालेज में पढ़्ते थे तब जयशंकर प्रसाद की यह प्रसिद्ध रचना बहुत ही अच्छा लगती थी और यह गीत हमारी मित्र मंडली में सबको बहुत पसंद था। चूँकि हम सब मतलब हमारा समूह स्टेज आर्टिस्ट थे, कला से जुड़े थे तो हमारे नाटकों में हम कोशिश करते थे कि हम इसी प्रकार का कोई गीत सम्मिलित करें।

फ़िर जब "चाणक्य" धारावाहिक छोटे पर्दे पर शुरु हुआ तो हमें नई लय के साथ यह गीत मिल गया जो कि आज भी मेरा मनपसंद है और मेरे बेटे का भी।

स्वतंत्रता को प्राप्त करने के लिये उठाने वाले इस गीत को सुनते ही आज भी रगों में खून तेज गति से दौड़ने लगता है। प्रस्तुत है रचना -

हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती, स्वयम प्रभा समुज्जवला स्वतंत्रता पुकारती॥ कोरस
अमर्त्य वीर पुत्र हो दृढ़ प्रतिज्ञ सोच लो, प्रशस्त पुण्य पंथ है बढ़े चलो बढ़े चलो॥ कोरस
असंख्य कीर्ति रश्मियाँ विकिर्ण दिव्य दाह सी, सपूत मातृभूमि के रुको न शूर साहसी॥ कोरस
अराति सैन्य सिंधु में सुबाड्वाग्नि से जलो, प्रवीर हो जयी बनो बढ़े चलो बढ़े चलो॥ कोरस


यूट्यूब पर वीडियो के लिये चटका लगायें

Thursday, June 04, 2009

शादी के पहले के प्यार भरे खत (Love Letters) फ़्री और लंबी मोबाईल काल्स में खो गये

जब मेरी शादी पक्की हुई थी, उस समय मोबाईल तो आ गये थे पर इनकमिंग पर भी चार्ज था और आऊटगोइंग बहुत महंगी थी। उस समय तो घर पर लेंडलाईन से भी आऊटगोइंग करने पर ज्यादा चार्ज था और आमदनी कम।

मेरी शादी पक्की होने के छ: महीने बाद हुई थी पर फ़ोन महंगा पड़ता था। खत का सहारा लेकर अपने दिल की बात एक दूसरे को पहुँचाते थे और उस समय ग्रीटिंग कार्ड को साथ में भेजने का फ़ैशन था। घंटों तक खत लिखते और फ़िर घंटों तक कार्ड गैलेरी में जाकर कार्ड चुनते और अपने दिलदार को भेजते। हम उनके खत का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करते थे और वो हमारे खत का। खत में अपने दिल के प्यार से भर देते और अपने दिलदार के खत को गुलाब के फ़ूल के साथ और कुछ अच्छे ग्रीटिंग कार्ड साथ में भेज देते। फ़िर वे खत हम बारबार पढ़कर कुछ नया पढ़ने की कोशिश करते थे।

आज की मोबाईल पीढ़ी खत के मिठास के बारे में क्या जाने वो तो बस दिन रात मोबाईल पर चिपके रहते हैं, और पल पल की जानकारी एक दूसरे से बांटते रहते हैं कि क्या कर रहे हो, ओफ़िस कैसे जा रहे हो, क्या खा रहे हो, क्या पी रहे हो इत्यादि इत्यादि। इन लोगों के पास इन यादों को सहेजने का कोई तरीका मौजूद नहीं है और हमारे पास आज भी वो यादें हमारे साथ हैं, जिसे कभी कभी हम आज भी पढ़ लेते हैं।

Wednesday, June 03, 2009

सीसी प्रॉक्सी (CCProxy) - प्रॉक्सी सर्वर सॉफ्टवेयर Windows के लिए

प्रॉक्सी सर्वर सीसी प्रॉक्सी उपयोग करने में आसान और इंटरनेट कनेक्शन साझा करने का शक्तिशाली साफ़्टवेयर है।

सीसी प्रॉक्सी ब्रॉडबैंड, डी.एस.एल. (DSL), डायल अप, ऑप्टिकल फाइबर, उपग्रह (satellite), ISDN एवं DDN कनेक्शन में समर्थन (support) करता हैं, यह आप के लैन(LAN) के भीतर कुशलतापूर्वक और आसानी से अपने खुद के प्रॉक्सी सर्वर और शेयर इंटरनेट को उपयोग करने में मदद करता है| सी.सी. प्रॉक्सी सर्वर एक HTTP, मेल, FTP, Socks, समाचार और Telnet प्रॉक्सी सर्वर के रूप में कार्य कर सकता है। इसकी सुविधाएँ हैं – सुचारु रुप से खातों का प्रबंधन, इंटरनेट का उपयोग नियंत्रण, बैंडविड्थ नियंत्रण, इंटरनेट वेब छानने, सामग्री छानना और समय पर नियंत्रण|
यह वेब कैशिंग, ऑनलाइन पहुँच निगरानी, कार्य उपयोग और बैंडविड्थ उपयोग के आँकड़े भी उपलब्ध करवाता है। सी.सी. प्रॉक्सी Win98, WinME, Winnt, Win2000, WinXP, Win2003 और Vista के साथ अच्छे से कार्य करता है।

प्रॉक्सी सर्वर CCProxy का पहला संस्करण जून 2000 में विकसित किया गया था।

यह शुरू में लैन में मॉडेम साझा करने के लिए तैयार किया गया था।

अगर एक लैन में किसी एक कंप्यूटर पर इंटरनेट का उपयोग कर सकते हैं तो लैन के भीतर सभी अन्य कंप्यूटरों पर इस प्रॉक्सी सर्वर सॉफ्टवेयर के द्वारा इंटरनेट का उपयोग कर सकते हैं. यह हार्डवेयर और इंटरनेट कनेक्शन के रुप में धन की बचत कर सकता है।

सी.सी. प्रॉक्सी वेब प्रॉक्सी सॉफ्टवेयर, के रूप भी कार्य कर सकता है। जिससे आप वेब पन्नों, डाउनलोड फ़ाइलें और भेजने और IE, फ़ायरफ़ॉक्स, नेटस्केप वेब ब्राउज़र के माध्यम से ब्राउज़ करने के लिए सक्षम बनाता है और वेब कैशिंग फ़ंक्शन से.सर्फिंग गति बढ़ा सकते हैं।

सी.सी. प्रॉक्सी (CCProxy) लैन पर इंटरनेट का उपयोग को नियंत्रित करने के लिए कई तरीकों से शक्तिशाली प्रबंधन कार्य करता है। जो कि आईपी पता, आईपी रेंज, मैक पता, उपयोगकर्ता नाम / पासवर्ड और समूह हैं।
वेब फ़िल्टरिंग और सामग्री फ़िल्टर फ़ंक्शन से आप क्लाइंट्स का उपयोग कुछ सीमित वेबसाईटों तक कर सकते हैं, यह आपके कर्मचारियों को अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा है और बच्चे अनुपयुक्त स्थलों की यात्रा करने में असमर्थ रहें यह सुनिश्चित करने के लिए आपको मदद मिलेगी। समय अनुसूची फ़ंक्शन उपयोगकर्ताओं 'ऑनलाइन समय को नियंत्रित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

क्लाइंट के लोगिन और ऑनलाइन उपयोग पर निगरानी में और इंटरनेट गतिविधियों को रिकार्ड करने में मदद करेगा।

अधिक जानकारी के लिये यहां तड़का लगाइये।

Tuesday, June 02, 2009

श्रवण कुमार और दिल्ली की मिट्टी का कमाल

आज ताऊ के ब्लाग पर कलयुगी श्रवण पढ़ा तो एक वाक्या याद आ गया दिल्ली में श्रवण कुमार का।

दिल्ली वाले कृपया बुरा न मानें वैसे मैं भी नार्थ इंडियन हूँ और मुंबई में रहते हुए लगभग ४ साल पूर्ण हुए हैं।

दिल्ली में एक मित्र से वार्तालाप चल रहा था और हम सामाजिक मुद्दों पर बात कर रहे थे कि मुंबई और दिल्ली में क्या भिन्नता है। दिल्ली में कोई भी तबके का व्यापारी हो वो ग्राहक को लूटने का प्रयत्न करता है, जैसे आटो वाले, फ़लवाले, इलेक्ट्रानिक दुकानवाले इत्यादि। ऐसा नहीं है कि मुंबई में लूट नहीं है परंतु दिल्ली के मुकाबले तो बहुत कम है पर फ़िर भी लूट तो लूट ही है। फ़िर भी मुंबई का आम आदमी आत्म अनुशासित है पर दिल्ली का नहीं क्यों ??

साउथ इंडिया की श्रंखला का एक प्रसिद्ध होटल करोलबाग में है और वहाँ पर साउथ इंडियन आँख बंद करके जाते हैं और अगर कमरा खाली नहीं भी होता है तो घंटों तक खाली होने का इंतजार करते रहेंगे पर किसी और होटल में जाना पसंद नहीं करेंगे। क्योंकि उन्हें साउथ इंडियन होटल पर विश्वास है परंतु दिल्ली वालों पर नहीं और अगर तब भी को कमरा खाली नहीं होता है तो जो भी वहाँ आते हैं उन लोगों को वो साउथ इंडियन होटल वाले ही दूसरे होटल में कमरा आरक्षित करके देते हैं।

कहते हैं कि जब श्रवण कुमार अपने अंधे माता पिता को कंधे पर पालकी में ले जा रहे थे तो जैसे ही श्रवण कुमार का दिल्ली में आगमन हुआ उन्होंने अपने माता पिता से घुमाने का किराया मांगा तो उनकी माताजी ने कहा चल बेटा आगे चल तुम्हें हम आगे किराया दे देंगे और थोड़ी सी मिट्टी अपने हाथों में लेकर अपने पास रख ली। जब मथुरा पहुंचे तो श्रवण कुमार से उनकी माता ने कहा कि कितना किराया चाहिये तब श्रवण कुमार ने कहा कैसा किराया क्योंकि वो तो सब भूल गये थे। फ़िर वो मिट्टी को रखकर उनकी माता बोली अब इस पर खड़े हो और बताओ तो झट से फ़िर श्रवण कुमार ने फ़िर किराया मांगा। यह सब दिल्ली की मिट्टी का कमाल है।

ये कैसी शादी के बाद की आजादी, जो कुछ करना है वो पर्दे की पीछे करें, सार्वजनिक न करें।

अभी परसों ही में ट्रेन में यात्रा कर रहा था तो जिस केबिन में मेरी सीट थी, उस केबिन में एक परिवार जो कि नागपुर से सफ़र कर रहा था और उनका एक ६ साल का बेटा भी था। साइड लोअर व साइड अपर में एक नवविवाहित दंपत्ति थे। जो कि सबके सामने बड़ी ही अभद्र हरकतें कर रहे थे, खुलेआम एक दूसरे को चूम रहे थे और अश्लीलता की हरकतें कर रहे थे। परंतु बोले कौन ! क्योंकि कोई भी बोलना नहीं चाहता, मैं भी नहीं। क्योंकि इन लोगों को समझाने का कोई मतलब ही नहीं है।

जो परिवार मेरे पास बैठा था वो भी कनखियों से ये सब देख रहा था और बच्चे को अपने में बिजी रख रहे थे ताकि वो उनकी हरकतों पर ध्यान न दें परंतु वो बच्चा तो बड़ी गौर से वही सब देख रहा था और कुल मिलाकर वातावरण प्रदूषित हो रहा था। उस परिवार के सज्जन मुझसे बोले ये लोग क्यों थर्ड एसी में आये यही सब करना था तो सेकंड एसी में जाते कम से कम वहाँ पर्दा रहता है जो भी करते ये लोग उस पर्दे के पीछे कम से कम हमें तो दर्शक नहीं बनना पड़ता वो भी जबरदस्ती।

इस परिस्थिती ने वाकई यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर आप शादी के बाद घूमने (हनीमून) जा रहे हो तो बाहर नैतिकता से रहें और जो कुछ करना है वो पर्दे की पीछे करें, सार्वजनिक न करें।

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