कल्पतरु: दिखने वाली शायरी फ़ोकटियों के लिये (Visual Shayari Fokatiyo ke liye)

Friday, November 06, 2009

दिखने वाली शायरी फ़ोकटियों के लिये (Visual Shayari Fokatiyo ke liye)

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5 टिप्पणियाँ:

ताऊ रामपुरिया said...

ना भाई हमको नही खाना ऐसा खाना.:)

रामराम.

नीरज गोस्वामी said...

वाह...कमाल का व्यंग चित्र...आप की इस कला को नमन...
नीरज

M VERMA said...

bahut khoob kyaa kahane

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey said...

खाने का मेन्यू बतायें तो आगे सार्थक सोचा जाये! :-)

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सबसे अच्छी बात तो बोर्ड पर जलने बुझने वाली लाईट है

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